डॉक्टर कहते रहे इंतजार करो...बेहोशी का डॉक्टर नहीं है और फट गई थैली...खतरे में आईजान..!

डॉक्टर कहते रहे इंतजार करो...बेहोशी का डॉक्टर नहीं है और फट गई थैली...खतरे में आईजान..!
patrika

mayur vyas | Updated: 23 Sep 2019, 11:49:24 AM (IST) Dewas, Dewas, Madhya Pradesh, India

-बदहाल हुआ जिला अस्पताल, नहीं सुधर रही व्यवस्थाएं, मनमानी चरम पर, परेशान हो रहे मरीज
- आईसीयू की स्थिति खराब, शिकायतों के बाद भी नहीं लिया जा रहा संज्ञान
- मंत्री लगातार आते हैं देवास मगर नहीं देते ध्यान, आरोप-प्रत्यारोप में उलझे जनप्रतिनिधियों ने मोड़ा स्वास्थ्य सुविधाओं की दुर्दशा से मुंंह

देवास. जिले के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल (एमजी अस्पताल) के हालात बेहद खराब है। अस्पताल खुद बीमार है और यहां अव्यवस्थाएं चरम पर है। लगातार शिकायतें मिलने के बावजूद न तो अस्पताल प्रशासन कोई कार्रवाई कर पा रहा है न जिला प्रशासन का ध्यान है। प्रदेश सरकार के मंत्री अक्सर देवास आते हैं लेकिन जिला अस्पताल की बदहाली पर ध्यान नहीं देते। आरोप-प्रत्यारोप में उलझे रहने वाले भाजपा-कांग्रेस नेता स्वास्थ्य सेवाओं में हो रही लापरवाही से मुंह चुरा रहे हैं और लोग परेशान हो रहे हैं।
दरअसल जिला अस्पताल की अव्यवस्थाओं के मामले आए दिन सामने आते रहते हैं। शनिवार रात को भी ऐसा मामला सामने आया जिसमें डॉक्टरों की लापरवाही से एक प्रसूता की जान पर बन आई। परिजन समय रहते उसे निजी अस्पताल न ले जाते तो जच्चा-बच्चा दोनों की जान को खतरा था। मालीपुरा निवासी विश्वास पटेल (गब्बर) ने बताया कि उनकी बहन छाया को प्रसूति के लिए जिला अस्पताल ले गए। डॉक्टरों ने १७ तारीख दी थी। वहां गए तो महिला डॉक्टर ने कहा कि अभी इंतजार करो, समय है। हमने कहा कि जो तारीख दी थी उससे ऊपर दिन हो गए हैं। इंतजार नहीं कर सकते। ऑपरेशन कर दीजिए। दिनभर टालने के बाद रात तक रूकने का कहा। रात को रूक गए लेकिन कुछ नहीं हुआ। सुबह देखा तो थैली फट चुकी थी। हालत बिगड़ रही थी। डॉक्टर से बात की तो कहा कि एमवाय इंदौर ले जाओ। यहां बेहोशी के डॉक्टर नहीं है। हमने कहा कि लिखकर दे दो तो लिखकर दे दिया। चूंकि इंदौर जाने में अधिक समय लगता इस कारण निजी अस्पताल ले गए। यदि और देर हो जाती तो मां और शिशु दोनों की जान को खतरा था। यदि हालात नहीं संभल रहे थे और अस्पताल में कोई व्यवस्था नहीं थी तो पहले ही बता देना था। जितेंद्र पटेल नितिन ने बताया कि अक्सर ऐसा होता है। इसके पहले भी ऐसे कई केस हो चुके हैं। अस्पताल प्रशासन बदहाल हो चुका है। कोई ध्यान देने वाला नहीं है। इस मामले को लेकर भी देवास विधायक और कलेक्टर को जानकारी दी गई है जहां से सुधार का आश्वासन मिला है।
गंभीर अवस्था में अस्पताल का आईसीयू
इधर जिला अस्पताल का आईसीयू भी उपकरणों के अभाव में दयनीश दशा में है। नगर जनहित सुरक्षा समिति अध्यक्ष अनिलसिंह बैस ने बताया कि जिला अस्पताल का आईसीयू अस्पताल के अन्य वार्डो की तरह हो गया है। मरीज यहां ठीक होने की बजाय और बीमार होकर अन्य अस्पतालो में जा रहे हैं। आईसीयू में 24 घंटे डॉक्टर की उपस्थिति रहना चाहिए लेकिन डॉक्टर दिनभर में एक से दो बार राउंड लगाकर वापस चले जाते हैं। ऐसे में मरीजो कोई गंभीर समस्या होती है तो इमरजेंसी में जाकर मरीज का चेकअप करवाना पड़ता है। जिस कारण मरीजों को काफी तकलीफ होती है। आईसीयू में डॉक्टर तो ठीक उनके असिस्टेंट भी समय पर नहीं आते। आईसीयू में दिनभर चूहे, काकरोच, मच्छर घूमते रहते हंै। चार में से तीन एसी बंद हैं। कुछ दिन पहले एसी चालू किए गए थे, लेकिन गैस खत्म होने के बाद बंद हो गए। मरीज के परिजन अपने घर से पंखे व कूलर लेकर आते है। छत पर लगी सीएफएल बंद पड़ी हैं। समिति के विनोदसिंह गौड़, सुभाष वर्मा, सुनीलसिंह ठाकुर, विजयसिंह तंवर, सुभाष वर्मा आदि ने सीएमएचओ व संबंधित जवाबदारों से जिला अस्पताल आईसीयू में व्याप्त समस्याओं के शीघ्र निराकरण की मांग की है।
वर्जन-
आरोप गलत हैं। बेहोशी के डॉक्टर हमारे यहां उपलब्ध रहते हैं। कुछ और कारण रहा होगा। जहां तक आईसीयू की बात है तो अभी डॉ. पवनीकर अवकाश पर है इस कारण समस्या हो रही होगी। डॉक्टर बराबर राउंड लेते रहते हैं।
डॉ. एमएस गौसर
आरएमओ जिला अस्पताल

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