कलेक्टर दर पर 12 महीने की मानदेय की मांग को लेकर मध्यान्ह भोजन कर्मियों ने खोला मोर्चा

- कलेक्टर दर पर 12 महीने की मानदेय देने की मांग को लेकर मध्यान्ह भोजन कर्मचारियों का हल्ला बोला
- कोरेाना काल में स्कूल बंद रहने के बाद भी रसोईयों ने बच्चों को घर-घर पहुंचाकर दिया राशन

By: Ashish Gupta

Published: 21 Jan 2021, 09:36 PM IST

Dhamtari, Dhamtari, Chhattisgarh, India

धमतरी. कलेक्टर दर पर 12 महीने की मानदेय देने की मांग को लेकर मध्यान्ह भोजन कर्मचारियों ने जमकर हल्ला बोला। उन्होंने कहा कि कोरेाना काल में स्कूल बंद रहने के बाद भी रसोईयों ने बच्चों को घर-घर पहुंचाकर राशन दिया। इसके बावजूद राज्य और केन्द्र सरकार उन्हें अल्प मानदेय दे रही। छह घंटे की काम देकर कलेक्टर दर देने की गुहार लगाई है।

गुरूवार को गांधी चौक मैदान में धरने पर बैठी महिलाओं ने कहा कि विधानसभा और लोकसभा चुनाव के समय कांग्रेस-भाजपा दोनों ही पार्टियों ने रसोइयों की मांगों को पूरा करने का वादा किया था, जिसे पूरा नहीं किया गया। छग मध्यान्ह भोजन मजदूर एकता यूनियन (सीटू) के प्रदेश प्रभारी समीर कुरैशी ने कहा कि केन्द्र सरकार योजना कर्मियों से किया गया वायदा पूरा नहीं कर रही।

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उन्होंने कहा कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की तरह स्कूलों में मध्यान्ह भोजन कर्मचारी कड़ी मेहनत करते हैं। बच्चों के लिए खाना बनाकर परोसते हैं, फिर भी उन्हें सम्मानजनक मानदेय नहीं मिलता। महज 12 सौ रुपए मासिक मानदेय में आज घर चलाना मुश्किल हो गया है। यूनियन की अध्यक्ष अनुसुईयां कंडरा, उपाध्यक्ष अहिल्या ध्रुव, सरला शर्मा ने कहा कि केन्द्र सरकार ने रसोईयो के मानदेय में एक हजार रुपए बढ़ोत्तरी की घोषणा की है, लेकिन अब तक यह नहीं मिला।

इसी तरह चुनाव के पूर्व तत्कालीन पीसीसी अध्यक्ष भूपेश बघेल ने रसोईयों से बड़े-बड़े वायदे किए थे। सरकार में आने के बाद 3 सौ रुपए मानदेय बढ़ाने की घोषणा भी की, लेकिन दो साल बाद भी उन्हें बढ़ा हुआ मानदेय नहीं मिला। धरना के बाद एसडीएम को मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। प्रदर्शनकारियों में अमरिका नागरची, ललिता साहू, सारिका ध्रुव, रजनी निर्मलकर, राधा दिली, सरिता साहू, जयश्री गोस्वामी, संध्या ध्रुव, हौमिल पटेल, रूखमणी निषाद, गणेशराम भगत, अमरिका नेताम, शैलेन्द्री ध्रुव आदि मौजूद रहे।

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कामरेड महेश निर्मलकर, मनीराम देवांगन, सुमित निषाद ने कहा कि जिले के करीब 13 स्कूलों में 81 संकुल के जरिए 26 सौ रसोईया कार्यरत हैं। अल्प मानदेय के चलते उनकी आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर हो गई है। उन्होंने कहा कि जब पश्चिम बंगाल सरकार रसोईयों को 12 महीने काम दे सकती हैं, तो छत्तीसगढ़ सरकार को भी इसके लिए आगे आना चाहिए। उन्हें सम्मान जनक मानदेय दिया जाना चाहिए।

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