बीएसपी से मिलने वाला सीएसआर फंड का नहीं मिला लाभ, डूब प्रभावितों ने चुनाव बहिष्कार की दी चेतावनी

बीएसपी से मिलने वाला सीएसआर फंड का नहीं मिला लाभ, डूब प्रभावितों ने चुनाव बहिष्कार की दी चेतावनी

Deepak Sahu | Publish: Sep, 16 2018 08:00:00 PM (IST) Dhamtari, Chhattisgarh, India

2 गांवों को उजाड़ कर बनाए गए गंगरेल बांध के विस्थापितों को अब तक न्याय नहीं मिल सका।

धमतरी. छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में 52 गांवों को उजाड़ कर बनाए गए गंगरेल बांध के विस्थापितों को अब तक न्याय नहीं मिल सका। बीएसपी से मिलने वाला सीएसआर फंड का भी उन्हे लाभ नहीं मिला। रमन सरकार की उपेक्षा से तंग आकर अब डूब प्रभावितों ने चुनाव बहिष्कार की चेतावनी दी है।

उल्लेखनीय है कि चालीस साल पहले 1975 से 1978 के बीच में गंगरेल बांध को सार्वजनिक परियोजना के उद्देश्य से बनाया गया था। बांध बनाने के लिए यहां 52 गांवों की 3,729 लोगों की 15,760.22 हेक्टेयर भूमि अर्जित कर सिंचाई सुविधा भी बना दी, लेकिन अब तक 1959 आदिवासी, 217 हरिजन, 1553 सामान्य जाति के कास्तकारों के अलावा 1181 भूमिहीनों का व्यवस्थापन नहीं हो सका। पुर्नवास की मांग को लेकर वे दर-दर भटक रहे हैं। गंगरेल बांध प्रभावित जन कल्याण समिति के सचिव अध्यक्ष महेन्द्र उइके ने कहा कि हमने अपना घर-जमीन कुर्बान कर छत्तीसगढ़ की खुशहाली की इबारत लिखी है, लेकिन अब उनका जीवन ही अंधकारमय हो गया। वायदा कर सरकार ने उनके साथ छल किया है। यदि सरकार बीएसपी से मिलने वाला सामाजिक-सुरक्षा-सरोकार (सीएसआर) फंड को ही उन पर खर्च कर दे, तो हर साल सैकड़ों लोगों का जीवन संवर जाएगा।

जल्द करेंगे महा बैठका
डूब प्रभावित तिर्रा के श्यामलाल निषाद, विजय निषाद, मीना मंडावी, त्रिवेन्द्र कुमार विश्वकर्मा, इंदल सिंग, घनाराम निषाद, दिनेश पटेल ने कहा कि रमन सरकार को नींद से जगाने के लिए जल्द ही डूब प्रभावितों की महाबैठका होगी, जिसमें अब तक संघर्षों की समीक्षा की जाएगी।

डूबानवासियों का दर्द

तिर्रा के देवमन मंडावी ने बताया गंगरेल बांध को बनाने के लिए हमने अपना घर-द्वार पानी में डूबो दिया, लेकिन सरकार को उन पर दया नहीं आई। व्यवस्थापन की लड़ाई वे अंतिम सांसें तक लडेंगे।

अरौद रामनिहोरा निषाद ने बताया गंगरेल बांध ने आज छत्तीसगढ़ की तकदीर बदल ली। खरीफ और रबी सीजन में सिंचाई से किसानों में खुशहाली भी आ गई, लेकिन डूब प्रभावितों का व्यवस्थापन अब तक नहीं हो सका।

न्याय पाने कोई कसर नहीं छोड़ेंगे
संघ के सचिव गणेश खापर्डे ने कहा कि न्याय पाने जिस तरह से वे चालीसा सालों से भटक रहे हैं, उसी तरह अब शासन-प्रशासन को भी डूब प्रभावित तरसाएंगे। गरीबों की कोई सुनवाई नहीं करने से अब उनके समक्ष चुनाव बहिष्कार के अलावा दूसरा चारा नहीं रह गया है। महाबैठका में रणनीति बनाकर राज्यपाल और राष्ट्रपति को इसकी सूचना भेज दी जाएगी।

Ad Block is Banned