VIDEO बेटी बनी बैल, मां चला रही डोरे

mayur vyas | Updated: 14 Jul 2019, 12:47:33 PM (IST) Dewas, Dewas, Madhya Pradesh, India

कृषि लाभ का धंधा सरकारों के दावे के बावजूद नहीं बना, अगर बनता तो ये दिन एक आदिवासी महिला को नहीं देखने पड़़ते

ओमप्रकाश परमार
कुसमानिया. आदिवासी समाज तक सरकार की योजनाएं नहीं पहुंच पाती है। अगर पहुंचती तो आज इसी समाज की एक विधवा महिला को अपने दो बच्चों को पालने के लिएकड़ी मशक्कत नहीं करना पड़ती। इस साल भी चार एकड़ के छोटे से खेत में डोर चलाने की बारी आई तो मां को मजबूरन अपनी बेटी को बैल की जगह पर रखना पड़ा। मजबूरी भी है क्यों कि डोरे चलाने का अतिरिक्त खर्च ये महिला नहीं उठा सकती। कृषि लाभ का धंधा सरकारों के दावों के बावजूद कितना बना इसकी पोल भी ऐसे मामलों के बाद खुल जाती है।
ऐसा ही एक मामला कन्नौद तहसील के ग्राम भिलाई में देखने को मिला। जहां अपने परिवार का पालन-पोषण करने के लिए मां-बेटी मिलकर डोरे चला रही है। अपनी फसल में उगे अनावश्यक घास को हटाने के लिए जहां बेटी बैल बन गई, वहीं मां डोरे को संभाल रही है।
कुसमानिया-दीपगांव मार्ग स्थित ग्राम भिलाई के पठार पर इस प्रकार का नजारा इस मार्ग से निकलने वाले सभी राहगीर देखकर निकल जाते है। आपको बता दे भिलाई के पठार पर आदिवासी व अन्य परिवार के करीब 25 घर होंगे। इन्ही के बीज कारीबाई पति हरदास बारेला भी रहती है। जो अपनी 4 एकड़ कृषि भूमि में मक्का एवं मूंगफली उगाकर परिवार का पालन पोषण कर रही है।
बेटे-पति की हो गई मौत
कारीबाई ने बताया कि 3 साल पहले एक सडक़ हादसे में उनके पति हरदास और बेटे संतोष की मौत हो गई। तब से वे अपना परिवार पालने के लिए खेती और मजदूरी कर रही है।
महिला ने हिमत नहीं हारी
कारीबाई के चार बच्चे हैं जिसमे से दो बेटियों रिंकू और रितु की शादी हो गई है। बेटी कृष्णा(12) व बेटा सतीष (10) व बूढ़ी सास नीलीबाई का पेट भरने के लिए आदिवासी महिला ने हिमत नहीं हारी और मजबूत इरादों से खेत में काम करना शुरू किया। कारीबाई ने बताया कि उनकी बड़ी बेटी कृष्णा स्कूल नहीं जाती है। घर और खेत के काम में उनकी मदद करती है।
सभी सदस्य हाथ बंटाते
खेती में ज्यादा लागत न लगे इसलिए चौकड़ी से मक्का लगाई और मूंगफली और चवली भी लगाई है। खेती के काम में सभी छोटे-बड़े सदस्य जुट जाते हैं। वर्तमान में कारीबाई ने अपने खेत मे मक्का और मूंगफली लगा रखी है। इनका परिवार आर्थिक संकट से जूझ रहा है। इनको पंचायत की और से शासन की पीएम आवास, शौचालय, कल्याणी पेंशन और बीपीएल कार्ड का लाभ मिला लेकिन खेत के लिए अब तक किसी विभाग से कोई लाभ प्राप्त नहीं हुआ।
मुश्किल से खरीदा था बीज
कारीबाई ने बताया कि उन्होंने मुश्किल से मक्का और मूंगफली का बीज खरीदकर खेत में बीज लगाया है। इनके पास न तो बैल है और न ही बैल चलाने वाला है। इस संबंध में पंचायत सचिव राजेश बागवान ने बताया कि कारीबाई को पंचायत स्तर से पीएम आवास, शौचालय, कल्याणी पेंशन और बीपीएल कार्ड का लाभ दिया है। पात्रता अनुसार जो भी योजनाएं आएगी उनका लाभ भी प्राथमिकता से दिया जाएगा। इस संबंध में कृषि विभाग के अनुविभागीय अधिकारी आरके वर्मा से चर्चा की तो उन्होंने बताया कि अब तक मुझे यह मामला जानकारी में नहीं था। अब कृषि विभाग की योजनाओं का लाभ प्राथमिकता से दिया जाएगा।

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