यहां भी हैं मौत के कुएं....कोई सड़क से बिल्कुल सटा, कोई कुछ मीटर की दूरी पर, सुरक्षा के नहीं कोई इंतजाम

-अधिकांश जगह कुएं-बावड़ी पहले से थे, बाद में बनी सड़कें, सिर्फ बारिश में ही रहता है कुओं में पानी फिर भी अस्तित्व में

By: Amit S mandloi

Published: 10 Apr 2019, 11:12 AM IST

सत्येंद्रसिंह राठौर. देवास
जिले के पोलायजागीर क्षेत्र में सोमवार को बिना मुंडेर के कुएं में कार गिरने से हुए हादसे में तीन लोगों की मौत हो गई। इस तरह का यह पहला हादसा नहीं है, कई बार ऐसा अलग-अलग स्थानों पर हो चुका है। अभी भी कई मुख्य मार्गों सहित अंचल के अनेक मार्गों पर जानलेवा कुएं हैं जो बिल्कुल सड़क से सटे हुए हैं या फिर कुछ चंद मीटर की दूरी पर हैं। सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं होने से कभी भी हादसा हो सकता है।
खतरनाक कुओं व बावडिय़ों का अस्तित्व कॉलोनियों से लेकर बायपास तक है। कॉलोनियों में कई कुओं के सूखने या सिर्फ कचराघर के रूप में इस्तेमाल होने के कारण उनको बंद किया जा चुका है। इसके अलावा दर्जनों ऐसे कुओं का अस्तित्व समाप्त हो गया है जो कॉलोनी में मकानों के बीच थे अब वहां पर या तो भवन खड़ा है या फिर उसे भरकर समतल कर दिया गया है। समय के साथ कई कुओं को मुंडेर बनाकर, जाली लगाकर सुरक्षित भी कर दिया गया लेकिन अभी भी कई सूखे कुएं कुछ कॉलोनियों में हैं जो खतरनाक बने हुए हैं। चूंकि इनके आसपास यातायात का अधिक दबाव नहीं रहता ऐसे में वाहन के गिरने की घटनाएं सामान्यत: नहीं होती हैं, मवेशी आदि कई बार जरूर गिरते रहते हैं जिनको मशक्कत के बाद निकाल लिया जाता है। इसके उलट बायपास पर कई जगह खतरनाक स्थिति वाले कुएं अस्तित्व में हैं। इनमें से कुछ तो कुछ मीटर की दूरी पर हैं लेकिन कुछ बिल्कुल सड़क से लगे हैं और सुरक्षा के नाम न तो मुंडेर है न ही कोई अन्य इंतजाम हैं।

लोकेशन: इंदौर-भोपाल बायपास पर रसूलपुर चौराहे से एक किमी आगे....

15-20 फीट गहरा कच्चा कुआं, बायपास चौड़ीकरण के बाद सड़क और नजदीक हुई
इंदौर-भोपाल बायपास पर रसूलपुर चौराहे से आगे पालनगर फाटे की ओर बढऩे पर करीब एक किमी दूर बांयी हाथ पर एक कच्चा कुआं स्थित है। इसकी गहराई १५-२० फीट होगी लेकिन यह अधिक खतरनाक इसलिए है क्योंकि बायपास के चौड़ीकरण के बाद सड़क इसके बिल्कुल नजदीक हो गई है, दो-चार फीट भी किसी वाहन का पहिया सड़क की ओर बाहर हुआ तो सीधे कुएं में जा सकता है। इसमें बारिश के दौरान ही पानी रहता है।

लोकेशन इंदौर-भोपाल बायपास: पालनगर फाटा व शंकरगढ़ के बीच
इतना चौड़ा कुंआ कि एक-दो नहीं चार वाहन एक साथ समा जाएं
इंदौर बायपास पर ही पालनगर व शंकरगढ़ के बीच बांयी ओर एक बहुत ही चौड़ा कुआं स्थित है जो बायपास से कुछ मीटर की दूरी पर है। यह कुआं इतना अधिक चौड़ा है कि एक में एक-दो नहीं बल्कि चार वाहन एक साथ समा सकते हैं। वर्तमान में यह कुआं भी सूखा हुआ है, मुंडेर या किसी अन्य सुरक्षा वाले साधन का कोई नामो निशान तक नहीं है।

पालनगर बायपास क्षेत्र में कार डूबने से हो चुकी है यूनिसेफ के डॉक्टर की मौत, बाल-बाल बची थी पत्नी व बेटा
बायपास पर मौत के कुओं का होना न तो कोई डराने वाली बात है न ही हवा-हवाई खबर। प्रयास बस यह है कि इनकी भयावहता को जिम्मेदार समझें और किसी प्रकार का हादसा न हो इसके लिए कुछ कदम उठाए जाएं। पालनगर बायपास क्षेत्र में खतरनाक कुएं में २०१६ में एक हादसा हुआ था जहां कार डूबने से एक डॉक्टर की मौत हो गई थी जबकि पत्नी व बच्चे तुरंत लोगों की मदद से बच गए थे। हादसा १२ अक्टूबर २०१६ को दोपहर २.१० बजे हुआ था। यूनिसेफ भोपाल में पदस्थ डॉ. पुष्पेंद्र दीक्षित कार (एमपी०९एसजी२२००) से अपनी पत्नी मयूरा दीक्षित व दो साल के बेटे अयान के साथ भोपाल जा रहे थे। पालनगर फाटा-शंकरगढ़ के बीच उनकी कार को एक ट्रॉले के चालक ने टक्कर मारी जिससे कार पलटी खाते हुए सड़क के पास स्थित बिना मुंडेर के कुएं में जा गिरी थी। जिसमें करीब ३० फीट तक पानी था। आसपास मौजूद लोगों ने रस्से की मदद से मयूरा व अयान को बचा लिया था लेकिन डॉ. दीक्षित की मौत हो गई थी। कुछ माह पहले बायपास चौड़ीकरण के दौरान इस कुएं को भर दिया गया है।

अवलोकन करके सुरक्षित करवाएंगे
बायपास वाले संबंधित क्षेत्र का अवलोकन किया जाएगा। यदि कहीं पर खतरनाक स्थिति वाले कुएं सड़क के नजदीक हैं तो उनको सुरक्षित करवाने के इंतजाम किए जाएंगे भले ही वो कुएं सरकारी हों या फिर निजी। लोगों की सुरक्षा हमारे लिए महत्वपूर्ण है।
-जीवनसिंह रजक, एसडीएम देवास।

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