सड़क से लेकर विधानसभा तक लड़ी जाएगी डूब प्रभाावितों की लड़ाई-कांग्रेस

सड़क से लेकर विधानसभा तक लड़ी जाएगी डूब प्रभाावितों की लड़ाई-कांग्रेस
Dhar

Amit Mandloi | Publish: Jun, 24 2017 11:19:00 PM (IST) Dhar

-विधानसभा नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष पहुंचे डूब प्रभावितों के बीच, केंद्रीय नेताओं को देंगे डूब प्रभावितों की जानकारी, लोकसभा में उठेगा मुद्दा, बांध के गेट लगाने के विरोध में होगा बड़ा आंदोलन

Dhar. घाटी के डूब विस्थापितों के लिए संघर्ष कर रहे नर्मदा बचाओ आंदोलन के साथ अब कांग्रेस पार्टी भी समर्थन में आ गई है। नबआं के साथ कांग्रेस डूब प्रभावितों की लड़ाई सड़क से लेकर विधानसभा, राज्यसभा और लोकसभा में भी लड़ेगी।

शनिवार को कुक्षी तहसील में विधानसभा नेता प्रतिपक्ष, कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष और विधायक दल सदस्यों ने डूब प्रभावित क्षेत्रों का जायजा लिया। शाम को राजघाट पुल पार चिखल्दा में आमसभा में नबआं के साथ कांग्रेस ने डूब प्रभावितों की लड़ाई लडऩे का ऐलान किया।
शाम 6 बजे चिखल्दा पहुंचे कांग्रेस जनप्रतिनिधियों ने डूब प्रभावितों की आमसभा को संबोधित किया। विधानसभा नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि कांग्रेस आपके साथ है। डूब प्रभावितों के साथ हो रहे अन्याय को विधानसभा, लोकसभा में उठाया जाएगा। विस्थापितों को उनका हक दिलाने के लिए संघर्ष किया जाएगा। हमारी सरकार संवाद करती थी, लेकिन ये सरकार तो संवाद करना भी पसंद नहीं कर रही है। वहीं, कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष अरुण यादव ने कहा नबआं के 32 वर्षों के संघर्ष को हम सलाम करते हैं। बांध विस्थापितों से चर्चा की है। सरकार झूठे वचन पत्र भराकर विस्थापितों को भ्रमित कर रही हैं। गुजरात में विधानसभा चुनाव है, जिसके लिए बांध के गेट लगाकर उद्योगपतियों को उपकृत किया जा रहा है, ताकि चुनाव जीता जा सकें। कांग्रेस इनके मनसूबे कभी कामयाब नहीं होने देगी। डूब प्रभावितों को उनका हक दिलाया जाएगा।

नबआं के बैनर तले होगा संघर्ष
कसरावद विधायक सचिन यादव ने कहा मेरी विधानसभा का क्षेत्र भी डूब में आ रहा है। हम डूब प्रभावितों की लड़ाई अंतिम क्षण तक लड़ेंगे। कुक्षी विधायक सुरेंद्रसिंह बघेल हनी ने कहा कि अब लड़ाई नर्मदा बचाओ आंदोलन के बैनर तले होगी। बड़वानी विधायक रमेश पटेल ने भी डूब प्रभावितों के हक में आवाज उठाने की बात कही। साथ ही पूर्व सांसद धार गजेंद्रसिंह राजूखेड़ी, पूर्व विधायक जोबट ने भी डूब प्रभावितों को संबोधित किया। वहीं, नबआं के साथ गेट लगाने के विरोध में आगामी दिनों में बड़ा आंदोलन भी डूब प्रभावित क्षेत्र में करने की बात कही।

बॉक्स न्यूज...
दिल्ली में घेरा सामाजिक न्याय मंत्री को

शुक्रवार को डूब प्रभावितों के पुनर्वास संबंधित चर्चा के लिए नबआं के समर्थक दलों ने केंद्रीय सामाजिक मंत्री थावरचंद गेहलोत से चर्चा की। दल में नबआं नेत्री मेधा पाटकर के साथ विमलभाई, सौम्या दत्ता, हिमशीसिंह, अंकिता अग्रवाल मौजूद थे। बैठक में नबआं समर्थकों ने सामाजिक न्याय मंत्री को सवालों के घेरे में लिया। बैठक में गेट बंद करने का निर्णय कैसे हुआ। किस आधार पर इसका प्रभाव कहां व कितना होगा, क्या वहां निवास करने वालों की संख्या आप जानते हैं। सरीखे सवाल मंत्री के सामने रखे गए। मंत्री को खुला पत्र भी सौंपा गया।
बड़वानी में सभी से की थी बात

केंद्रीय मंत्री गेहलोत ने अनजान बनते हुए कहा कि बड़वानी डूब क्षेत्र से आकर मैंने सभी से बात की। प्रधानमंत्री कार्यालय से काम देखने वाली संयुक्त सचिव से भी जानकारी ली हैं। मेरी जानकारी है कि सबको सब कुछ दिया गया है। बस 300-400 लोग बचे हैं। इन्होंने स्वयं अपना लाभ नहीं स्वीकारा है। समर्थकों द्वारा सवालों का सिलसिला जारी रहा। नबआं के आग्रह पर बुलाई गई सचिव लता कृष्णराव भी बैठक में आईं। सचिव का भी कहना था कि सबका पुनर्वास हो गया हैं, पेड़ भी काटे जा चुके हैं। इस पर नबआं समर्थकों ने बताया कि धार कलेक्टर ने 76 गांवों के 6132 परिवार, बड़वानी के 57 गांवों के 8250 परिवार हटने या हटाने को कहा है। लाखों लोग हजारों परिवार का विस्थापन बाकी हैं। आठ गांवों में 25000 मवेशी और 28500 पेड़ हैं। सचिव द्वारा बार-बार टोकने पर नबआं नेत्री गुस्सा होकर बैठक से बाहर आ गईं। दिल्ली में हुई बैठक बेनतीजा रही। नबआं समर्थकों ने कहा अब पानी ही डूब प्रभावितों का भविष्य तय करेगा। लोग डूबेंगे, लेकिन बिना अपने अधिकार के नहीं हटेंगे।

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