scriptDhamtari Naxal News: Naxalites are keeping their hold among the youth | बेरोजगाारी का फायदा उठा कर धमतरी में युवाओं के बीच नक्सली बना रहे अपनी पैठ, पुलिस की बढ़ी चुनौती | Patrika News

बेरोजगाारी का फायदा उठा कर धमतरी में युवाओं के बीच नक्सली बना रहे अपनी पैठ, पुलिस की बढ़ी चुनौती

Dhamtari Naxal News: अपने कई हार्डकोर साथियों की मौत के बाद सालभर तक खामोश बैठे रहे नक्सलियों ने अब फिर से अपनी पैठ बनानी शुरू कर दी है। सुदूर गांवों में ग्रामीणों को अपने झांसे में लेने लगे हैं।

धमतरी

Published: December 01, 2021 08:09:15 pm

धमतरी. Dhamtari Naxal News: अपने कई हार्डकोर साथियों की मौत के बाद सालभर तक खामोश बैठे रहे नक्सलियों ने अब फिर से अपनी पैठ बनानी शुरू कर दी है। सुदूर गांवों में ग्रामीणों को अपने झांसे में लेने लगे हैं। बंदूक की नोंक के आगे ग्रामीणों का भी मुंह नहीं खुल रहा। ऐसे में नगरी-सिहावा वनांचल को लाल आतंक से मुक्त करने पुलिस के समक्ष किसी चुनौती से कम नहीं है। उल्लेखनीय है कि जनवरी महीने में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के. विजय कुमार की अध्यक्षता में हुई बैठक के निर्णय पर अब तक फालो नहीं हो सका है। ऐसे में एक बार फिर यहां जंगल में सीतानदी और गोबरा दलम की चहल-कदमी ने ग्रामीणों को दहशतजदा कर दिया हैं।
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बेरोजगाारी का फायदा उठा कर धमतरी में युवाओं के बीच नक्सली बना रहे अपनी पैठ, पुलिस की बढ़ी चुनौती
उल्लेखनीय है कि पिछले 35 सालों से नक्सली धमतरी वनांचल को सुरक्षित शरणगाह के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं। पहले घटना-दुर्घटना के बाद बस्तर से गरियाबंद-उड़ीसा, झारखंड आदि राज्यों में आने-जाने के लिए नक्सली धमतरी के नगरी-सिहावा वनांचल का उपयोग करते थे। उनके लिए यह सुरक्षित शरणगाह के रूप में भी काम आ आता रहा, लेकिन अब नक्सलियों ने इसे ही अपना स्थायी अड्डा बना लिया है। जिले की सीमावर्ती चमेदा, साल्हेभाट, मासूलखोई तथ मैनपुर ब्लाक के सीमावर्ती गोबरा और छोटे गोबरा अब तक इनके ठिकाना के रूप में काम आता रहा। यही वजह है कि नक्सलियों का यह पसंदीदा इलाका हैं।
गौरतलब है कि जिले में वर्ष-2009 से लेकर 2019 तक जिले में माओवादी घटनाओं में पुलिस और आम नागरिकों को भारी नुकसान पहुंचा है। वर्ष-2009 में तो एम्बुश बिछाकर माओवादियों ने रिसगांव में कांकेर की पुलिस पार्टी को उड़ा दिया। इस घटना में 11 पुलिस जवानों के साथ एक चालक और एक गोपनीय सैनिक शहीद हुए थे। इसके बाद से लेकर समय-समय पर माओवादी घटनाओं को अंजाम देते रहे। इधर, पुलिस की ओर से भी धूर वनांचल में नक्सलियों का इन्काउंटर जारी है।
पुलिस सूत्रों के अनुसार बीते दो सालों में जंगल में फोर्स ने अनेक दुर्दांत नक्सलियों को मार गिराया है। इनमें हार्डकोर नक्सली सीमा मंडावी, राजू कोमरा, मंजूला उर्फ दीपा, मुन्नी उर्फ रश्मि, राजुला उर्फ प्रमिला प्रमुख है। इसके अलावा नक्सली जयसिंह, अजीत सिंह और रामसू जीवित पकड़ा गया। उनके निशानदेही पर पुलिस को सालभर तक लगातार सफलता भी मिली गई। इस बीच सालभर तक नक्सलियों ने अपनी खामोशी अख्तियार कर जंगल में चुपचाप बैठे रहे। इसके बाद बदले की आग में झुलस रहे नक्सलियों ने सालभर में पुलिस के 6 मुखबिरों की हत्या कर दी। इसके बाद नगरी से लेकर बोराई तक पुन: नक्सलियों का खौफ अब सिर चढ़कर बोल रहा हैं।
रोजगार और सुविधाएं जरूरी
बेराजगारी और अभाव की जिंदगी के चलते नक्सलियों के संगठन से जिले के कई युवा आकर्षक पैकेज के प्रलोभन में जुड़ रहे हैं। खुफिया सूत्रों के अनुसार जिले के करीब 50 से अधिक युवक सीतानदी दलम, गोबरा दलम समेत विभिन्न संगठनों से परोक्ष या अपरोक्ष रूप से जुड़े हुए है। सामाजिक कार्यकर्ता डा. केएस नायक का कहना है कि वनांचल में बुनियादी सुविधाओं के विकास के साथ ही युवाओं को रोजगार से जोड़कर युवाओं को भटकने से बचाया जा सकता है।
गावड़े बना आतंक का पर्याय
जंगल में लंबे समय से माओवादी सत्यम गावड़े(कांकेर), टिकेश्वर ध्रुव(एकावारी), दीपा (मैनपुर), दीपक मंडावी, रूपेश सलाम, जयलाल उमा, प्रमिला (बस्तर), जानसी, टीना, रोनी (महाराष्ट्र), रामदास, शांति आदि नक्सलियों का खौफ है। इनमें सीतानदी दलम के सत्यम गावड़े दुर्दांत नक्सली है। नगरी के जंगल में पिछले कई सालों से वह आतंक का पर्याय बना हुआ है। पुलिस मुख्यालय ने इन्हें जिंदा पकडऩे या मारने पर लाखों रुपए का ईनाम भी रखा गया है। जिले में गोबरा एरिया कमेटी और सीतानदी एरिया कमेटी के साथ ही गरियाबंद से लगे मैनपुर लोकल गुरिल्ला स्क्वाड सक्रिय है। बताया जा रहा है कि इन प्रत्येक दलों में 8 से लेकर 12-15 माओवादी शामिल हैं।
नेटवर्क हुआ कमजोर
सीतानदी और गोबरा दलम के नक्सलियों ने अब तक मुखबिरी की शक में युवक सीतानदी गोंड़ (30) आमझर, वन विभाग के पूर्व चौकीदार गैंदलाल यादव (50) बोड़रा-भोथली, करही सरपंच राधिका कुंजाम के पति नीरेश कुंजाम (26) उजरावन, अमरदीप मरकाम (23) घोरागांव समेत दो अन्य ग्रामीणों की हत्या कर चुके हैं। एक के बाद एक ग्रामीणों को निशाना बनाए जाने के कारण उनमें भारी दहशत है। यही वजह है कि कल तक वनांचल को लाल आतंक से मुक्त करने ग्रामीण पुलिस को सहयोग करते थे, पर अब पुलिस को फिर से अपना नेटवर्क मजबूत करने काफी मशक्कत करना पड़ रहा है। जंगल में नए सिरे से पुलिस को मुखबिरों का जाल बिछाना पड़ रहा है।
मुख्यधारा में लाने का कोई प्रयास नहीं
नगरी के जंगल में इन दिनों करीब 60 से 70 नक्सली अलग-अलग दलों में सक्रिय हैं। इनमें से एकमात्र टिकेश ध्रुव स्थानीय ग्राम एकावारी का रहने वाला हैं। जंगल में सक्रिय अधिकांश नक्सली बस्तर, महाराष्ट्र और आंध्रप्रदेश-उड़ीसा के है। पुलिस की ओर से टिकेश को मुख्यधारा में लाने उनके गांव-घर भी गया था, लेकिन इसमें सफलता नहीं मिली। इसके बाद से और कोई सार्थक प्रयास होता नहीं दिख रहा। जबकि गांव वाले क्षेत्र में अमन-चैन चाहते हैं। लाल आतंक से वनांचल को मुक्त कराकर विकास की मुख्य धारा में जुडऩा चाहते हैं। इसके लिए लगातार वे पानी, बिजली, सड़क, पुल-पुलिया और स्वास्थ्य सुविधाओं की मांग को लेकर कलेक्ट्रेट तक पहुंच रहे हैं।
साझा आपरेशन अब तक शुरू नहीं
पुलिस सूत्रों के मुताबिक नक्सलियों के खिलाफ धमतरी जिला पुलिस तीन अन्य जिला गरियाबंद, कोंडागांव, कांकेर और उड़ीसा राज्य की पुलिस के साथ मिलकर संयुक्त ऑपरेशन शुरू करने वाली हैं। इसके लिए बीते जनवरी महीने में ही नक्सलियों के खात्मे के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के. विजय कुमार की अध्यक्षता में इंटर डिस्ट्रीक-स्टेट रिव्यू मीटिंग हो चुकी है। इसमें विशेष सर्च आपरेशन चलाने तथा प्रभावित क्षेत्रों में सड़क, पुल-पुलिया जैसे सुगम पहुंच मार्गों के विकास पर बल दिया गया है, लेकिन यह अभियान अब तक शुरू नहीं हो सका है।
एसपी प्रफुल्ल ठाकुर ने कहा, जिले के वनांचल को लाल आतंक से मुक्त करने संयुक्त आपरेशन चलाया जाएगा। इसके लिए डीआरजी, सीआरपीएफ, सीएएफ के जवानों को हाईअलर्ट कर दिया गया है। जल्द ही नक्सल आपरेशन शुरू होगा।
(अब्दुल रज्जाक रिजवी की रिपोर्ट )

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