ठेकेदार के फेर में उलझ के रह गई सड़क, अब लोगों का रास्ता हुआ बंद

वार्ड 20 विकास नगर की मुख्य सड़क की हालत खराब, निगम ने मुरम डाली लेकिन उसका ढेर लगाकर भूल गए

सवालों के घेरे में निगम इंजीनियरों की कार्यप्रणाली, अफसर भी नहीं दे रहे ध्यान

By: mayur vyas

Published: 01 Jul 2019, 11:49 AM IST

देवास. नगर निगम इंजीनियरों की मॉनिटरिंग पर कई बार सवाल उठे हैं। इनकी लापरवाही का खामियाजा शहर ंमें कई जगह लोग अब भी उठा रहे हैं। निगम के इंजीनियर टेंडर होने के बाद अपने क्षेत्र में झांकते भी नहीं कि ठेकेदार काम शुरू कर भी रहा है या नहीं। वार्ड 20 के अंतर्गत आने वाले विकास नगर के हजारों रहवासियों का रास्ता इसी लापरवाही के कारण आज तीन माह बाद भी नहीं खुल सका है।
तीन माह पूर्व यहां की मुख्य सड़क का काम नगर निगम के ठेकेदार ने शुरू करते हुए 10 मार्च को सड़क को एक तरफ से पूरी तरह से खोद दिया था। अचानक सड़क निर्माण का काम शुरू होने से क्षेत्र के लोग भी खुश थे, लेकिन उनकी ये खुशी ज्यादा समय तक नहीं चली। ठेकेदार सड़क को एक तरफ से खोदकर गया तो फिर नहीं आया। निगम अफसरों व इंजीनियरों को ये पता ही नहीं था कि सड़क का काम खुदाई के बाद शुरू ही नहीं हुआ। नतीजा ये निकला कि एक माह इंतजार करने के बाद लोगों को बारिश की चिंता सताने लगी व चिंतित लोगों ने आचार संहिता के बीच में ही सड़क निर्माण के लिए बड़ा प्रदर्शन कर दिया। आचार संहिता में लोगों के टैंट लगाकर खुदी सड़क पर बैठने के बाद जिला प्रशासन के अफसर व निगम के अधिकारी लोगों के बीच पहुंचे व आश्वासन दिया था कि काम जल्द शुरू होगा। एसडीएम जीवनसिंह रजक ने भी उस समय निगम की मॉनिटरिंग पर सवाल खड़े करते हुए निगम इंजीनियर जितेंद्रसिंह सिसौदिया की भूमिका पर नाराजगी जताई थी। साथ ही ठेकेदार के खिलाफ प्रकरण दर्ज करने का आदेश दिया था। निगम अफसरों की लापरवाही ठेकेदार पर प्रकरण दर्ज होने व उसका ठेका खत्म करने से छिप तो गई लेकिन इसके बाद भी निगम के जिम्मेदारों ने कोई सीख नहीं ली। जिस सड़क के लिए लोग धरने प्रदर्शन पर उतार आए थे उस सड़क की हालत अब भी वैसी ही है। रविवार को बारिश का दौर शुरू होते ही रास्ता बंद हो गया। इस मार्ग के दोनों किनारों पर रहने वाले लोग परेशान है, उन्हें समझ नहीं आ रहा कि बारिश के समय घर के बाहर कैसे निकलेंगे। अगर खराब सड़क से निकलते है तो हादसे का डर हमेशा बना रहेगा। हालाकि इस सड़क को कुछ हद तक चलने लायक बनाने के लिए मुरम डालने की योजना नगर निगम की है, लेकिन मुरम का ढेर पिछले पांच दिनों से सड़क किनारे रखकर निगम के अफसर एक बार फिर भूल गए है, क्योंकि किसी काम की मॉनिटरिंग तो होती नहीं। परेशान लोग नाराज भी है व निराश भी। लोगों का कहना है कि हमने तो कभी सड़क मांगी ही नहीं थी, पता नहीं था कि सड़क के नाम पर हमारे लिए चलने का रास्ता भी बंद हो जाएगा।
राजनीति भी खूब हुई लेकिन निगम का ढर्रा नहीं सुधरा
लोकसभा चुनाव की आचार संहिता में इस सड़क का मुद्दा जमकर उछला। कांग्रेस व भाजपा ने इसे लेकर एक दूसरे पर खूब आरोप-प्रत्यारोप लगाए। विरोध प्रदर्शन कर रहे लोगों के बीच विधायक गायत्री राजे पवार भी पहुंची थी व उन्होंने सड़क नहीं बनने के लिए प्रदेश की कांग्रेस सरकार को दोषी ठहराया था, कहा था कि निगम के अफसर जानबूझकर काम नहीं होने दे रहे। कांग्रेस ने इस मुद्दे पर भाजपा की बहुमत वाली परिषद व महापौर को दोषी ठहराया था। विवादों में आने के बाद इस सड़क का मामला जिला प्रशासन के संज्ञान में भी आया था। इतना सबकुछ होने के बाद भी निगम अफसरों के काम करने का ढर्रा नहीं सुधरा, उनके अंदर जिम्मेदारी आई हो ये नहीं दिखता। अगर अफसर जिम्मेदार होते तो जिस मुरम के ढेर को पांच दिन पहले सड़क किनारे रखा, वो आज खराब सड़क के ऊपर होती।
वर्जन- वार्ड 20 के अंतर्गत आने वाले विकास नगर की मुख्य सड़क को अभी चलने लायक बनाया जाएगा। इसके लिए मुरम डलवाई गई है। जल्द ही इसे चलने लायक बना देंगे। पूर्व ठेकेदार की लापरवाही मानते हुए उसका ठेका निरस्त कर दिया गया था। फिर से सड़क निर्माण के टेंडर निकाले जा चुके है। जल्द ही सड़क का निर्माण भी शुरू होगा।
पीयूष भार्गव कार्यपालन यंत्री
नगर निगम देवास।

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