एक साथ तीन जिगरी दोस्तों की हुई दर्दनाक मौत, साथ उठी अर्थी तो रो पड़ा पूरा गांव

एक साथ तीन जिगरी दोस्तों की हुई दर्दनाक मौत, साथ उठी अर्थी तो रो पड़ा पूरा गांव
एक साथ तीन जिगरी दोस्तों की हुई दर्दनाक मौत, साथ उठी अर्थी तो रो पड़ा पूरा गांव,एक साथ तीन जिगरी दोस्तों की हुई दर्दनाक मौत, साथ उठी अर्थी तो रो पड़ा पूरा गांव,एक साथ तीन जिगरी दोस्तों की हुई दर्दनाक मौत, साथ उठी अर्थी तो रो पड़ा पूरा गांव

Bhawna Chaudhary | Updated: 09 Oct 2019, 11:29:56 AM (IST) Dhamtari, Dhamtari, Chhattisgarh, India

धमतरी जिले के ग्राम अंगारा (डाही) में दशहरे के दिन मातम पसरा रहा । जब एक ही दिन तीन जिगरी दोस्तों की अर्थी एक साथ उठी।

धमतरी. छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के ग्राम अंगारा (डाही) में दशहरे के दिन मातम पसरा रहा । जब एक ही दिन तीन जिगरी दोस्तों की अर्थी एक साथ उठी। इससे तीनों मृतकों के परिजनों का कलेजा फट गया। हर घर में मातम सा माहौल था। इस दर्दनाक घटना से ग्राम अंगारा (डाही) के कई घरों में चूल्हे नहीं जले।

कैसे हुआ हादसा
उल्लेखनीय है कि 7 अक्टूबर को कुरूद के खेल मैदान में रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। इस कार्यक्रम को देखने के लिए संदीप साहू (22) पिता समयदास अपने साथी मनोज साहू (25) पिता अरूण और विक्रम रजक (24) पिता मनमोहन रात 9 बजे अपने घर से गए थे। परिजनों के अनुसार जाते समय उन्होंने कहा था कि वे जल्द ही लौट आएंगे। चूंकि तीनों एक ही बाइक में सवार होकर गए थे, इसलिए जब वे रात 12 बजे तक नहीं लौटे, तो परिजनों को चिंता होने लगी।

एक साथ तीन जिगरी दोस्तों की हुई दर्दनाक मौत, साथ उठी अर्थी तो रो पड़ा पूरा गांव

संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन नहीं हुआ। ऐसे में किसी अनहोनी की आशंका से परिजन बेचैन हो गए। रात करीब एक बजे जब यह खबर मिली कि उनकी बाइक एक्सीडेंट हो गई है, तो उनकी धडक़नें बढ़ गई। कुछ ग्रामीणों को साथ लेकर वे जब कुरूद पहुंचे, तो वहां आंख के सामने अपने नौजवान बच्चों की लाश देखकर बेसुध हो गए। उन्हें यकीन ही नहीं हो रहा था कि कुछ घंटों पहले हंसते-मुस्कुराते घर से निकले उनके बच्चे मौत की गहरी नींद में सो गए हैं।

एक साथ तीन जिगरी दोस्तों की हुई दर्दनाक मौत, साथ उठी अर्थी तो रो पड़ा पूरा गांव

परिजनों का बुरा हाल
पुलिस ने दूसरे दिन मंगलवार को पोस्टमार्टम करने के बाद मनोज साहू और संदीप साहू की लाश को परिजनों को सौंप दिया। उधर, इस घटना में गंभीर रूप से घायल विक्रम रजक की भी रायपुर में इलाज के दौरान मौत हो गई। तीनों के शव को जैसे ही गांव में लाया गया, वहां कोहराम मच गया। परिजनों का तो रो-रोककर बुराहाल था। सांत्वना देने के बाद भी उनका रूदन कम नहीं हो रहा था। सैकड़ों ग्रामीणों की उपस्थिति में उनकी चिता को मुखाग्नि दी गई।

काफी खुशमिजाज थे
उल्लेखनीय है कि मनोज, संदीप और विक्रम तीनों अच्छे दोस्त थे। उनमें आपस में काफी प्यार था। अपने खुशमिजाजी के कारण वे काफी लोकप्रिय थे। सबकी एक राय से तीनों की अर्थी एक उठी। चिता को जब मुखाग्नि दी गई, तो कई ग्रामीण फूट-फूटकर रो पड़े।

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