मान्यता प्रकरणों में उलझे आरटीई के एडमिशन

मान्यता प्रकरणों में उलझे आरटीई के एडमिशन

Amit S mandloi | Publish: Apr, 22 2019 12:29:57 PM (IST) | Updated: Apr, 22 2019 12:29:58 PM (IST) Dewas, Dewas, Madhya Pradesh, India

- अल्पसंख्यक संस्थाओं को भी देना होगा प्रमाणीकरण

देवास. आरटीई के तहत इस बार एडमिशन प्रक्रिया अप्रैल के तीसरे सप्ताह में भी शुरू नहीं हो सकी है। निजी स्कूलों की मान्यता प्रक्रिया में देरी के कारण ये स्थिति बनी है। जिले में 33 निजी स्कूलों के प्रकरण मान्यता की प्रक्रिया में अटके हुए है। प्रदेश में ऐसे स्कूलों की संख्या 2045 है। ऐसे स्कूलों को अब मान्यता के जरूरी मापदंड पूरे करने का अंतिम समय 26 अप्रैल का दिया गया है। इसके बाद निजी स्कूलों में आरटीई के तहत एडमिशन प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। वहीं इस बार अल्पसंख्यक संस्थाओं पर भी शिकंजा कसा गया है। ऐसी संस्थाओं को अपने अल्पसंख्यक होने का प्रमाण 24 अप्रैल तक शिक्षा विभाग में जमा कराना है, ऐसा नहीं कराने पर इन संस्थाओं को भी आरटीई के तहत बच्चों को अपने यहां एडमिशन देने होंगे। कुछ निजी स्कूल अल्पसंख्यक संस्थान होने का दर्जा प्राप्त है, यह कहकर आरटीई के तहत एडमिशन देने से बचते है, जबकि उनके पास प्रमाण-पत्र भी नहीं होता।

जिले के 33 स्कूलों की मान्यता अलग-अलग स्तर पर अटकी हुई है। इसमें से बीआरसी के पास लंबित मान्यता के 14 प्रकरण, जिला शिक्षा अधिकारी के पास 19 मान्यता के प्रकरण अटके हुए है। ऐसे स्कूलों के लिए अब मान्यता प्राप्त करने का 26 अप्रैल को अंतिम मौका है। इसके बाद आरटीई के तहत एडमिशन की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी और जुलाई से शुरू हो रहे नए शिक्षण-सत्र के लिए मान्यता नहीं मिल पाएगी। आयुक्त जयश्री कियावत ने आदेश में कहा है कि जिन आपत्तियों का निराकरण किया जाना है, संस्था प्रमुख उनसे संबंधित दस्तावेज विशेषकर भूमि व भवन के पंजीयन और शिक्षकों की शैक्षणिक योग्यता की मूल प्रतियां साथ में अवश्य लेकर आए, तभी उन्हें सुनवाई में शामिल किया जाएगा। संचालनालय लोक शिक्षण ने आदेश जारी कर निजी स्कूल संचालकों को प्रकरणों के निराकरण से जुड़ी सुनवाई में उपस्थित होने के निर्देश दिए है।

जिले के 915 से अधिक स्कूलों में होना एडमिशन

मान्यता प्रकरणों के निपटारे में हो रही देरी की वजह से इस बार अभी तक आरटीई के तहत प्रवेश प्रक्रिया शुरू नहीं हो पाई है। एपीसी रेणु गुप्ता के अनुसार स्कूलों की मान्यता के प्रकरणों का निराकरण होने के बाद ही स्कूलों में आरटीई के तहत प्रवेश प्रक्रिया शुरू हो पाएगी। जिला शिक्षा केंद्र का लक्ष्य है कि कोई भी स्कूल आरटीई की प्रवेश प्रक्रिया से छूटे नहीं। जिले में आरटीई के तहत 915 से अधिक स्कूलों में एडमिशन होना है। एडमिशन की प्रक्रिया को लेकर स्कूल शिक्षा विभाग अलग से गाइडलाइन निकाल चुका है। जिले में इस बार आठ हजार से अधिक सीटों पर शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत प्रथम प्रवेशित कक्षाओं में कमजोर व वंचित वर्ग के बच्चों को एडमिशन दिए जाने है।

नहीं तो आरटीई के तहत देने होंगे एडमिशन

भाषाई व धार्मिक अल्पसंख्यक संस्थानों को आरटीई के प्रावधानों से मुक्त रखा गया है। अल्पसंख्यक संस्थाओं को स्वायत्त मानते हुए इन्हें आरटीई की प्रवेश प्रक्रिया से छूट दी गई है, लेकिन इस बार अल्पसंख्यक संस्थाओं को प्रमाण पत्र देकर इसे साबित करना होगा। शिक्षा का अधिकार अधिनियम आरटीई के तहत जिले की अल्पसंख्यक संस्थानों को अल्पसंख्यक का दर्जा होने का प्रमाण-पत्र 24 अप्रैल तक शिक्षा विभाग के सामने प्रस्तुत करना होगा। प्रमाण-पत्र प्रस्तुत न करने की स्थिति में उन्हें भी आरटीई के तहत अपने निजी स्कूलों में कमजोर व वंचित वर्ग के विद्यार्थियों को एडमिशन देने होंगे। राज्य शिक्षा केन्द्र के संचालक आईरीन सिंथिया ने इसके लिए अलग से आदेश भी जारी कर दिए है। आदेश में कहा है कि जिन संस्थान के द्वारा अल्पसंख्यक संस्था का दर्जा वाला प्रमाण-पत्र प्रस्तुत किया जाएगा, उनमें आरटीई के तहत एडमिशन नहीं होंगे।

आरटीई की प्रवेश प्रक्रिया में कोई स्कूल नहीं छूटे इसलिए इंतजार किया जा रहा है। जिले में भी कई स्कूलों की मान्यता अटकी हुई है। स्कूलों की मान्यता के प्रकरणों का निराकरण होने के बाद ही आरटीई की प्रवेश प्रक्रिया शुरू हो पाएगी। 26 अप्रैल के बाद ये प्रक्रिया शुरू हो सकती है।
रेणु गुप्ता, एपीसी
जिला शिक्षा केंद्र

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