डॉक्टर ने बच्चे को बताया मृत, दफनाने से पहले शरीर में हुई हलचल, जिंदा होने का लगा पता

डॉक्टर ने बच्चे को बताया मृत, दफनाने से पहले शरीर में हुई हलचल, जिंदा होने का लगा पता

By: Chandraprakash Sharma

Published: 16 May 2020, 05:25 PM IST

देवास/सतवास। एक नवजात बच्चे को डॉक्टर ने मृत बता दिया। परिजन इसके बाद गमगीन होकर बच्चे को लेकर घर आ गए उसे दफनाने की तैयारी चल रही थी, उसके पहले ही बच्चे के शरीर में हरकत आते ही परिजन में जान आ गई। बच्चे को जब दूसरी बार अस्पताल लेकर गए तो वो जिंदा था, बच्चा अब हरदा के अस्पताल में स्वस्थ हैं।
शासकीय प्राथमिक स्वास्थ केंद्र में पदस्थ डॉ. मेघा पटेल पर सतवास के वार्ड 11 निवासी शब्बीर पिता मुंसी खान ने लापरवाही का आरोप लगाया हैं। शब्बीर की बेटी रिहाना पति आरिफ निवासी कांटाफोड़ को डिलेवरी के लिए परिजन डॉ. मेघा पटेल के निवास पर स्थिति निजी क्लिनिक पर लेकर गए थे। वहां पर गुरुवार सुबह 5 बजे रिहाना को बेटा हुआ। परिजन का आरोप है कि मैडम ने बच्चे को देखे बगैर ही उसे मृत बता दिया। परिजन के अनुसार डॉक्टर बच्चे को देखने के लिए ही तैयार नहीं थी। बच्चे को देखने के लिए पहले 10 हजार रुपए मांगे, लेकिन जब परिजन ने अपनी गरीबी का हवाला देकर इतने पैसे देने से हाथ खड़े किए तो फिर मामला 6 हजार रुपए पर तय हो गया। 6 हजार रुपए लेने के बाद डॉक्टर ने बच्चे की जांच करी व उसे मृत बता दिया और एक पन्नी में बच्चे को लपेटकर परिजन को सुपुर्द कर दिया।
रिहाना के पिता शब्बीर ने बताया कि हम दुखी व गममीन होकर फिर बच्चे को घर लाए ओर उसे दफनाने की तैयारी शुरू कर दी, जल्द ही गड्डा भी खोद लिया था, तभी पन्नी में कुछ हलचल होने लगी, पहले लगा की हवा के कारण ऐसा हो रहा होगा, लेकिन थोड़ी देर बाद फिर से पन्नी हिली लगने लगी और उसमें कंपन भी होने लगा। इस पर पन्नी को खोलकर देखा तो बच्चे की धड़कन चल रही थी। तब उसे तुरंत ही पन्नी से बाहर निकाला व फिर से डॉ. मेघा पटेल के पास ले गए। डॉक्टर ने तुरंत स्टाफ नर्स नेहा चतुर्वेदी को फोन लगाया और इंट्री करवा कर हरदा के लिए रेफर कर दिया।
डॉ. मेघा पटेल ने सभी तरह के आरोपों को नकारते हुए कहा कि ऐसा कुछ भी नहीं हुआ है। मेरे द्रारा रुपए की भी कोई मांग नहीं की गई। बच्चे के मृत होने की जबरन ही कहानी बना रहे है। मैने अपने क्लिनिक पर ही देखो और गंभीर स्थिति होने पर तुरंत ही हरदा के लिए रैफर कर दिया था।
अन्य मरीजों ने भी बताई लापरवाही
जिंदा बच्चे को मृत बताने के मामले में अन्य भर्ती मरीजोंं ने भी कहा कि इसमें डॉक्टर की लापरवाही थी। जिस समय रिहाना भर्ती थी उसी समय ग्राम भंडरिया की फरजाना भी भर्ती थी। वो चार दिन से भर्ती थी। जब पत्रिका ने फरजाना से बात करी तो उसने भी यही बताया कि हम दोनों एक ही रूम में थे, जब रिहाना को डिलेवरी हो गयी तब तक मैडम ने देखा ही नहीं। 10 हजार रुपए मांगे व फिर 6 हजार रुपए में मानी तथा इसके बाद भी बच्चे को देखे बिना ही कह दिया कि इसे घर ले जाओ बच्चा मर गया है। फिर उसके बाद क्या हुआ, मुझे पता नहीं, मुझे दूसरे कमरे में शिफ्ट कर दिया था। इसी तरह गड़ागांव निवासी कनिशा भी वही थी उसने भी यही घटना बताई।

Chandraprakash Sharma Desk
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