वन्य प्राणियों की जान आफत में, अब जंगलों में भी सुनाई नहीं देती चीतों की दहाड़

शेर के बाद अब जंगल में चीतों की भी दहाड़ सुनाई नहीं दे रही। जंगल में अवैध शिकार और पेड़-पौधों की कटाई के चलते वन्य प्राणियों की जान पर आफत आ गई है

By: चंदू निर्मलकर

Published: 17 Dec 2015, 01:13 PM IST

धमतरी. शेर के बाद अब जंगल में चीतों की भी दहाड़ सुनाई नहीं दे रही। जंगल में अवैध शिकार और पेड़-पौधों की कटाई के चलते वन्य प्राणियों की जान पर आफत आ गई है। आज की तारीख में जिले के जंगल में कितने वन्य प्राणी हैं, इसकी भी कोई अधिकृत जानकारी विभाग के पास नहीं है।

कभी धमतरी जिले के जंगलों में बाघ घूमा करते थे। इन्हें देखने के लिए देश-विदेश से भी लोग आते थे, लेकिन आज यह स्थिति नहीं है। 2005 की वन्य प्राणी गणना के अनुसार जिले में 5 बाघ थे, लेकिन इसके बाद हुई गणना में बाघ का पता नहीं चला। ऐसी आशंका है कि इनका शिकार कर दिया गया है। गौतरलब है कि सीतानदी क्षेत्र के ५५० वर्ग किमी क्षेत्र को बाघ संरक्षण के लिए चुना गया था। यहां बाघों के लिए भोजन की कमी है, जिसके चलते बाघ इस क्षेत्र को छोड़कर दूसरी जगह पलायन कर गए।

अब यहां एक भी बाघ नहीं है। वन्यप्राणी विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यहां उनके भोजन की व्यवस्था की जाती है, तो बाघों की संख्या बढ़ जाती। इसी उद्देश्य को लेकर सीतानदी अभ्यारण्य में हिरणों की नर्सरी तैयार करने के लिए करीब 2 करोड़ की योजना बनाई गई थी, लेकिन इसकी फाइल आगे नहीं बढ़ी। इसके बाद सीतानदी को उदंती से जोड़कर सीतानदी-उदंती टाईगर रिजर्व बना दिया गया।

हो रहा लगातार शिकार
जिले के जंगल से बाघ तो अप्रत्याशित रूप से गायब हो गए हैं। अब चीता की जान पर भी आफत आ गई हैं। वन्य प्राणियों का लगातार अवैध शिकार हो रहा है, लेकिन इसकी रोकथाम के लिए विभागीय अधिकारियों को फुर्सत नहीं है। उल्लेखनीय है कि दो साल पहले जबर्रा के जंगल में एक तेंदुआ मृत अवस्था में मिला था। उनके नाखून आदि गायब थे। इसके बाद तेंदुआ खाल तस्करी के कुछ मामले भी पकड़े गए। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि जंगल में वन्य प्राणियों की जान सुरक्षित नहीं है।

अमला मुस्तैद
वन्य प्राणियों की गणना रिपोर्ट अब तक देहरादून से नहीं आई है, इस कारण जिले के जंगल में कौन सा वन्य प्राणी कितने संख्या में यह बता पानी मुश्किल है। जंगल में अवैध शिकार और वनों की कटाई रोकने के लिए पूरी तरह अमला मुस्तैदी से काम कर रहा।
श्री सोनी, एसडीओ वन
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चंदू निर्मलकर Desk
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