दृष्टिहीनों को प्रकाश में ला रहा है ये संस्थान,समाज की मुख्य धारा से जोड़ने का अनूठा प्रकल्प

नगर के एक निजी प्रतिष्ठान पर छह दृष्टि और एक अस्थिबाधित पा रहे रोजगार

देवास. टॉकिंग सॉफ्टवेयर से जब दृष्टिबाधित काउंटर पर बिलिंग करता है, तो अच्छे-अच्छे लोग देखते रह जाते हैं। उसे सफलता पूर्वक बिलिंग करते हुए करीब एक साल हो गया। आज ये दृष्टिबाधित बेहतर तरीके से रोजगार पाकर जीवन की मुख्य धारा से जुड़ गया है।
शहर में एबी रोड स्थित अपना स्वीट है। यहां पर संचालक ने दृष्टिबाधित और अस्थिबाधितों को रोजगार दे रखा है। यहां पर छह दृष्टि और एक अस्थि बाधित सेवाएं दे रहे हैं। इनका प्रबंधन द्वारा पूरा ध्यान रखा जाता है। इन्हें चाय, नाश्ता और खाना मुफ्त दिया जाता है। साथ ही बेहतर वेतन भी दिया जाता है। बिलिंग काउंटर पर दृष्टिबाधित दिलीप जायसवाल सेवाएं दे रहे हैं। दिलीप ग्रेजुएट हैं, जिसके चलते प्रबंधन ने उन्हें बिलिंग का काम सौंपा है।
काउंटर पर पैसा जमा कराने के बाद एक कार्ड दिया जाता है। कार्ड को लेकर ग्राहक बिलिंग काउंटर पर पहुंचता है, जहां पर ऑर्डर दिया जाता है। ऑर्डर की बिलिंग का काम दिलीप करता है। ग्राहक क्या आर्डर दे रहे हैं, साथ ही उनका कितना पैसा काटना है, ये भी दिलीप करता है।
दिलीप के अलावा अंदर छह लोग काम करते हैं। दृष्टिबाधित संजय सोलंकी कचौरी, समोसे में मसाला भरने का काम करते हैं। संजय दृष्टिबाधित होने के बाद भी कितना मसाला भरना है, ये बेहतर तरीके से करते हैं।
इसके अलावा मिथुन सिसौदिया, धर्मेंद्र सेंधव, सुरेश शर्मा, सीताराम प्रजापत को उनके हिसाब से काम सौंपा गया है।
कॅरियर के लिए घर छोड़ा
कॅरियर बनाने के लिए कई दृष्टिबाधितों ने घर छोड़ा था, जिन्हें अपना स्वीटस ने रोजगार के लिए प्लेटफार्म दिया। यहां काम करने से पूर्व दृष्टिबाधित सीताराम प्रजापत भोपाल से रोजगार की तलाश में इंदौर पहुंचे थे। उन्होंनेे इंदौर की शाखा में काम सौंपा गया था। इंदौर से परिवार के भोपाल चले जाने से उन्होंने संस्थान से देवास तबादला मांगा, संस्थान ने देवास भेज दिया। अब सीताराम सामान्य लोगों की तरह देवास में कमरा लेकर रहते हैं और काम कर रहे हैं। वहीं हाथी गुरुडया से धर्मेंद्र सेंधव भी देवास में कमरा लेकर रह रहे हैं।

"हम लोगों का दृष्टि और अस्थित बाधितों के लिए कर्तव्य बनता है। मैंने कई लोगों को देखा, फिर इन लोगों पर स्टडी की। बाद में अपने कई संस्थानों में इनके लिए रोजगार के द्वार खोले। आज लगभग 100 लोग हमारी अलग-अलग शाखाओं में बेहतर काम कर रहे है।"
प्रकाश राठौर, अपना स्वीटस संचालक

अर्जुन रिछारिया Incharge
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