पाबंदी 28 लाख की, रेट हर वस्तु के बढ़े

पाबंदी 28 लाख की, रेट हर वस्तु के बढ़े

Amit Mandloi | Publish: Oct, 14 2018 01:03:00 AM (IST) Dhar, Madhya Pradesh, India

आयोग ने तय की कीमत
पिछले चुनाव से ज्यादा प्रचार सामग्री के दाम

धार. महंगाई के हिसाब से चुनाव आयोग ने माननीय के खर्च करने की रकम तो बढ़ाई, लेकिन इन्हें 28 लाख रुपए पर पाबंद कर दिया। पिछले चुनाव में यह रकम 20 लाख रुपए थी। हालांकि चुनाव में जो राशि खर्च होती है वह इससे कई गुना अधिक होती है, लेकिन इस बार आयोग ने पुख्ता इंतजाम किए हैं, जिससे खर्च के ब्यौरे पर हर स्तर से पैनी नजर रखी जा सकेगी। इधर खर्च करने की सीमा बढ़ाई तो आयोग ने प्रचार, प्रसार व सभा में इस्तेमाल की जाने वाली सामग्री के दाम भी बढ़ा दिए, जिससे दावेदारों की मुसीबतें बढ़ गई है।
दोनों दल को आपत्ति : आयोग द्वारा तय की गई नई दरों को लेकर दोनों प्रमुख दलों ने आपत्ति ली है। हालांकि सभी वस्तुओं की दर विधानसभा वार अलग-अलग है और सभी विधानसभा क्षेत्र के प्रमुख राजनीतिक दलों को सौंपा गया, लेकिन धार को छोड़ कहीं कोई आपत्ति नहीं है। धार में कांग्रेस व भाजपा ने नई दर सूची पर आपत्ति जताई। सूची के अनुसार कई ऐसी वस्तुएं हैं, जिनमें पिछले चुनाव से ४ गुना तक बढ़ोतरी की गई है।
बैंक की गाडिय़ों पर भी रहेगी नजर : आयोग सूत्रों की मानें तो एक टीम विशेष रूप से केवल इसलिए बनाई गई है कि वह पूरे जिले में बैंक का कैश ट्रांजिट करने वाली गाडिय़ों पर नजर रख सके। इन गाडिय़ों की जांच के दौरान उसमें परिवहन किए जा रहे कैश व उसके दस्तावेज का मिलान किया जाएगा। इसके अलावा इन गाडिय़ों पर चलने वाले स्टॉफ के परिचय पत्र भी जांचे जाएंगे, जिससे चुनाव में किसी तरह की गड़बड़ी ना हो सके। दरअसल आयोग को शंका है कि बैंक गाडिय़ों के नाम पर उम्मीदवार नकदी की हेरफेर कर सकते हैं। इसलिए यह पुख्ता इंतजाम किया जा रहा है।
जनसंख्या से तय किए रेट : जिले में कुल 7 विधानसभा है, जिन सभी के लिए सामग्री की दरें अलग-अलग है। सबसे अधिक दरें धार विधानसभा के लिए तय की गई, जबकि सबसे कम गंधवानी की बताई जा रही है। हालांकि सभी रेट विधानसभा क्षेत्र की जनसंख्या के लिहाज से तय किए गए हैं, लेकिन प्रतिस्पर्धा में मोलभाव का ध्यान नहीं रख गया। दरअसल, बड़े शहर में एक ही सामग्री की कई दुकानें हो सकती है, जिनकी आपसी प्रतिस्पर्धा में उम्मीदवार अच्छा-खासा मोलभाव कर सकते हैं।
भारी पड़ेंगी भाड़े की गाडिय़ां
पेट्रोल, डीजल का दाम बढऩे से इस चुनाव में लगने वाली भाड़े की गाडिय़ों की दरें भी महंगाई के मान से तय की गई है। पिछले चुनाव से बढ़ी हुई दरों के कारण उम्मीदवारों को खर्च का हिसाब देना महंगा पड़ेगा। क्योंकि प्रचार-प्रसार में अधिकांश गाडिय़ां भाड़े पर ली जाती हैं।

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