शिक्षकों की इस स्थिति से शिक्षा जगत पर मंडरा रहा खतरा

जिले में एक हजार से अधिक शिक्षक घर-घर जाकर जोड़ रहे नए मतदाता

देवास. सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। जिले में प्राथमिक स्कूलों की संख्या 1794 हैं, वहीं माध्यमिक स्कूल 1596 है। इनमें से 64 शालाएं ऐसी हैं, जहां एक भी शिक्षक नहीं है। वहीं 153 शालओं का भार एक शिक्षक के कंधों पर है। शिक्षकों की भारी कमी के बावजूद विभिन्न विभागों में से 1427 चयनित बीएलओ में से 1141 का चयन शिक्षा विभाग से किया गया है।
ये शिक्षक बीएलओ के रूप में कार्य कर रहे हैं। ये बीएलओ घर-घर जाकर नए मतदाताओं को जोड़ रहे हैं। पिछले एक माह से वे पढ़ाना छोड़कर इसी काम में जुटे हुए हैं। जिले के कई स्कूल तो ऐसे हैं, जहां समय पर बच्चे तो पहुंच जाते हैं, लेकिन शिक्षक अन्य कार्य में व्यस्त होने के कारण स्कूल नहीं पहुंच पा रहे। पिछले एक माह से नए मतदाताओं को जोडऩे का कार्य जिलेभर में चल रहा है। इस काम में अन्य विभाग के कर्मियों के साथ ही शिक्षकों की ड्यूटी भी लगाई गई है। ये काम अभी 15 दिसंबर तक चलता रहेगा।
अगर नए आदेश आए तो फिर बीएलओ की ड्यूटी आगे भी बढ़ सकती है। जिले के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी के चलते पढ़ाई का ढर्रा पटरी से उतरा हुआ है। शिक्षकों के अलावा इस कार्य में आंगनवाड़ी, पंचायत सचिव व सहायक ग्रेड 3 स्तर के कर्मचारियों की डयूटी लगाई गई है।
युक्तियुक्तकरण भी गड़बड़ाया
सरकारी स्कूलों में शिक्षकों कमी को दूर करने के लिए युक्तियुक्तकरण की प्रक्रिया अपनाई गई थी, लेकिन ये भी अपने उद्देश्य को पूरा करते नजर नहीं आ रही है। जिन स्कूलों में शिक्षकों की कमी है, वहां तो शिक्षक भेजे नहीं गए, इसके विपरीत अधिक संख्या वाले स्कूलों में ही भेजकर युक्तियुक्तकरण कर दिया गया है। प्रक्रिया में च्वॉइस फिलिंग का भी विकल्प था, लेकिन इसे पूरी तरह दरकिनार कर दिया गया है।
इसके चलते शिक्षकों में नाराजगी है। तहसील देवास में निशा गुप्ता को मावि राजोदा से मावि कानकुंड भेजा गया, जबकि मानकुंड में पहले से ही हैडमास्टर पदस्थ थे, गलती सुधारने के लिए आनन-फानन में 8 दिन बाद मावि बराय डबलचौकी में पदस्थ किया गया। संगीता राठौड़ कन्या प्रावि जामगोद में सहायक अध्यापक हंै। इन्होंने च्वॉइस फिलिंग में आधा दर्जन से अधिक शालाओं का नाम दिया था, लेकिन जब सूची में नाम आया तो इनका पदाकंन विकासखंड कन्नौद के शा प्रावि में कर दिया गया। युक्तियुक्तकरण की सूची में अन्य शिक्षकों को भी च्वॉइस फिलिंग का लाभ नहीं मिला है।

"शिक्षकों की कमी तो बनी हुई है। लेकिन चुनावी कार्य से संबंधित प्रक्रिया पूरा करने के आदेश ऊपर से ही आते हैं, जिनका पालन शिक्षा विभाग को करना होता है। युक्तियुक्तरण की प्रक्रिया में गंभीर बीमार, दिव्यांग व महिला शिक्षकों को प्राथमिकता देने का नियम है। इसमें सारी प्रक्रिया कम्प्यूटराइज्ड है। च्वॉइस फिलिंग में 30 स्कूलों का चयन किया जाना था, लेकिन इसकी जगह शिक्षकों ने पूरे स्कूल नहीं भरते हुए अपनी मर्जी से कुछ ही स्कूलों के नाम भरे।"
-राजीव सूर्यवंश, प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी, देवास

अर्जुन रिछारिया Incharge
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