सभापति के नाम मकान नहीं और थमा दिया कर का नोटिस

सभापति के नाम मकान नहीं और थमा दिया कर का नोटिस

amit mandloi | Publish: Sep, 08 2018 11:10:56 AM (IST) Dewas, Madhya Pradesh, India

- जिसने चुनाव के समय पूरा पैसा भरा उसे भी दिया, सभापति ने जब प्रश्न किया तो जवाब देते नहीं बन रहा है

संपत्तिकर
बकायादार 31 हजार
राशि 32 करोड़ 83 लाख 94 हजार

जलकर
बकायादार 14 हजार
राशि तीन करोडे 50 लाख

लायसेंस
बकायादार 3800
राशि 21 लाख
दुकान मार्केट ननि
बकायादार 78
राशि 18 लाख

देवास अमित एस मंडलोई
निगम के सभापति के नाम पर मकान ही नहीं है और उन्हें नोटिस जारी करते हुए लोक अदालत में पैसा वसूली का फरमान सुना दिया गया। इसके अलावा कई ऐसे लोग शामिल है, जिन्हें बेजा नोटिस जारी किए है। कई लोग शिकायत लेकर जब सभापति के पास पहुंचे तो उन्होंंने निगम आयुक्त को पत्र लिखकर जवाब मांगा लेकिन उन्हें जवाब नहीं मिला। वहीं जब पत्रिका ने राजस्व विभाग के जिम्मेदारों से बात की तो वे पूरा मामला एक-दूसरे पर टालते नजर आए।

निगम सूत्रों के मार्फत पत्रिका को सभापति अंसार अहमद का पत्र हाथ लगा। जब इसकी पड़ताल की गई तो संपत्तिकर के नोटिसों में तमाम गोलमाल निकला है। बताया जाता है ये पत्र आम लोगों द्वारा सभापति अहमद के पास पहुंची शिकायत के बाद जारी हुआ है। सभापति ने 28 अगस्त को पत्र जारी करते हुए तीन दिन में जवाब मांगा था। सभापति ने पत्र में आयुक्त विशालसिंह चौहान से पूछा था कि 8 सितंबर को जो लोक अदालत होने जा रही है, उसमें जो नोटिस जारी हो रहे है, उसमें किसी भी जिम्मेदार अधिकारी के हस्ताक्षर क्यों नहीं है। अहमद ने लिखा है कि नेशनल लोक अदालत जो राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित होती है बिना उसमें प्रिलिटीगेशन दायर किए तथा बिना हस्ताक्षर किए हुए बिल जिस पर मात्र लोक अदालत की सील अंकित करने के आधार पर सरचार्ज में जो छूट दी जा रही है, क्या ये उचित है। इस संबंध में जब अहमद ने राजस्व अधिकारी से चर्चा की तो उन्होंने आयुक्त के आदेश से होना बता दिया।

मेरा मकान नहीं और कर दिया नोटिस जारी

अहमद ने लिखा है कि कई लोगों को दो-तीन बिल जारी कर दिए है। कई पीडि़त अंसार अहमद के पास पहुंचे फिर उन्होंने पत्र जारी किया। जारी पत्र में उन्होंने लिखा है कि मेरे स्वयं का आदर्श नगर में भवन है,जो पत्नी के नाम से है। जिसका संपत्तिकर जमा है, उसी भवन का एक अन्य मेरे नाम से भी बिल दर्ज है, जो मुझे प्राप्त हुआ है। जानकारी के बिना कर भरने के बाद भी उन्हें 60 हजार रुपए का नोटिस मिला है।
2000 में भरा पैसा, फिर भी निकाल दी वसूली
नगर के प्रतिष्ठित वकील मिर्जा मकसूद ने वर्ष 2000 में चुनाव लड़ा थ। चुनाव के दौरान तमाम करों को जमा करना होता है। उन्होंने भी कर भर दिया था, इसके बाद भी उन्हें 1997 से बकाया का बिल जारी कर दिया है। मकसूद ने बताया कि उनके मकान का वर्ग फीट भी गलत अंकित है। उन्हें जो बिल मिला है,उसमें तल और प्रथम मंजिल निगम ने 500 वर्ग फीट आंककर बिल दिया है,जबकि मिर्जा का कहना है कि उनका मकान 250 वर्ग फीट में ही है। मिर्जा ने बताया कि वे इसका जवाब लोक अदालत में देंगे।

आज नहीं सालों से है गड़बडी

दरअसल निगम में ये गड़बड़ी आ से नहीं वर्षों से चली आ रही है। सूत्रों के मुताबिक संपत्तिकर बढ़ा दिखाने के लिए तत्कालीन अधिकारियों ने फर्जी सर्वे करा लिया था। इसके बाद करोडों बकाया दिखाया था। एक मकान के दो से तीन खाते खोल दिए थे। एक खाते में ईमानदार उपभोक्ता पैसा भर रहा है,लेकिन उसे ये नहीं पता कि एक ही मकान नंबर पर दो अन्य खाते फर्जी और चल रहे है, जिसका उन्हें पता नहीं होता है और पैसा भरने के बाद भी उन्हें बिल थमा दिए जाते है। कोई उपभोक्ता तो अपने मकान के दो या तीन खाते का पता चलता है, तो वह निगम पहुंचता है,लेकिन राजस्व अमला ध्यान ही नहीं देता है।

मेरा काम सिर्फ लोक अदालत का है, वो मैं कर रहा हूं। बिल हमारे यहां से जारी नहीं होते है। यह सही है सभापति ने पत्र भेजा है,लेकिन राजस्व से पत्र यहां भेज दिया, जबकि मैं सिर्फ लोक अदालत का प्रभारी हूं।
भास्कर सरमंडल, लोक अदालत प्रभारी

ये बिल भास्कर सरमंडल की ओर से जारी किए है। वे ही जानकारी दे सकते है। सभापति का पत्र प्राप्त हुआ था, उसे भी वहीं भेज दिया है।
सीएस जाट, राजस्व अधिकारी

आपको जो निगम से मेरा पत्र की जानकारी मिली है, वह सही है। कई लोग मेरे पास शिकायत लेकर पहुंचे थे, जिसके चलते मैंने 28 अगस्त को जारी बिलों की जानकारी मांगी थी, तीन दिन में जवाब देना था, लेकिन इन लोगों से जवाब देते नहीं बन रहा है। इतना ही नहीं मेरे नाम से मकान है ही नहीं और मुझे भी बिल थमा दिया है, जो गलत है।
अंसाह अहमद, सभापति नगर निगम

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