कुपोषण से कैसे लड़ेगी मां, जब अस्पताल खुद खा रहा बादाम के लड्डू

कुपोषण से कैसे लड़ेगी मां, जब अस्पताल खुद खा रहा बादाम के लड्डू
Dhar

Amit Mandloi | Updated: 16 Jun 2017, 11:11:00 PM (IST) Dhar

प्रसुताओं को नहीं मिल रहे लड्डू, जिले का पीछा नहीं छोड़ रहा कुपोषण का दंश, 9 बच्चे बाल कुपोषित वार्ड में भर्ती- कुपोषण रोकने चल रही करोड़ों की योजनाएं, एक और शुरू करने की तैयारी

धार। शासन द्वारा जिला अस्पताल में भर्ती प्रसुताओं को पोषक तत्वों से निर्मिल लड्डू देने के निर्देश जारी किए गए हैं। लगभग हर जिले में प्रसुताओं को पोषक तत्वों से निर्मित लड्डू वितरित किए जा रहे हैं, लेकिन जिला अस्पताल में भर्ती प्रसुताओं को काफी समय से लड्डू वितरित नहीं किए जा रहे। प्रसूति वार्ड में 14 जून से भर्ती प्रसूता रीना औंकार ने बताया कि सुबह नाश्ते में उन्हें लड्डू नहीं दिए जाते। कभी दूध-केला तो कभी बिस्कुट-दूध दिया जाता है। 8 दिन से भर्ती शबनम ने बताया कि वह महेश्वर से यहां प्रसूति करवाने आई है। महेश्वर अस्पताल में प्रसुताओं को लड्डू दिए जाते हैं, लेकिन यहां नहीं दे रहे। धारलीबाई व आरती तीन दिन से भर्ती है, उसे भी नाश्ते में आज तक लड्डू नहीं मिला। प्रसूति के दौरान आने वाली कमजोरी को दूर करने प्रसुताओं को लड्डू मिलना आवश्यक है, जिससे उसके स्वस्थ रहने पर बच्चा भी स्वस्थ रहता है। मां कमजोर होती है, ऐसे में बच्चा भी कमजोर रहता है। समय पर ध्यान नहीं देने पर मां-बच्चा दोनों कुपोषण का शिकार हो जाते हैं।

एनआरसी में 9 कुपोषित

एक ओर सरकार जिले से कुपोषण का खात्मा करने कुपोषण, सुपोषण, मध्याह्न भोजन योजना, पोषित दूध बांटने से लेकर विभिन्न योजनाओं का संचालन कर रही है। लेकिन धरातल पर इसका असर देखने को नहीं मिल रहा। जिसका उदाहरण देखा जा सकता है जिला अस्पताल के बाल शक्ति वार्ड में। यहां वर्तमान में कुपोषण का शिकार 9 बच्चे राजपाल, हर्ष, पारस, सजन, संध्या, कलावती, राजपाल, वंशिका व लक्ष्मी भर्ती हैं। इन्हें पहली बार यहां भर्ती किया गया। शासन द्वारा कुपोषित बच्चे को कम से कम 14 दिन और बच्चा अति कुपोषित हो तो उसे 20 दिन भर्ती किया जाता है। इस दौरान बच्चे की माता को भोजन के साथ ही प्रतिदिन 120 रुपए मजदूरी के मान से तथा सौ रुपए डीए दिया जाता है। यानी एक महिला के ऊपर 14 दिन में 1780 रुपया खर्च किया जा रहा है। उसके बाद भी अधिकांश बच्चों की हालत में सुधार नहीं हो रहा। यहां से बच्चे कुछ ठीक होकर जाते हैं, बाद में उनकी दशा फिर खराब हो जाती है। स्कूलों में बच्चों को विभिन्न पोषक तत्वों से बने दूध पावडर का दूध बनाकर दिया जा रहा है। जिसमें प्रतिमाह लाखों रुपया खर्च हो रहा है, कई-कई दिन बच्चे पोषण दूध से वंचित रहते हैं। यही स्थिति मध्याह्न भोजन योजना की है। कहीं पर मध्याह्न भोजन के नाम पर रोटी तो कहीं पनीली दाल खिलाई जा रही है। रोटी भी एक-एक ही दी जाती है, जिससे बच्चों को पेट नहीं भर पाता। हाल ही में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग द्वारा चिन्हित विकासखंडों में मध्याह्न भोजन कार्यक्रम अंतर्गत प्राथमिक शालाओं को अतिरिक्त न्यूट्रिएंट के रूप में गुड़-मूंगफली से निर्मित चिक्की निर्माण व प्रदाय करने के निर्देश दिए गए हैं। इनमें जनपद पंचायत तिरला, डही व गंधवानी शामिल हैं। विद्यार्थियों को अतिरिक्त न्यूट्रिएंट के रूप में गुड़-मूंगफली से निर्मित चिक्की निर्माण व प्रदाय करने के संबंध में एसआरएलएम द्वारा गठित व संचालित स्व सहायता समूहों के माध्यम से विद्यार्थियों को अतिरिक्त पोषण के रूप में गुड़ व मूंगफली से निर्मित चिक्की 8 0 रुपए प्रतिकिलो की दर से प्रदाय करना होगी। जो लक्षित दिवस में अधिकतम 120 दिवस प्रदाय किया जाना है। इसी क्रम में विद्यार्थियों को सप्ताह में 3 दिवस मंगलवार, गुरुवार व शनिवार चिक्की नवीन शैक्षणिक सत्र में प्रदाय करने के लिए समस्त आवश्यक तैयारियां करने के लिए निर्देशित किया है। पूर्व संचालित योजनाओं को ठीक से क्रियान्वयन नहीं हो पा रहा, जिनकी व्यवस्था सुधारने की बजाय एक अन्य योजना इसमें शामिल कर दी गई।

कल से देंगे

प्रसूताओं को कल से लड्डू मिलेंगे। हमने आज ही लड्डू देने के आदेश दिए हैं।
डॉ. एसके खरे, सिविल सर्जन

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