रेत खदान बंद कराने ग्रामीणों के प्रदर्शन को पूर्व मंत्री अजय चंद्राकर का समर्थन, कही ये बात

- रेत खदान बंद कराने प्रशासन के खिलाफ ग्रामीणों ने खोला मोर्चा
- महिलाओं का मिल रहा आंदोलन में जबरदस्त समर्थन

By: Ashish Gupta

Published: 27 Feb 2021, 07:15 PM IST

धमतरी. आंदोलन में एकता की जरूरत है, शांति पूर्ण आंदोलन कर शासन-प्रशासन का ध्यान आकृष्ट कर एक सूत्रीय मांग रेत खदान बंद कराएं। ग्रामीणों की सफल मेहनत से परिणाम निकल आएगा। यह बात करेली बड़ी के धरना स्थल के 8वें दिन कुरूद विधायक अजय चंद्राकर ने आंदोलन का समर्थन करते हुए कहा। हजारों लोगों की भीड़ में पहुंच कर आंदोलन में जोश भरते हुए समर्थन किया।

उन्होंने आपसी भाई चारे की भावना से आंदोलन करने प्रेरित किया। उन्होंने कहा, आंदोलन किसी एक व्यक्ति विशेष पर आधारित नहीं होता। जो आंदोलन को समर्थन कर रहा है। वहीं एकजुटता है। जो लक्ष्य निर्धारित किये हो उनके लिए मिलकर काम करो। धरना स्थल में समर्थन करते हुए कहा कि सफल आंदोलन का नियत समय और एक लक्ष्य होना चाहिए। आरोप-प्रत्यारोपों से बचे।

रेत के मामलों को लेकर कहा कि करेली बड़ी में रेत खदान बंद करने जो मोर्चा खोला है वह काफी तारीफे लायक है। राज्य सरकार ने 325 से अधिक ऑक्शन प्रक्रिया से रेत घाटों की नीलामी की है। जिसमे अधिकांस दूसरे राज्यो के ठेकेदार को ही टेंडर दी है, ऐसे में छत्तीसगढ़ी सरकार की क्या नीति है। उन्होंने करेली बड़ी आंदोलन को लेकर विधानसभा सत्र में बात उठाने की बात रखी।

धरना स्थल में बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने बात रखी जिसका जवाब विधायक अजय चंद्राकर ने दी। वही आंदोलन को लेकर ग्रामीणों में काफी एकजुटता है जो रेत घाट बंद कराने शांति पूर्ण आंदोलन करने की रणनीति बनाया गया है। इस मौके पर श्याम साहू, वीरेंद्र साहू, दुर्गेश यादव, होरीलाल साहू, डगेश्वर सोनकर, संतोष साहू समेत बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्तिथ रहें।

इस बात को लेकर आंदोलन शुरू हुई
अवैध परिवहन उत्खनन से ग्रामीणों में नाराजगी
ग्रामीणों में ठेकेदार की मनमानी का नतीजा है कि मशीन से नदियों को खुदाई किया गया है। गहराई का तो अनुमान नहीं है। 15 फीट से अधिक रेत निकाली गई है। इससे घाट तो नुकसान हुआ है। साथ ही पर्यावरण का भी नुकसान हुआ है। ग्रामीणों का कहना है, बरसात में जल स्तर अधिक होने से अक्सर बाढ़ की स्थिति बना होता है। इससे ग्रामीणों में भय सता रहा है कि अधिक गहराई खनन होने से बाढ़ गांव में आ सकती है।

रॉयल्टी नहीं होने पर कार्रवाई नहीं
रात भर रेत का अवैध परिवहन होता है। हाइवा वाहन भी पकड़ा गया किंतु रॉयल्टी नहीं होने के बावजूद गाड़ी पर कोई कार्रवाई ही नहीं करते। इससे ग्रामीणों में आक्रोश है। ठेकेदार की मनमानी के चलते ग्रामीण लामबंद होकर रेत खदान बंद कराने आंदोलन छेड़ दिया गया है।

जेसीबी पर नही हुई कार्रवाई
आंदोलनकारियों समेत ग्रामीणों ने बताया कि जिस चैन माउंटेन मशीन से उत्खनन हो रहा था। वह घाट के किनारे पड़ा हुआ था।अधिकारी भी मशीन को देखा किंतु कार्रवाई नही किया गया इससे ग्रामीणों में व्याप्त रोष है।

महिलाओं का मिल रहा आंदोलन में जबरदस्त समर्थन
रेत खदान बन्द कराने प्रशासन के खिलाफ ग्रामीणों ने मोर्चा खोल दिया है। इसमे महिलाओं का जबरदस्त भागीदारी है। महिलाओ द्वारा प्रशासन को कोसते हुए रेत खदान बन्द कराने नारेबाजी की जा रही है।रेत खदान धरना स्थल में देश भक्ति और भजन गीत गाकर आंदोलन को एकजुटता दे रही है।तो दूसरे तरह जिला प्रशासन की सदबुद्धि के लिए हवन पूजन भी कर रहा है।

एनजीटी के नियमों की उड़ाई धज्जियां
ग्रामीणों ने बताया कि महानदी का सीना छलनी कर रेत उत्खनन मशीन से किया गया जो एनजीटी के नियमो का धज्जियां उड़ाया। ओवर लोडिंग, बिना रॉयल्टी, अवैध परिवहन जैसे अवैध कार्य रेत खदान में हुआ है। मशीनों से होने से मजदूरो को काम ही नहीं मिला। ऐसे में ठेकेदार की मनमर्जी से रेत का दोहन करने से ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। आंदोलनकारियों ने कहा कि जब तक खदान बंद नहीं होगा तब तक आंदोलन चलेगा।

Ashish Gupta
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