यूरिया का खेल : टारगेट बढ़कर हुए डेढ़ गुना, 79 हजार का लक्ष्य - फिर भी गोदाम खाली (देखे वीडियो)

- रबी सीजन में अब तक बंटा 6 हजार 377 मीट्रिक टन खाद
- सोसायटी ने जारी कर रखे परमिट, गोदाम पड़े है खाली
-सहकारिता विभाग का दावा पर्याप्त मात्रा में है खाद, किसानों को दिक्कत नहीं

By: Amit S mandloi

Updated: 15 Oct 2020, 08:14 PM IST

धार. अमित एस मंडलोई, मनीष देवड़ा
जिले में खाद की किल्लत जारी है। सोसायटियों के गोदाम सिर्फ डीएपी और एनपीके से भरे पड़े है, जबकि यूरिया का इंतजार किया जा रहा है। हालात यह है कि जिन किसानों को सोसायटियों ने परमिट जारी किए है, उन्हें ही आवश्यकतानुसार पूर्ति नहीं कर पा रहे है। रबी सीजन के 13 दिन बितने के बाद यूरिया का लक्ष्य तय किया गया है। चौंकाने की बात यह है कि इस बार पिछले सभी सीजन से डेढ़ गुना अधिक यूरिया का लक्ष्य रखा है। रबी सीजन 2020-21 के लिए 79 हजार यूरिया का लक्ष्य रखा है। गुरुवार तक जिले में 6 हजार 377 मीट्रिक टन यूरिया का वितरण हो चुका है। जबकि 3 हजार 747 मीट्रिक टन का स्टॉक है। किसान बोवनी में जुटे है, करीब 50 हजार हेक्टेयर में बोवनी हो चुकी है। ऐसे हालात में अब किसान को सबसे ज्यादा यूरिया की आवश्यकता है। इस कारण किसान सोसायटी के चक्कर काटने को मजबूर है। गेहूं की बालियां आने तक दो से तीन बार यूरिया लगता है। लहसुन, प्याज और मक्का सहित अन्य फसलों के लिए भी यूरिया की आवश्यकता लगती है।

रबी में 4 लाख 5 हजार हेक्टेयर बोवनी

इस रबी सीजन में गेहूं सहित अन्य फसलों की बोवनी 4 लाख 5 हजार हेक्टेयर में की जा रही है। इसमें गेहूं का रकबा 2 लाख 80 हजार है। जबकि चने का रकबा 80 हजार है। इनके अलावा अन्य फसलें लगाई जा रही है। अब तक 50 हजार हेक्टेयर में बोवनी हो चुकी है, जबकि बोवनी जारी है। ऐसी स्थिति में खाद की किल्लत परेशानी खड़ी कर सकती है।

सोसायटी में नहीं है यूरिया

तिरला. तिरला सोसायटी में जिन किसानों को परमिट जारी किए गए है, उन्हें यूरिया का वितरण हो चुका है। अब गोदाम में यूरिया की एक भी बोरी नहीं है। तिरला सोसायटी में1 हजार 942 किसान पंजीकृत है। अब तक 3 हजार 450 बोरी यूरिया सोसायटी को मिला है। एक किसान को 10 बोरी खाद मिल रहा है, जबकि जिन किसानों की जमीन अधिक है, उन्हें खाद नहीं मिल पा रहा है। सोसायटी को फिलहाल 25 हजार बोरी खाद की जरूरत है।

जरूरत 18 बोरी की किसान को मिली सिर्फ 5 बोरी

अनारद. धार ब्लॉक के तोरनोद, बिलौदा, तीसगांव व उमरियाबड़ा में सोसायटियां है, जहां से आसपास के करीब 4 हजार किसानों को खाद बांटा जाता है। हालात यह है कि दो-तीन दिन में खाद की गाड़ी लगती है। एक बीघा पर एक बोरी खाद देने का नियम है। इसके बाद भी ब्लॉक के आधे किसानों को ही खाद उपलब्ध नहीं हो पाया है। स्थिति यह है कि एक किसान को 18 बीघा में बोवनी के बाद यूरिया की 18 बोरी की जरूरत है, लेकिन सोसायटी से किसान को मात्र 5 ही बोरी यूरिया मिला। शेष बोरियों के लिए इंतजार करने का कह दिया गया।

किसानों की जुबानी

- किसानों को परेशान होना पड़ रहा है। अगर जिम्मेदार अपनी जिम्मेदारी समझे तो किसान की दिक्कत का सामना कम करना पड़ेगा। यदि आज किसान यूरिया नहीं मिलता है तो किसान यूरिया की पूर्ति कहां से करेगा। इस कारण किसान अभी दौड़भाग कर रहा है।

राहुल ठाकुर अनारद

18 बीघा जमीन की पावती है। उस हिसाब से एक बार में 18 बोरी यूरिया की आवश्यकता है। सोसायटी से गुरुवार को 5 बोरी यूरिया और 15 बोरी डीएपी दी है। अब 5 बोरी में सिर्फ 5 बीघा में ही बोवनी करूं या जब तक आवश्यकता के हिसाब से यूरिया नहीं मिल जाता, तब तक बैठे रहूं।

गोपाल यादव

तलवाडा से बगड़ी जाना पड़ता है खाद लेने
तलवाडा में सोसायटी नहीं है। बगडी सोसायटी में खाद लेने जाना पड़ता है। यहां पर शनिवार को नंबर लगाया तो 135 वां मिला है। पांच बोरी यूरिया ही दे रहे है।
दिलीप रामकिशन, तलवाड़ा

15 दिन पहले लगाया नंबर आज मिला खाद

मैंने 15 दिन पहले बगड़ी सोसायटी में खाद का नंबर लगाया था। 15 दिन बाद गुरुवारको नंबर आया है तो यहां आया हूं। 12 बीघा खेती है मात्र पांच बोरी खाद दिया जा रहा है। अभी 40 बोरी की और जरूरत है।

गुलाब कालियादेह

मोटरसाइकिल में पेट्रोल डलवाया
घर पर कोई नहीं है। गांव से बगड़ी आने के लिए एक युवक की मोटरसाइकिल में 50 रुपए का पेट्रोल डलवाया इसके बाद यहां आ पाई हूं। आज खाद मिल रहा है।

जमनाबाई, पाटडी


यूरिया कैसे मिलेगी इस बात को लेकर हम अभी से चिंतित हैं । यूरिया के लिए नालछा सोसाइटी पर निर्भर है । वहां अभी तक नहीं आया है अब तक आए बात की कोई गारंटी नहीं है। मांडू में सोसायटी नहीं होने से नालछा जानापड़ता है।
पप्पू नानूराम मांडू

यूरिया के लिए पिछले मक्का के सीजन में भी खूब भटके । अभी भी हालात ठीक नजर नहीं आ रहे है। अगर गेहूं की फसल में यूरिया नहीं मिला तो क्या होगा यह सोच कर परेशान हैं।
शुभम यादव मांडू

सोसायटी का कहना नाम और नंबर लिख रहे है
बगड़ी में उपमहाप्रबंधक खुद स्वीकार कर रहे है कि आने वाले किसान का नाम और फोन नंबर लिख रहे है। खाद उपलब्ध होने और उसका नंबर आने पर उसे फोन करके बुला लिया जाता है। इस फंडे से भीड़ भी नहीं लग रही है।
इनती है आवश्यकता
- बिलौदा सोसायटी में 500 मीट्रिक टन यानी 10 हजार बोरी की यूरिया की आवश्यकता है।
- तोरनोद सोसायटी में 400 मीट्रिक टन यानी 8 हजार बोरी की जरूरत है।
- उमरियाबड़ा सोसायटी में 400 मीट्रिक टन यानी 8 हजार बोरी यूरिया की मांग है।
- तीसगांव में 300 मीट्रिक टन यानी ६ हजार बोरी की आवश्यकता है।
ये है विभाग का दावा
जिला सहकारी बैंक के मुख्य कार्यपालन अधिकारी का दावा है कि जिलेभर में खाद की कमी नहीं है। उन्होंने बताया कि जिले में सात डबल लाक केंद्रों पर कुल 2100 मेट्रिक टन तथा समितियों में तीन हजार 596 मेट्रिक टन का भंडारण है । किसानों को यूरिया आसानी से उपलब्ध हो रहा है।

खाद के संकट को लेकर प्रशासन के पास प्लानिंग नहीं

पहले किया निर्धारित मात्रा में खाद देने का आदेश, बाद में हल्ला मचा तो करना पड़ा निरस्त
मनावर. गोविंद सोलंकी
आगामी रबी सीजन में उर्वरक खाद की किल्लत किसानों को झेलना ना पड़े इसे लेकर जिला प्रशासन के पास कोई प्लानिंग नहीं है । इन दिनों खरीफ की कुछ फसलों के साथ ही वेजिटेबल व अन्य बागवानी फसलों को रासायनिक उर्वरकों की आवश्यकता होती है वही सर्वाधिक मांग आगामी दिनों रबी सीजन के गेहूं ,चना के लिए निकलेगी जिसमें सुपर डीएपी पोटाश यूरिया उर्वरकों की रहेगी । कृषि विभाग धार के डिप्टी डायरेक्टर ने आगामी रबी सीजन को लेकर 29 दिसंबर को एक पत्र उपायुक्त सहकारी संस्थाएं जिला धार जिला विपणन अधिकारी धार ,मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला सहकारी केंद्रीय बैंक एवं प्रबंधक एमपी एग्रो जिला धार को जारी किया है । जिसमें कहा गया है कि रबी वर्ष 2020 21 के लिए रबी फसलों के लिए उर्वरकों की अनुशंसित मात्रा अनुसार किसानों को उर्वरक प्रदाय किया जाए । जिसकी निर्देशिका इस पत्र के साथ संलग्न कर जारी की गई है जिसमें किसानों को रबी सीजन की फसलों में उर्वरक की अनुशंसित मात्रा अनुसार उर्वरक प्रति हेक्टर किलोग्राम एवं बैग में प्रदाय किए जाने के लिए आदेशित किया गया है । जिसमें रबी सीजन के लिए प्रति हेक्टर किसान को 5 बैग यूरिया प्रदाय किया जाना है । जिसमें गेहूं बुवाई के बाद प्रथम सिंचाई के समय 2 बैग यूरिया एवं द्वितीय तृतीय सिंचाई के समय तीन बैग दिया जाए तथा शेष अन्य उर्वरक खाद सुपर डीएपी पोटाश बुवाई के समय प्रदाय किया जाए एवं मक्का फसल के लिए भी प्रति हेक्टर पांच बैग यूरिया अनुशंसित है । इस तरह के आदेश जारी होने के बाद मनावर क्षेत्र की सभी सहकारी संस्थाओं के द्वारा डिप्टी डायरेक्टर धार के परिपत्र के पालन अनुसार किसानों को उर्वरक खाद प्रदाय किया जा रहा है । अभी मनावर क्षेत्र की सहकारी संस्थाओं के पास उर्वरक भंडारण हेतु गोदाम उपलब्ध है लेकिन यूरिया उर्वरक की सप्लाई संस्थाओं की मांग के अनुसार नहीं हो रही है जिससे आगामी रबी सीजन के गेहूं ,चने की बुवाई के बाद फसलों को सिंचाई के दौरान उर्वरक यूरिया की किल्लत किसानों को झेलना पड़ेगी तथा छोटे मझोले आदिवासी गरीब किसानों को उर्वरक यूरिया अधिक दाम 500 से 600 तक देकर खरीदना पड़ेगा । डायरेक्टर कृषि विभाग ने बताया कि मैंने 10 अक्टूबर को ही उर्वरक अनुशंसित मात्रा में प्रदाय किए जाने संबंधित पत्र को निरस्त कर दिया है तथा अब जितना भी उर्वरक किसान को लगे वह उतना ले सकता है।

Amit S mandloi
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