निर्दयता व मजबूरी में उलझा दो नवजातों का भविष्य...

एक को परिजन झाडिय़ों में फेंक गए, गरीबी के कारण दूसरे के पालन-पोषण से किया इनकार
दोनों जिला अस्पताल में भर्ती, बाल कल्याण समिति जांच कर लेगी निर्णय

By: mayur vyas

Published: 05 Sep 2019, 11:12 AM IST

देवास/हाटपीपल्या.
निर्दयता व मजबूरी में दो ऐसे नवजात जिन्हें दुनिया में आए कुछ ही दिन हुए हैं और उनका भविष्य उलझ गया है। एक बच्चा परिजनों की निर्दयता का शिकार हुआ तो दूसरा मजबूरी का। एक को परिजनों ने झाडिय़ों में फेंक दिया जबकि दूसरे का पालन-पोषण करने में परिजन असमर्थ हैं, फिलहाल दोनों बच्चे जिला अस्पताल में भर्ती हैं। अब बाल कल्याण समिति दोनों मामलों की जांच कर उनकी जि?मेदारी का निर्धारण करेगी।
एक मामला हाटपीपल्या क्षेत्र का है। यहां तहसील मु?यालय से करीब चार किमी दूर सादीपुरा व बरखेड़ासोमा के बीच नवनिर्मित पेट्रोल पंप के पास निर्दयी परिजन मंगलवार रात 11 बजे के करीब अपने नवजात शिशु को रात में सुनसान जंगल में छोडक़र चले गए। रास्ते में बच्चे की रोने की आवाज सुनकर दो राहगीर रुके। थोड़ी देर बाद इनको एक कार इंदौर की ओर से आते हुए दिखाई दी, उस कार को रुकवाया, जिसमें हाटपीपल्या के शिक्षक हरीश पिता कल्याण पाराशर बैठे थे। उन्होंने पूरे मामले की जानकारी ली तो राहागीरों ने बताया कि किसी बच्चे की रोने की आवाज आ रही हैं। उन्हें भी लगा कि कोई बच्चा रो रहा है। सभी ने आसपास तलाश किया तो झाड़ी में पड़ा नवजात रो रहा था।
आशा कार्यकर्ता ने बच्चे को झाडिय़ों में से निकाला
शिक्षक पाराशर ने मौके से डायल-१०० एवं 108 एंबुलेंस को फोन लगाकर सूचना दी। 108 एंबुलेंस ने पहुंचकर नवजात बालक को हाटपीपल्या के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया। 108 एंबुलेंस में पहले से ही ग्राम डेरियासाहू से शिशु माता को लेकर आ रही आशा कार्यकर्ता सुनीता विश्वकर्मा ने बिना कोई देरी करते हुए तुरंत नवजात शिशु को झाड़ी में से उठा लिया और 108 एंबुलेंस में मौजूद उपकरणों का उपयोग कर बच्चे को संभाल लिया।
जांच के बाद देवास किया रैफर
हाटपीपल्या के सरकारी अस्पताल में डॉक्टरों द्वारा नवजात शिशु का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। इसके बाद देवास रैफर कर दिया गया। उधर थाना प्रभारी मुकेश इजारदार के अवकाश पर होने के कारण यह मामला देख रहे एसआई नरेन्द्र ठाकुर ने मामले को संज्ञान में लेते हुए फरियादी हरीश पाराशर की सूचना पर कायमी कर जांच शुरू की है। समाचार लिखे जाने तक नवजात के माता-पिता का पता नहीं चल सका था।
शरीर पर कई जगह चोट, चीटियों ने भी काटा
नवजात बालक को बुधवार सुबह करीब चार बजे देवास जिला अस्पताल की नवजात शिशु गहन चिकित्सा इकाई (एसएनसीयू) में लाया गया। झाडिय़ों में फेंके जाने के कारण बालक के शरीर पर कई जगह चोट आई है। इसके अलावा उसे चीटियों ने भी काटा है। भर्ती कर उपचार शुरू किया गया, दिन में उसे दूध भी दिया गया।
नाबालिग ने दिया है जन्म, होगी जांच
मामले में प्रथमदृष्टया यह बात सामने आ रही है कि किसी नाबालिग द्वारा बच्चे को क्षेत्र के ही किसी अस्पताल में जन्म दिया गया है और फिर उसे झाडिय़ों में फेंक दिया गया है। हालांकि इसकी पुष्टि नहीं हो सकी है। मामले की जांच स्वास्थ्य विभाग की टीम करने की तैयारी में है।
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परिजन आर्थिक तंगी के शिकार, दूसरी बेटी को पालने से किया इनकार
दूसरा मामला जिले के सतवास का है। यहां रहने वाले एक दंपति को करीब तीन-चार दिन पहले बेटी हुई। सात माह में ही जन्म होने के कारण बेटी सहित मां की स्थिति भी ठीक नहीं थी। ऐसे में इनको देवास जिला अस्पताल रैफर कर दिया गया। दंपति की चार साल की पहले से ही एक बेटी है, दूसरी बेटी होने के बाद वो उसका पालन-पोषण करने की स्थिति में नहीं है, इसलिए उसे गोद देना चाहते हैं, इसके लिए माता-पिता दोनों सहमत हैं। इसकी जानकारी मिलने पर बुधवार को बाल कल्याण समिति की टीम जिला अस्पताल पहुंची। यहां माता-पिता से बात की, पता चला दोनों बेरोजगार हैं, आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है। ऐसे में बेटी को पाल नहीं सकते, इस संंबंध में आवेदन भी बाल कल्याण समिति को दिया गया है। नियमानुसार समिति ने दो माह का समय दंपति को दिया है, इस दौरान वो बेटी को फिर से ले सकते हैं।
वर्जन
हाटपीपल्या क्षेत्र में मिले बच्चे के संबंध में किसी प्रकार का आवेदन या लिखित सूचना नहीं मिली है। मोबाइल पर सूचना मिलने के बाद अस्पताल जाकर उसकी स्थिति के बारे में डॉक्टरों से चर्चा की है। वहीं सतवास के मामले में दंपति की काउंसलिंग की है लेकिन वो बच्ची को अपनाने के लिए फिलहाल तैयार नहीं हैं।
-रितू व्यास, अध्यक्ष बाल कल्याण समिति देवास।
बालक एक-दो दिन का है। उसके शरीर पर कई जगह चोट है, चीटियों ने भी काटा है। उपचार चल रहा है, दूध भी दिया गया है। अगले ४८ घंटे के बाद स्पष्ट रूप से कुछ कहा जा सकेगा।
-डॉ. वैशाली निगम, एसएनसीयू प्रभारी जिला अस्पताल।

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