लोकार्पण के एक साल के बाद भी नहीं लग पाई कुर्सियां

लोकार्पण के एक साल के बाद भी नहीं लग पाई कुर्सियां
लोकार्पण के एक साल के बाद भी नहीं लग पाई कुर्सियां

sarvagya purohit | Updated: 14 Sep 2019, 11:07:49 AM (IST) Dhar, Dhar, Madhya Pradesh, India


लोकार्पण के एक साल के बाद भी नहीं लग पाई कुर्सियां


- ऑडिटोरियम में किराए की कुर्सियों से चलाना पड़ रहा काम
पत्रिका पड़ताल
धार.
शासकीय पीजी कॉलेज परिसर स्थित ऑडिटोरियम का लोकार्पण हुए करीब सालभर होने आ रहा है। ऐसे में यहां पर अभी तक कुर्सियों का स्थाई समाधान नहीं निकल पाया है। हालांकि कार्यक्रम में अस्थाई तौर पर कुर्सियों का इंतजाम किया गया था, लेकिन ऑडिटोरियम लगने वाली स्थाई कुर्सियां अभी शेष है। हाल ही में यदि कोई आयोजन हो तो टेंट से कुर्सियों का इंतजाम करना पड़ेगा या फिर जाजम पर ही बैठना पड़ सकता है।
शासकीय पीजी कॉलेज में ३.४६ करोड़ की लागत से बने ऑडिटोरियम का लोकार्पण हुआ।वह भी कुर्सियों के कारण अभी अधूरा सा लगता है। यहां पर कुर्सियां अभी तक नहीं लग पाई है। कॉलेज के सूत्रों का कहना है कि यहां पर कुर्सियां पीडब्ल्यूडी को लगाना है, जिसके लिए कॉलेज द्वारा पूर्व में पत्र व्यवहार भी किया जा चुका है उसके बाद भी पीडब्ल्यूडी यहां पर कुर्सियों को लगाने में किसी भी तरह की रूचि नहीं दिखा पा रहा है।
ट्रांसफार्मर नहीं लगेगा
ऑडिटोरियम में एसी लगाया गया था, लेकिन यहां पर एसी लोड नहीं ले रहे है। कॉलेज प्रशासन ने ट्रांसफार्मर लगाने की बात भी कही थी, लेकिन एमपीईबी यहां पर ट्रांसफार्मर लगाने के लिए १ से डेढ़ लाख रुपए तक का खर्चों बताया था, लेकिन प्रस्ताव यह हटा दिया गया है। वहीं कॉलेज प्रशासन भी इस मामले में एक अन्य विकल्प की तलाश में है और एमपीईबी से सुझाव मांगने की तैयारी में है। यदि एमपीईबी कोई सुझाव देता है तो कोई बीच का हल निकल जाएगी। बताया जा रहा है कि कॉलेज प्रशासन भी यहां पर किसी भी प्रकार का भार अपने ऊपर या फिर कोई ओर लेता है उसके ऊपर नहीं डालना चाहता है ताकि उसे ऑडिटोरियम के अलावा बिजली के बिल की मार झेलना पड़े। अभी ऑडिटोरियम में साउड सिस्टम, स्टेज, फ्लोरिंग जैसे कार्य हो चुके है, लेकिन कुर्सियों के चलते मामला अभी अटका पड़ा हुआ है। यदि यहां पर स्थाई कुर्सियां लग जाए तो काफी सुविधा हो जाएगी।
चुनाव प्रशिक्षण सहित अन्य कार्य हुए है
विधानसभा चुनाव हो या फिर लोकसभा चुनाव हो यहां पर सरकारी अधिकारी व कर्मचारियों को चुनावी प्रशिक्षण के बुलाया गया था। उस दौरान भी यहां पर अस्थाई कुर्सियों को लगाकर काम चलाना पड़ा था। वहीं आला-अधिकारी के साथ ही कलेक्टर भी यहां पर कुर्सियों को लगाने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखा रहे है। पूर्व में कॉलेज में हुई जनभागीदारी समिति की बैठक में कलेक्टर ने कुर्सियों लगाने के लिए कोई बीच का हल निकालने की बात कही थी, लेकिन बैठक के बाद यह कार्य ठंडे बस्ते में चला गया है और शहर का एकमात्र ऑडिटोरियम कुर्सियों के बिना अभी भी अधूरा से नजर आ रहा है।
ुपत्र लिखा है
ऑडिटोरियम में कुर्सियों लगाने के लिए हमने गत दिनों पत्र व्यवहार भी किया था, लेकिन वहां से अभी तक किसी भी प्रकार का जबाव नहीं आया।
-एचएल फुलवरे, प्रभारी प्राचार्य, शासकीय पीजी कॉलेज, धार

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