scriptGround report from Dhamtari district government | धमतरी जिला अस्पताल का बुरा हाल, ना आईसीयू ना ट्रामा यूनिट, मरीज परेशान | Patrika News

धमतरी जिला अस्पताल का बुरा हाल, ना आईसीयू ना ट्रामा यूनिट, मरीज परेशान

धमतरी जिला अस्पताल पर 6 जिलों का भार है, इसके बावजूद मरीजों की समुचित इलाज के लिए यहां पर्याप्त सुविधा नहीं है। 225 बिस्तरों वाले इस अस्पताल में आईसीयू की सुविधा नहीं होने से यह रिफरल सेंटर बनकर रह गया है।

धमतरी

Published: November 17, 2021 08:06:53 pm

धमतरी. छत्तीसगढ़ के धमतरी जिला अस्पताल पर 6 जिलों का भार है, इसके बावजूद मरीजों की समुचित इलाज के लिए यहां पर्याप्त सुविधा नहीं है। 225 बिस्तरों वाले इस अस्पताल में आईसीयू की सुविधा नहीं होने से यह रिफरल सेंटर बनकर रह गया है। गंभीर मरीजों का प्राथमिक इलाज कर उसे मेकाहारा या फिर अन्य सेंटरों में रिफर कर दिया जाता है। जिलेवासी सालों से यहां आईसीयू, ट्रामा यूनिट और रेडियो डायग्नोसिस्ट की मांग कर रहे हैं। इसके अभाव में मरीजों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
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धमतरी जिला अस्पताल का बुरा हाल, ना आईसीयू ना ट्रामा यूनिट, मरीज परेशान
जिला अस्पताल को अपग्रेड करने के साथ ही यहां गंभीर मरीजों के बेहतर इलाज के लिए पुरूष एवं महिला वार्ड में एक-एक सर्वसुविधायुक्त आईसीयू वार्ड बनाने की योजना थी। इसके लिए अस्पताल प्रबंधन की ओर से तत्कालीन सरकार को प्रस्ताव बनाकर भी भेजा गया, लेकिन अब तक यहां आईसीयू की सुविधा उपलब्ध नहीं हो सकी।
गौरतलब है कि जिला अस्पताल में धमतरी के साथ ही आसपास छह जिलों के मरीज इलाज के लिए आश्रित है। बालोद, कांकेर, दुर्ग, कोंडागांव, नारायणपुर के साथ ही गरियाबंद जिले के मरीज इलाज के लिए आते हैं। रोजाना यहां 500 से अधिक मरीज ओपीडी में जांच-उपचार के लिए पहुंचते है। इसके अलावा एक्सीडेंट समेत जहर सेवन के पीड़ित मरीजों को भी यहां इलाज के लिए लाया जाता है।
ऐसी स्थिति में आईसीयू की सुविधा नहीं मिलने से मरीजों को परेशानी उठानी पड़ती है। इसके चलते आपात स्थितियों में मरीजों को हायर सेंटर रिफरल करना पड़ता है। अस्पताल सूत्रों के मुताबिक पिछले चार सालों में यहां सड़क दुर्घटना, जहर सेवन समेत अन्य मामलों में करीब 4 सौ से अधिक गंभीर मरीजों को लाया गया, लेकिन आईसीयू की सुविधा के अभाव में इनमें से 30 फीसदी पीड़ितों की मौत हो गई, जबकि अन्य 40 फीसदी मरीजों को उनके परिजनों ने बेहतर इलाज के लिए निजी अस्पतालों में रिफर करा लिया।
ज्ञातव्य है कि जिला अस्पताल में 6 सौ यूनिट वाला ब्लड बैंक हैं। इस ब्लड बैंक का शुभारंभ तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री डा. कृष्णमृर्ति बांधी ने किया था। शुरूआत में ब्लड बैंक मे कभी भी ब्लड की कमी नहीं हुई, लेकिन कोरोना काल में पिछले दो सालों से ब्लड बैंक में ब्लड की कमी से जुझ रहा है। आज की स्थिति में 6 सौ यूनिट की क्षमता वाले इस बैंक में बमुश्किल 35-40 यूनिट ब्लड की उपलब्धता है।
रेडियोलॉजिस्ट नहीं
विडंबना है कि इतने बड़े जिला अस्पताल में सोनोग्राफी मशीन तो है, लेकिन रेडियो डायग्नोसिस्ट नहीं है। इसके अभाव सिटी स्कैन, एक्स-रे, यूएसजी, रंग डॉपलर, एमआरआई, डेक्सा, डीएसए, आईवीपी, मैमोग्राफी आदि की सुविधा अब तक उपलब्ध नहीं हो सकी। जबकि एक जिला अस्पताल के लिए यह तमाम सुविधा आज अति अनिवार्य हो गई है। सुविधा नहीं होने के कारण यहां के मरीजों को रिफरल किया जा रहा है।
ट्रामा यूनिट के अभाव में जा रही जानें
सरकारी क्षेत्र में जिले का सबसे बड़ा अस्पताल होने तथा रायपुर-बस्तर मार्ग में हाइवे का प्रमुख शहर होने के बावजूद स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए धमतरी को तरसना पड़ रहा हैं। खासकर ट्रामा यूनिट के अभाव में आए धमतरी में सड़क हादसों में लोगों की जानें जा रही हैं। पुलिस सूत्रों के मुताबिक बीते 10 सालों में धमतरी जिले में 5 हजार 5 से ज्यादा सड़क दुर्घटनाएं घटित हुई है, जिसमें 6 हजार 2 सौ से ज्यादा लोग घायल हुए, जबकि इन दस सालों में 1450 से ज्यादा लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा। यदि जिला अस्पताल में आईसीयू के साथ अलग से ट्रामा यूनिट होता तो शायद इनमें से अधिक मरीजों की जान बचाई जा सकती थी।
विशेषज्ञ डॉक्टर एक-एक कर छोड़ रहे
रायपुर से बस्तर के बीच में नेशनल हाइवे में यह सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल है। करीब 225 बिस्तरों वाला यह जिला अस्पताल में हाइवे सड़क के नजदीक तथा आवागमन का सुगम साधन होने के कारण यहां धमतरी के अलावा कांकेर, कोंडागांव, गरियाबंद, बालोद, दुर्ग जिले के सीमांत क्षेत्रों से बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए आते हैं, लेकिन अब यह अस्पताल राजनीति का शिकार बन गया है। यही वजह है कि यहां के विशेषज्ञ डाक्टर एक-एक कर अस्पताल छोडऩे लगे हैं। सिविल सर्जन के स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेने के बाद इसी महीने दो और विशेषज्ञ डाक्टरों का रिटायरमेंट भी है।
क्या कहते हैं लोग
युवा जय गिदवानी ने कहा, जिला अस्पताल में आईसीयू की सुविधा उपलब्ध कराना निहायत जरूरी है। इससे यहां आने वाले मरीजों को राहत मिलेगी।

युवा देशांत जैन ने कहा, शासन-प्रशासन को जिला अस्पताल को अपग्रेड कर सभी सुविधाएं उपलब्ध कराना चाहिए। इससे आम नागरिकों को सहुलियत होगी।
सीएमओ डा. डीके तुर्रे ने कहा, जिला अस्पताल में आईसीयू समेत अन्य सुविधाओं के लिए प्रस्ताव भेजा गया है। इनमें से आईसीयूआई का प्रस्ताव स्वीकृत हो गया है। जल्द ही टेंडर की प्रक्रिया के बाद इसका निर्माण किया जाएगा।

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