शिक्षा विभाग में शुरू हुआ किस्सा कुर्सी का...अटकलें हुई तेज- कौन बनेगा डीईओ...?

शिक्षा विभाग में शुरू हुआ किस्सा कुर्सी का...अटकलें हुई तेज- कौन बनेगा डीईओ...?
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Amit S mandloi | Updated: 04 Jun 2019, 01:03:45 PM (IST) Dewas, Dewas, Madhya Pradesh, India

खेड़े के जाने के बाद नहीं मिला स्थायी डीईओ, खींचतान के कारण धूमिल हुई विभाग की छवि

देवास. अपनी कार्यशैली के चलते सुर्खियों में रहने वाले शिक्षा विभाग में अब किस्सा कुर्सी का शुरू हो गया है। वैसे तो डीईओ की कुर्सी पाने के लिए यहां खींचतान होना आम बात है लेकिन बीते कुछ सालों से जिस तरह से हालात बिगड़े हैं उसके बाद से विभाग की छवि धूमिल हुई है। अब यह मामला फिर से इसलिए उठा है क्योंकि वर्तमान डीईओ रिटायर्ड होने वाले हैं और उनकी जगह नए डीईओ के लिए दौड़भाग शुरू हो चुकी है। इनमें पूर्व में प्रभारी डीईओ रह चुके दो प्राचार्य मशक्कत कर रहे हैं।

दरअसल शिक्षा विभाग का ढर्रा पिछले कुछ सालों से बेपटरी हुआ है। विडंबना यह है कि रामेश्वर खेड़े के बाद कोई स्थायी डीईओ नहीं आ सका। खेड़े की कार्यशैली के चलते विभाग में थोड़ा नियंत्रण था और वे बेबाक कार्यशैली के लिए जाने जाते रहे लेकिन बाद में स्थिति बिगड़ती चली गई। बिगड़े ढर्रे का सबसे बड़ा कारण अनावश्यक राजनीतिक दखल है। कर्मचारियों के बीच सामंजस्य का अभाव, मनमानी भी इसका कारण है। अधिकारी से ज्यादा दखल बाबुओं का रहता है और मिलीभगत के कारण नियमों तक को ताक पर रख दिया जाता है। ऐसे कई मामले सामने भी आए हैं जिनमें विभाग की छवि धूमिल हुई है। आपसी शिकायतें हुई हैं और बात भोपाल तक पहुंची। इन सबके मूल में डीईओ ही रहे क्योंकि बाबुओं पर उनका नियंत्रण नहीं रहा और मनमानी बढ़ती गई।

दो पूर्व प्रभारी डीईओ कर रहे जतन

वर्तमान में सीबी केवट प्रभारी डीईओ है। जून माह में वे रिटायर्ड होने वाले हैं। उनके रिटायर्डमेंट की जानकारी लगते ही डीईओ की कुर्सी के दावेदार सामने आने लगे हैं। इनमें दो पूर्व प्रभारी डीईओ के नाम सामने आ रहे हैं। एक नाम राजीव सूर्यवंशी का है जो फिलहाल डीपीसी के पद पर हैं तो दूसरे राजेंद्र खत्री हैं। खत्री को एक मामले में निलंबित भी किया गया था। अब दोनों फिर से सक्रिय हुए हैं और डीईओ बनने के ख्वाब देख रहे हैं। इनके अलावा दो नाम और हैं। इनमें उत्कृष्ट विद्यालय प्राचार्य चंद्रावती जाधव, चिमनाबाई स्कूल के प्राचार्य एफबी मानेकर शामिल है। नाविमं-1 के आरएस जर्हा का भी नाम चल रहा है लेकिन कहा जा रहा है कि वे भी सेवानिवृत्त होने वाले हैं। इधर डीईओ की कुर्सी के लिए कांग्रेस नेताओं से संपर्क साधा जाने लगा है और हर कोई अपने स्तर पर जतन कर रहा है।

कुर्सी एक थी, डीईओ दो

डीईओ की कुर्सी का एक चर्चित किस्सा यह भी है कि जब केवट डीईओ बने थे उस समय सूर्यवंशी भी डीईओ थे। असल में खत्री के बाद कलेक्टर ने सूर्यवंशी को डीईओ का चार्ज दिया था। कुछ ही दिन में केवट भोपाल से आदेश लेकर आ गए। डीईओ ऑफिस में दो कुॢसयां लग गई। दो दो डीईओ काम करने लगे। बाद में सूर्यवंशी को वहां से हटना पड़ा और डीईओ की कुर्सी केवट को मिली। केवट कुर्सी पर बैठे जरूर लेकिन विवादों से घिरे रहे। नियमों की अवहेलना के आरोप लगे। आॢथक अनियमितता के आरोप लगे। जांच भी चल रही है।

उपसंचालक वर्ग का होता है डीईओ

शिक्षा विभाग से मिली जानकारी के अनुसार डीईओ का पद उपसंचालक स्तर का होता है। उप संचालक स्तर वर्ग का अधिकारी ही डीईओ बन सकता है। पूर्व डीईओ रामेश्वर खेड़े इसी वर्ग के थे, लेकिन फरवरी २०१७ में उनके जाने के बाद जो तीन डीईओ बने वे सभी हासे स्कूल के प्राचार्य थे। नियम यह भी है कि उपसंचालक वर्ग का अधिकारी न मिलने पर सहायक संचालक स्तर के अधिकारी को डीईओ बनाया जाता है। देवास में सुरेश द्विवेदी सहायक संचालक शिक्षा है लेकिन पिछली बार भी स्वास्थ्यगत कारणों के चलते उन्होंने यह पद नहीं लिया। कहा जा रहा है कि लंबे समय से पदोन्नति न होने के चलते उपसंचालक वर्ग के अधिकारी कम हैं, जिस कारण हासे स्कूल के प्राचार्य को ही डीईओ का प्रभार दिया जाता है।

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