धमतरी: 74 और नए केस आए सामने, कोरोना संक्रमण हुआ बेकाबू, रोजानाएक मरीज की हो रही मौत

सितंबर माह में कोरोना संक्रमण जिलेवासियों पर कहर बनकर टूट रहा है। 17 दिनों में रिकार्ड 928 नए मरीज सामने आए हैं। वहीं 16 लोगों की मौत है।

By: Bhawna Chaudhary

Published: 18 Sep 2020, 02:54 PM IST

धमतरी. सितंबर माह में कोरोना संक्रमण जिलेवासियों पर कहर बनकर टूट रहा है। 17 दिनों में रिकार्ड 928 नए मरीज सामने आए हैं। वहीं 16 लोगों की मौत है। इस तरह प्रतिदिन औसतन 53 नए मरीज मिल रहे हैं इससे आम नागरिकों में दहशत व्याप्त है। स्थिति यह है कि अब सामान्य बीमारी से पीड़ित मरीज भी अस्पताल जाने से कतरा रहा है। ऐसे संक्रमण के प्रचार पर अंकुश नहीं लगाया गया, तो सितंबर माह के अंतिम सप्ताह तक यह आंकड़ा 2 हजार को भी पार कर जाएगा।

उल्लेखनीय है कि जिले में कोरोना संक्रमण तीन गुना तेजी से फैल रहा है सबसे सुरक्षित माना जाने वाला ग्रामीण क्षेत्र भी अब इसकी चपेट में आ गया है एक जानकारी के अनुसार धमतरी की कुल आबादी करीब 8 लाख है, जिसमें से अब तक की स्थिति में सिर्फ 21386 लोगों की कोरोना जांच की गई है। इसमें 1263 लोग कोरोना संक्रमित मिले हैं। वह 21 लोग मौत के मुंह में समा चुके हैं। अभी साढ़े 7 लाख से अधिक लोगों की जांच करना बाकी है। ऐसे में जांच के दायरा बढ़ने के साथ ही संक्रमित मरीजों का आंकड़ा भी तेजी से बढ़ेगा। और स्वास्थ्य विभाग की ओर से संक्रमण के प्रसार पर अंकुश लगाने के लिए अब तक किए गए सभी प्रयास बेअसर साबित हो रहे हैं।

यही वजह है कि अव धमतरी, कुरुद मगरलोड और नगरी ब्लाक में संक्रमित मरीजों की संख्या में अप्रत्याशित रूप से बढ़ोत्तरी हुई है। धमतरी शहर में अब तक सर्वाधिक 485 लोग संक्रमित हुए हैं। वहीं 15 लोग अपनी जान गवां बैठे हैं। दूसरे नंबर पर कुरुद ब्लाक है। यहां 313 संक्रमित मरीज सामने आए हैं, जिसमें से 3 लोगों की मौत हुई है। इसी तरह मगरलोड में 90 और नगरी वनांचल में 196 मरीज मिले हैं। गुजरा (धमतरी ग्रामीण) में 179 मरीज मिले हैं। इस तरह जिले में सबसे ज्यादा मरीज धमतरी शहर से सामने आए हैं। इसके बाद भी प्रशासन की ओर से संक्रमण पर अंकुश लगाने के लिए कोई सार्थक पहल नहीं की जा रही है। इससे संक्रमण तेजी से फैल रहा है। इससे नागरिकों में रोष पनपने लगा है।

कोरोना संक्रमण से बचने के लिए लोगों को अब शासन के गाइड लाइन का गंभीरता से पालन करने की जरूरत है। छोटी सी लापरवाही भारी पड़ सकती है।
डॉ विजय फूलमती सविलास अधिकारी

Bhawna Chaudhary
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