डीईओ के लिए कर रहे थे दावेदारी, शासन ने बना दिया बीईओ....!

डीईओ के लिए कर रहे थे दावेदारी, शासन ने बना दिया बीईओ....!
patrika

mayur vyas | Updated: 13 Aug 2019, 12:00:20 PM (IST) Dewas, Dewas, Madhya Pradesh, India

कांग्रेस नेताओं के माध्यम से कर रहे थे कोशिश, भोपाल में गड़बड़ाए समीकरण
स्थायी डीईओ का इंतजार कर रही कुर्सी, नहीं हो पा रही पदस्थापना

देवास. इन दिनों जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में बेचैनी छाई हुई है। इसकी वजह डीईओ की कुर्सी है। सीबी केवट के सेवानिवृत्त होने के बाद नए डीईओ को पदस्थापना नहीं हो पाई है और डिप्टी कलेक्टर के पास चार्ज है। कुछ नाम चर्चा में जरुर है और विभाग के ही एक व्यक्ति के माध्यम से कांग्रेस नेताओं से मीटिंग भी हुई लेकिन भोपाल से इंकार कर दिया गया और अब डीईओ की पदस्थापना पॉलिसी के अनुसार ही होगी।
दरअसल गत दिनों सीबी केवट डीईओ के पद से सेवानिवृत्त हुए थे। इसके बाद से नए डीईओ के लिए चर्चाओं का दौर शुरू हुआ था। कई नाम दौड़ में आए थे। इनमें पूर्व में डीईओ रह चुके राजीव सूर्यवंशी और राजेंद्र खत्री का नाम प्रबल दावेदारों में था। उत्कृष्ट विद्यालय प्राचार्य चंद्रावती जाधव और सहायक संचालक के नाम की भी चर्चा हुई लेकिन ये दोनों ही डीईओ की कुर्सी के कांटो भरे ताज को पहनने के लिए तैयार नहीं थे। हालांकि विभाग के साफ सुथरी छवि के लोग चाहते थे कि जाधव यदि डीईओ बनती है तो विभाग की बदनाम हो चुकी कार्यशैली में सुधार आएगा लेकिन ऐसा हुआ नहीं।
भोपाल में बिगड़ा गणित
सूत्रों का कहना है कि राजेंद्र खत्री का नाम इस दौड़ में आगे निकल चुका था। विभाग के एक व्यक्ति ने उनके लिए कांग्रेस नेताओं से संपर्क साधा और पूरी बातचीत फाइनल कर ली। यह माना जाने लगा कि खत्री का नाम अब लगभग तय ही है लेकिन भोपाल में पूरा गणित बिगड़ गया। बताया गया कि भोपाल में आयुक्त और प्रमुख सचिव ने साफ साफ कहा कि डीईओ के लिए पॉलिसी तय हुई है। सीनियर की ही पदस्थापना होगी। इसके साथ ही राजेंद्र खत्री को बीईओ बनाया गया है। चंद्रावती जाधव को भी बीईओ बनाया गया था लेकिन उन्होंने यह पद लेने से मना कर दिया। इस पूरे घटनाक्रम के बाद अब कहा जा रहा है कि यदि लोनिवि मंत्री और उनके समर्थकों का गैरजरूरी दखल नहीं हुआ तो डीईओ की पदस्थापना नियमों के अनुसार ही होगी।
विवादों से घिरी रही है डीईओ की कुर्सी
गौरतलब है कि डीईओ की कुर्सी विवादों से घिरी रही है। बीते कुछ सालों से जो डीईओ बनकर यहां रहे वे आरोपों से घिरे रहे। रामेश्वर खेड़े का कार्यकाल थोड़ा ठीक था लेकिन अपने मिजाज के कारण वे सुर्खियों में रहे। खत्री पूर्व में डीईओ थे और अपनी कार्यशैली के कारण विवादों में रहे थे। इसी तरह सूर्यवंशी फिलहाल डीपीसी है और तत्कालीन कलेक्टर आशीष सिंह की गुडलिस्ट में होने के चलते उन्हें डीईओ का चार्ज दिया गया था। इसी दौरान सीबी केवट भोपाल से आदेश लेकर आ गए थे और स्थिति ऐसी बनी थी कि एक विभाग में एक ही कुर्सी पर दो अधिकारी आ गए थे।

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