ऐसे हालात में महाराष्ट्र में नहीं रहना चाहते, घर की रूखी-सूखी खा लेंगे

फिर शुरू हुआ पलायन का सिलसिला, गत वर्ष जैसा दु:ख नहीं उठाना चाहते

By: shyam awasthi

Published: 11 Apr 2021, 12:21 AM IST

विकास पटेल, मुकेश सोडानी
धामनोद/धारफाटा. महाराष्ट्र में लॉकडाउन लगने से फिर वहां रहने वाले लोग अपने घरों की ओर लौट रहे है। गत वर्ष महाराष्ट्र से उत्तर की ओर जाने वाले हजारों मुसाफिर और उनकी तकलीफें किसी से छुपी नहीं थीं। मदद के लिए हाथ भी उठे रास्ते में समाजसेवियों ने भोजन भी करवाया स्थिति सामान्य हुई फिर लोग वापस महाराष्ट्र काम पर गए, लेकिन अब विगत तीन दिन से देखा जा रहा है कि पलायन करने वाले लोग फिर अपने वाहनों से उत्तर की ओर निकल रहे हैं पलायन करने वाले उत्तर निवासी संजय द्विवेदी ,विनय शर्मा ,गोविंद बर्मन ने बताया कि गत वर्ष की लॉक डाउन की तकलीफ भूल नहीं सकते हम घर की अब रूखी सूखी खा लेंगे। लेकिन महाराष्ट्र में फंसे रहना नहीं चाहते स्थिति सामान्य होगी तो फिर देखेंगे अभी तो हम अपने गांव जा रहे है।
इस बार तो होटलों पर भोजन मिल रहा है: गुजरने वाले लोगों ने बताया कि इस बार तो होटलों पर भोजन मिल रहा है, लेकिन कब क्या हो जाए कुछ कह नहीं सकते अपना सामान खाने-पीने की चीजें घर से ही बना कर निकले जो जरूरत का सामान था। वह भी साथ में ले आए बाकी घर का सामान जहां पर हम रहते थे उन्हीं शहरों में छोडक़र आए हैं। गत वर्ष की अपेक्षा इस बार जाने वाले लोगो की संख्या कम है लेकिन पिछले दो दिनों से यह क्रम बढ़ रहा है।
जिसके पास जो वाहन है उसी से चल दिए
बताया कि गत वर्ष तो घर जाने के सभी मिलकर वाहन किराए का करते थे। एक एक व्यक्ति का 5000 से ऊपर का घर तक पहुंचने में खर्च आया। इस बार समय से ही घर के लिए कूच कर रहे हैं, जिसके पास जो साधन है उसी से गुजर रहे हैं। शुक्रवार को दो पहिया वाहन चालक भी को पलायन करते हुए देखा गया। अधिकतम महाराष्ट्र की ओर से आने वाले टेम्पो चालक जो अप्रैल में बेहिसाब संख्या में उत्तर की ओर जाते देखे गए थे। फिर ठीक तीन माह जून ,जुलाई में बाद वही टेम्पो वाले महाराष्ट्र और फिर काम पर जाते दिखे अब उत्तर की ओर पलायन कर रहे हैं।
हालात सामान्य होंगे तभी आएंगे
राजकुमार मिश्रा ने बताया कि अब इस बार जल्दबाजी नहीं करेंगे गत वर्ष जिस शहर में हम काम करते थे। उन कंपनी वालों ने हमें दबाव बनाया बोला करोना खत्म हो गया। अब आ जाओ बड़ी हिम्मत करके हम लोग पुन: काम पर आए सोचा नहीं था कि आठ महीने भी नहीं बीतेंगे और स्थिति फिर वही भयावह रूप लेगी घर में खेती-बाड़ी है जो मिलेगा रुखा-सूखा लेंगे लेकिन इस बार लौटने की जल्दबाजी नहीं करेंगे। यह कहते हुए पलायन करने वाले लोग भावुक हो गए।

shyam awasthi
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