सुषमा स्वराज के निधन पर विशेष-मंत्री नहीं बनने के सवाल पर सुषमाजी ने कहा था-श्रीकृष्ण ने जीवन दिया है...वे ही निर्धारण करेंगे

सुषमा स्वराज के निधन पर विशेष-मंत्री नहीं बनने के सवाल पर सुषमाजी ने कहा था-श्रीकृष्ण ने जीवन दिया है...वे ही निर्धारण करेंगे
patrika

mayur vyas | Updated: 08 Aug 2019, 11:14:34 AM (IST) Dewas, Dewas, Madhya Pradesh, India

कांग्रेस मुक्त भारत के भाषण के दौरान सभा में कहा था-विपक्ष कभी समाप्त नहीं होना चाहिए
सुषमा स्वराज से जुड़े वे किस्से जो बयां करते हैं उनके व्यक्तित्व को, उनकी सहजता-सरलता को
दतूनी बांध, बागदी नदी पुल, नर्मदा नदी के घाट सहित कई सौगातें दी जिले को

(चंद्रप्रकाश शर्मा)
देवास. अनेक उपलब्धियों से राजनीति की मिसाल बनकर रही भाजपा की कद्दावर नेता सुषमा स्वराज नहीं रही। हर आंख रोई, हर दिल पसीजा। चाहे भाजपा हो या कांग्रेस सभी की आंख इस शिसयत के अवसान पर नम हुई। ऐसी कई उपलब्धियां और सौगातें हैं जिनसे उनका विशाल और सहृदय व्यक्तित्व झलकता है लेकिन देवास जिले में उनके योगदान, उनके कामों को भुलाया नहीं जा सकता। सौगातों की फेहरिस्त बहुत लंबी है। इसलिए बात सुषमा स्वराज से जुड़े उन किस्सों की करेंगे जिन्हें कम लोग ही जानते हैं।
दरअसल सत्ता के शीर्ष पर रही सुषमा स्वराज के पैर सदैव जमीन पर रहे। जितनी आत्मीयता से वे बड़े नेताओं से मिलती थी, उतना ही लगाव कार्यकर्ताओं से था। सुषमा स्वराज २००९ में विदिशा संसदीय क्षेत्र से सांसद चुनी गई थी। इस संसदीय क्षेत्र में देवास जिले की खातेगांव विधानसभा आती है। लिहाजा उनका जिले में आगमन लगा रहता था। जिला सतर्कता और मूल्यांकन समिति की वे अध्यक्ष भी रही और बैठकों के सिलसिले में तीन से चार बार देवास आईं। इस दौरान उन्होंने जिले के विकास के लिए भी प्रयास किए और कई कामों को आगे बढ़ाया। २०१४ में जब दूसरी बार वे विदिशा संसदीय सीट से सांसद बनी तो खातेगांव विधानसभा के अजनास गांव को गोद लिया। विदेश मंत्री रहते हुए भी वे हर साल रक्षाबंधन पर भोपाल आती थी। बंगले पर कार्यकर्ताओं को राखी बांधती थी।
मैंने मां और बड़ी बहन को खो दिया
खातेगांव विधायक आशीष शर्मा ने कहा कि मैंने राजनीतिक रूप से एक मां और एक बड़ी बहन को खो दिया। मेरे लिए तो वे परिवार का हिस्सा थी और मेरा बेटा उन्हें दादी ही कहता था। वे क्षेत्र के हजारों कार्यकर्ताओं को नाम से पहचानती थी। जब भी क्षेत्र में आती तो कार्यकर्ताओं के घर भोजन करती थी। भोपाल आती तो बंगले पर मिठाई जरुर लाती और संसदीय क्षेत्र की हमारी कोर टीम को तरह तरह के नाश्ता करवाती। दीपावली पर गिट देती थी। शुभकामना संदेश भिजवाती थीं। उन्होंने विधानसभा क्षेत्र में कार्यकर्ताओं के परिचय पत्र बनवाए थे जो अब भी सबके पास हैं। उनका बूथ प्रबंधन इतना बेहतर था कि कोई कमी ही नहीं रहती।
बेटे से पूछा मैं कौन हूं तो बेटा बोला-आप मेरी दादी हो
पुराने किस्से बताते हुए विधायक शर्मा ने कहा कि वे भगवान श्रीकृष्ण की उपासक थी। उनको बहुत मानती थीं। करीब डेढ़-दो माह पहले मेरी उनसे बात हुई थी। मैंने कहा था कि दीदी आप मंत्री भी नहीं बनी। बंगला भी खाली कर रहे हो। उन्होंने बड़ी सहजता से मुस्कुराकर कहा कि मेरे कन्हैया ने ये जीवन दिया है। कृष्ण ही मेरे जीवन का निर्धारण करेंगे। एस पर उन्हें बहुत भरोसा था। उनसे जब भी कहा जाता कि विदेश में इलाज क्यों नहीं करवाते तो वे कहती थीं कि हमारे देश के डॉक्टर बहुत काबिल है। एस के डॉक्टर पूरी दुनिया में सबसे अच्छे हैं। एक ऐसा किस्सा है जिसे में कभी नहीं भूल सकता। मैं जब भी उनसे मिलता तो मेरी पत्नी और बेटे का जरुर पूछती। वे कहती कि बेटा कैसा है। पत्नी कैसी है। अप्रैल २०१९ में बेटे को जब उनसे मिलवाने के लिए दिल्ली गया तो उसे गोद में बैठाकर पूछा कि मैं कौन हूं..जानते हो। बेटे ने कहा कि आप मेरी दादी हो। वे कहने लगी कि मैं क्या करती हूं, जानते हो तो बेटे ने कहा कि आप पाकिस्तानियों को भारत में नहीं घुसने देते। इस पर वे हंसने लगी और बेटे को दुलारकर आशीर्वाद दिया।
विपक्ष कभी समाप्त नहीं होना चाहिए
एक किस्सा अजनास का है जब चुनावी सभा थी। मंच से विधायक आशीष शर्मा कह रहे थे कि हमें कांग्रेस मुक्त भारत करना है। कांग्रेस मुक्त अजनास बनाना है। सभा खत्म होने के बाद सुषमा जी ने शर्मा से कहा कि लोकतंत्र में विपक्ष की बड़ी भूमिका रहती है। विपक्ष कभी समाप्त नहीं होना चाहिए।
मैं चुनावी सभा में थी और सुषमाजी ने फोन करके पूछा-गायत्री कैसी हो
देवास विधायक गायत्रीराजे पवार ने कहा कि सुषमाजी का निधन भाजपा के लिए तो बड़ी क्षति है ही लेकिन देश की राजनीति के लिए भी अपूरणीय क्षति है। महाराज (तुकोजीराव पवार) से उनके बहुत अच्छे संबंध थे। वे मुझे गायत्री कहकर पुकारती थी। उनकी बातों में अपार स्नेह झलकता था। कुछ समय पहले की ही बात है। चुनाव के समय मैंने उन्हें मैसेज किया। मेरे एक परिचित को विदेश में कुछ परेशानी आ गई थी। मैंने उन्हें विस्तार से मैसेज किया। २४ घंटे के अंदर उन्होंने मदद पहुंचाई। एंबेसी के लोग वहां पहुंचे। मैं एक चुनावी सभा में थी। इसी बीच सुषमाजी का कॉल आया और कहा कि गायत्री कैसी हो। तुमने जो कहा था वो हो गया है। दस मिनट बात की और घर-परिवार से लेकर पार्टी को लेकर पूछा। इतना विशाल व्यक्तित्व था उनका कि शब्द भी कम पड़ जाएं। उनकी कमी हमेशा खलेगी।
आप पांच काम बताओ, बदले में छह काम जरूर करना
भाजपा जिलाध्यक्ष नंदकिशोर पाटीदार ने कहा कि उनकी संगठन पर बेजोड़ पकड़ थी। वे प्रत्येक मतदान केंद्र पर कार्यकर्ताओं की समिति बनाती थी। वे कहती थीं कि पांच साल के लिए आपके गांव के पांच प्रमुख काम बता दो। मैं सांसद निधि, राज्य और केंद्र के माध्यम से ये करवाउंगी। बदले में आपको ६ काम करने होंगे। पार्टी का स्थापना दिवस, पं. दीनदयाल उपाध्याय जयंती, डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी का बलिदान दिवस, स्वतंत्रता दिवस, गणतंत्र दिवस, दीपावली मिलन। सभी कार्यकर्ता ये छह काम करते भी थे। मैं जब पहली बार जिलाध्यक्ष बना और उनसे भोपाल में मिला तो उन्होंने बताया कि किस तरह चुनाव में संगठनात्मक रचना करनी है। मैंने उसी रचना पर काम किया। कुछ माह बाद जब दोबारा मिला तो वे कहने लगी कि जिलाध्यक्षजी का दिमाग तो कंप्यूटर है। अनौपचारिक रूप से जो कहा उसे अमल में लाए। किडनी ट्रांसप्लांट के बाद वे दिल्ली में थीं। किसी से नहीं मिल रहे थीं। खातेगांव विधायक आशीष शर्मा के साथ मैं दिल्ली गया। उनको संदेश भिजवाया तो उन्होंने हमें बुलाया और बातें की। नाश्ता भी करवाया। सहजता ऐसी थी कि जिससे एक बार मिलती वो उनका मुरीद हो जाता। देवास के दिवंगत विधायक तुकोजीराव पवार से बहुत स्नेह था। महाराज भी उनका बहुत समान करते थे। सोनकच्छ विधासभा के उपचुनाव में ये दौलतपुर आई थीं। मुझे गाड़ी में बैठाया और पूछा कि महाराज कहां है। बुलाइये उन्हें। वे मेरे साथ बैठकर चलेंगे। महाराज आए और उनसे कहा कि दीदी आप चलिए, मैं पीछे वाली गाड़ी में आता हूं।
बाबूजी को टिकट मिला तो मुझे कहा था कि सुषमाजी नाराज हैं..
पूर्व सीएम कैलाश जोशी के पुत्र व मप्र भाजपा सरकार में मंत्री रहे दीपक जोशी ने कहा कि मैंने पहली बार १९८४-८५ में सुषमाजी को देखा था। उस समय मैं छात्र राजनीति में था। भोपाल रहता था। सुषमाजी के पति ने भोपाल के संजय कॉप्लेक्स में लैट लिया था। वहीं उनसे मुलाकात हुई थी। एक बार मैं उन्हें स्कूटर से छोडऩे गया था। एक बार ये हुआ कि भोपाल से बाबूजी को टिकट मिला। उस समय सुषमाजी का नाम भी खूब चला था। जब बाबूजी को टिकट मिला तो लोगों ने मुझसे कहा कि सुषमाजी बहुत नाराज हैं। मुझे भी लगा कि हो सकता है, लेकिन जब उनसे मिला तो वे इतनी आत्मीयता से मिली कि दिल गदगद हो गया। उनका बहुत स्नेह मिला। इसके बाद भोपाल, दिल्ली व देवास जिले में उनसे कई बार मुलाकातें हुई। उनका अवसान राजनीति की श्रेष्ठता का अवसान है।
एक की नहीं, सबकी होकर रही
सुषमा स्वराज गुटबाजी से दूर रही। देवास जिले में हर गुट के नेता से मधुर संबंध रहे। एक की नहीं सबकी होकर रही। विकास के लिए भी सबको साथ लेकर काम किया। जिले का दतूनी नदी डेम उन्हीं की देन है। पूर्व मंत्री दीपक जोशी ने कहा कि इस डेम का नाम सुषमा जलाशय रखा जाना चाहिए। हम इसके लिए प्रयास कर रहे हैं। विधायक आशीष शर्मा के अनुसार खातेगांव क्षेत्र में नेशनल हाईवे फोरलेन, इंदौर-जबलपुर रेलवे लाइन, कलवार-कन्नौद सीसी रोड स्व. स्वराज की देन है। बागदी नदी पर पुल उन्होंने बनवाया। नर्मदा नदी का एक घाट नहीं छोड़ा और १५-१५ लाख देकर घाट बनवाए।

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