छत्तीसगढ़ चुनाव: नोटा के चलते बदल सकता है जिले का राजनैतिक समीकरण

छत्तीसगढ़ चुनाव: नोटा के चलते बदल सकता है जिले का राजनैतिक समीकरण

Chandu Nirmalkar | Publish: Oct, 13 2018 06:09:51 PM (IST) | Updated: Oct, 13 2018 06:09:52 PM (IST) Dhamtari, Chhattisgarh, India

छत्तीसगढ़ चुनाव: नोटा के चलते बदल सकता है जिले का राजनैतिक समीकरण

धमतरी. पिछले विधानसभा चुनाव में धमतरी जिले की तीनों विधानसभा सीटों से करीब 10 हजार 9 मतदाताओं ने नोटा का उपयोग किया था। इसमें सबसे ज्यादा 6 हजार 63 मतदाता सिहावा विधानसभा क्षेत्र के थे। राजनीतिक पार्टियों के प्रति जिस तरह अविश्वास की भावना बढ़ती जा रही है, उसे देखते हुए राजनैतिक पंडितों का कहना है कि वर्ष-2018 के विधानसभा चुनाव में भी जमकर नोटा का उपयोग हुआ, तो समीकरण गड़बड़ा जाएगा।

जिले धमतरी, सिहावा और नगरी विधानसभा सीट हैं। जिले में 5 लाख 92 हजार 141 मतदाता है। इसमें 2 लाख 92 हजार 137 महिला और 3 लाख 2 पुरूष मतदाता शामिल है। पिछले बार हुए विधानसभा चुनाव में 4 लाख 48 हजार 788 मतदाताओं ने अपने मत का प्रयोग किया था। निर्वाचन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार पिछले विधानसभा चुनाव में सिहावा विधानसभा क्षेत्र से श्रवण मरकाम, अंबिका मरकाम, महेश कुमार, पन्नालाल कश्यप, अशोक सोम, रेवती ध्रुव, चंद्रभान मरकाम और पूरण नेताम खड़े हुए थे।

यहां 1 लाख 41 हजार 612 मतदाताओं ने मतदान किया था, जिसमें से 6 हजार 63 ने नोटा का बटन दबाया था। कुरूद विधानसभा में अजय चंद्राकर, लेखराम साहू, भोजराम साहू, प्रभात मेघावाले, युवराज साहू, अनुराधा अग्रवाल, भुनेश्वर साहू, मुरारीलाल साहू, रेखलाल सिन्हा, ताराचंद बांधे, योगेन्द्र खरे और ओमप्रकाश मारकंडे ने भाग्य अजमाया था। यहां 1 लाख 51 हजार 751 मतदाताओं ने मतदान में हिस्सा लिया था, जिसमें 4 हजार 745 ने नोटा का उपयोग किया। जिस तरह नोटा का उपयोग हुआ है, उसे देखते हुए प्रमुख राजनैतिक दल के नेताओं की चिंता भी बढ़ गई है।

यहां भी हुआ उपयोग
धमतरी विधानसभा में गुरूमख सिंह होरा, इंदर चोपड़ा, दयाराम साहू, कन्हैयालाल साहू, संतोष वर्मा, दीपक कुमार अग्रवाल, ह्रदय लाल नेताम, लीलाराम साहू, बीरेन्द्र नाग, नवीनचंद्र, नील पटेल और सादिक हुसैन चुनाव लड़े थे। यहां 1 लाख 55 हजार 425 मतदाताओं ने मत का प्रयोग किया था, जिसमें 5 हजार 201 ने नोटा का बटन दबाना उचित समझा।

इसलिए करते हैं नोटा का उपयोग
विधानसभा और लोकसभा चुनाव में अब बैलेट पेपर की जगह ईवीएम मशीन का उपयोग किया जा रहा है। ऐसे भी मतदाता होते हैं, जो नामांकित प्रत्याशियों में से किसी को भी अपना जनप्रतिनिधि नहीं बनाना चाहते और मताधिकार का प्रयोग भी करना चाहते हैं। ऐसे मतदाताओं के लिए ईवीएम मशीन में नोटा का भी आप्सन रहता है। इसका उपयोग यहां के मतदाता बखूबी कर रहे हैं।

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