आसमान में बादल...तेज हवाओं ने बिगाड़ी मासून की चाल

Arjun Richhariya

Publish: Jun, 14 2018 11:46:22 AM (IST)

Dhar, Madhya Pradesh, India
आसमान में बादल...तेज हवाओं ने बिगाड़ी मासून की चाल

मौसम विभाग ने कहा, एक सप्ताह लेट हो सकती है बरसात

पत्रिका मानसून विश्लेषण
अतुल पोरवाल
धार.
पिछले तीन दिन से तेज हवाओं ने बारिश का गधित बिगाड़ दिया। मंबई में मानसून की दस्तक के साथ इस सप्ताह प्रदेश में मासून सक्रिय हुआ और तेज आंधी तुफान के साथ जिले में भी बारिश हुई, लेकिन तीन दिन से चल रही तेज हवाओं ने पूरा समीकरण बदल कर रख दिया। इस बीच मौसम विभाग ने मानसून की सक्रियता सोमवार के बाद का ऐलान कर दिया। पर्यावरणीय असंतुलन के कारण साल दर साल मानसून गड़बड़ा रहा है और बरसात के दिनों में कमी आती जा रही है। अत्यधिक गर्मी और बरसात पर्यावरणीय खतरे के संकेत हैं। तेजी से बढ़ते सडक़ विकास में भेंट चढ़ते पेड़ और बढ़ती वाहनों की संख्या के कारण पर्यावरण तेजी से प्रदूषित हो रहा है और मानसून की अनियमितता के कारण किसान गर्त में चला जा रहा है।
चक्रवात से बिगड़े समीकरण
मौसम विभाग के साइंटिफिक असिस्टेंट प्रदीप कुमार गुप्ता के अनुसार 1 जून से 30 सितंबर तक मासून का सीजन मानता है, जबकि इसकी सक्रियता अरेबियन महासागर से उठने के बाद मानी जाती है। सेवा निवृत्त असिस्टेंट मेट्रोलॉजिस्ट प्रमोद दुबे के अनुसार इस सप्ताह मानसून की सक्रियता नजर आई थी, लेकिन अरेबियन महासागर से सिस्टम बिगडऩे के कारण देरी हो सकती है। हवाओं के बारे में वे बताते हैं कि बंगाल की खाड़ी में आए छोटे चक्रवात के कारण तेज हवाएं शुरू हो गई है। अब मानसून का दबाव शनिवार से शुरू होगा, जो सोमवार या उसके बाद पूरी तरह सक्रिय हो जाएगा।
अधिकतम 45 दिन
धार कृषि वैज्ञानिक केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक कमल किराड़ के अनुसार जुलाई से सितंबर तक रैनी सीजन रहता है, लेकिन बरसात वाले दिन अधिकतम 45 होते हैं। हालांकि पिछले कुछ वर्षों में पर्यावरणीय संतुलन बिगडऩे से बरसात के दिनों में कमी आई है। वर्ष 1990 से 2009 के बीच सबसे अधिक बरसात के 59 दिन वर्ष 2003 में दर्ज किए गए थे, जबकि सबसे कम 31 दिन वर्ष 2009 में दर्ज किए गए। बता रहे हैं कि इसके बाद से बरसात के दिनों में लगातार कमी आ रही है। पिछले वर्ष मानसून के सीजन में बरसात के केवल 27 दिन दर्ज किए गए, जो पर्यावरणीय खतरे की ओर ईशारा कर रहे हैं।
यूं आता है मानसून
दक्षिण पश्चिमी मानसून भारत के ठेठ दक्षिणी हिस्से में 1 जून को पहुंच जाता है। आमतौर पर मानसून केरल के तटों से उत्तर की ओर बढ़ता है और देश के अधिकांश हिस्सों में जून के आखिर तक पूरी तरह छा जाता है। अरब सागर से आनी वाली हवाएं उत्तर की ओर बढ़ते हुए 10 जून तक मुंबई पहुंचती हैं। मुंबई से तरुअनंतपुरम का सफर 10 दिन में तेजी के साथ पूरा करने वाला मानसून मध्यप्रदेश में लगभग 15 जून से सक्रिय हो जाता है।
यूं रहा पिछले सप्ताह तापमान(डिग्री सेल्सियस)
दिनांक अधिकतम न्यूनतम
7 जून 41.0 डिसे 25.0 डिसे
8 जून 41.1 डिसे 25.2 डिसे
9 जून 40.4 डिसे 25.3 डिसे
10 जून 37.7 डिसे 24.8 डिसे
11 जून 37.0 डिसे 25.0 डिसे
12 जून 38.0 डिसे 24.0 डिसे
13 जून 36.7 डिसे 24.4 डिसे
ये है पिछले तीन वर्षों की बारिश
वर्ष कुल बारिश
2015 1107.2 मिमि
2016 0889.4 मिमि
2017 0839.6 मिमि

डाउनलोड करें पत्रिका मोबाइल Android App: https://goo.gl/jVBuzO | iOS App : https://goo.gl/Fh6jyB

Ad Block is Banned