नोट बंदी से औंधे मुंह गिरा भू - माफियाओं का कारोबार, 7 दिनों में सिर्फ 11 रजिस्ट्री

नोटबंदी से जमीन के कारोबार में तेजी आने का अनुमान था, लेकिन शहर में ऐसा हुआ नहीं। सप्ताहभर में यहां महज 11 रजिस्ट्री ही हुई, जिससे शासन को करीब  11.46 लाख रुपए का राजस्व की प्राप्ति हुई है

By: deepak dilliwar

Published: 17 Nov 2016, 11:27 PM IST

धमतरी. नोटबंदी से जमीन के कारोबार में तेजी आने का अनुमान था, लेकिन शहर में ऐसा हुआ नहीं। सप्ताहभर में यहां महज 11 रजिस्ट्री ही हुई, जिससे शासन को करीब  11.46 लाख रुपए का राजस्व की प्राप्ति हुई है।देश में पांच सौ और एक हजार रुपए के नोट पर पाबंदी के बाद काला बाजार का अधिकांश पैसा जमीन के कारोबार में लगने की आशंका थी, लेकिन यह मिथक टूट गया।

कालेधन पर पैनी नजर
सरकार ने कालेधन के निवेश के संभावित ठिकानों पर पैनी नजर रख रही है। यही कारण  है कि जमीन का कारोबार बुरी तरह से प्रभावित हुआ है। बीते 8 से 16 नवंबर तक हुई रजिस्ट्री पर गौर करें, तो यहां महज 31 रजिस्ट्री ही दर्ज हुई। इसमें भी पावर आफ अटार्नी के 4, वसीयत के 3 तथा बिक्रीनामा के 4 दस्तावेज शामिल हैं। शेष दिगर दस्तावेज का पंजीयन है। इस तरह देखा जाए तो उप-पंजीयक दफ्तर में रोजाना औसतन महज 2 दस्तावेजों का पंजीयन हुआ है, जबकि दिगर दिनों में यहां आंकड़ा 10-12 से अधिक रहता था।  रजिस्ट्री की रफ्तार रूकने से शासन को राजस्व आय का भी बड़ा नुकसान हुआ है। सप्ताहभर में महज 31 रजिस्ट्री से 11लाख 46 हजार की आय हुई।

रजिस्ट्री उप पंजीयक देवराज साव ने बताया कि नोटबंदी का गहरा असर  रजिस्ट्री में पड़ा है। पहले रोजाना दर्जनभर तक पंजीयन हो जाता था, जो घटकर औसतन 2 रह गई है।
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