उपकरण एवं मेन पॉवर के अभाव में सेमी होकर रह जाएगा आइसीयू

सरकारी अस्पताल : वेंटिलेटर, सोनोग्राफी, डिजिटल एक्सरे, सीटी स्कैन नहीं है

विशेषज्ञ, चिकित्सक एवं ट्रेंड स्टॉफ भी नहीं

By: shyam awasthi

Published: 07 Apr 2021, 01:08 AM IST

राजेंद्र धोका
बदनावर. सरकारी अस्पताल में आइसीयू बनकर तैयार हो गया है, लेकिन एचआर एवं आवश्क उपकरणों के अभाव में इससे बेहतर सेवा मिलने की बात बेमानी नजर आ रही है। यदि आइसीयू को शुरू भी किया जाता है तो आवश्यक उपकरणों के अभाव में आपात हालात में मरीजों का उपचार नहीं हो पाएगा। प्राथमिक उपचार के बाद रेफर करना ही पड़ेगा जो अभी भी बगैर आइसीयू के किया जा रहा है। ऐसे हालाते में यहां बनाया गया आइसीयू सेमी होकर रह जाएगा। आइसीयू के लिए वेंटिलेटर, सोनोग्राफी, डिजिटल एक्सरे, सीटी स्कैन जैसे उपकरण आवश्यक है। वहीं विशेषज्ञ चिकित्सक एवं ट्रेंड स्टॉफ की भी पदस्थापना नहीं है।
कोविड मरीजों के लिए भी अनुपयोगी :आइसीयू को कोविड मरीजों के लिए चिह्नित किया गया था। लेकिन अस्पताल में एक ही प्रवेश द्वारा एवं फिलहाल पुरूष मरीजों को बरामदे में ही इलाज किए जाने के कारण आइसीयू का उपयोग कोविड मरीजों को भर्ती किए जाने के लिए भी उपयोगी नहीं है।
बरामदे में हो रहा मरीजों का इलाज
पूर्व में जहां मेल वार्ड था, वहां आइसीयू बनने के कारण इस वार्ड के लोगों का इलाज बरामदे में ही पलंग डालकर किया जा रहा है। पलंग भी काफी नजदीक लगाए है और सेनेटाइजर आदि की भी व्यवस्था नहीं है। मरीजों के परिजन भी पलंग पर बैठ जाते है। पीछे ही लेबोरेटरी है, जहां अनेक जांचें होती हैं। गर्भवतियों के संक्रमित होने का डर बना रहता है। टीकाकरण भी यहीं होता है। संक्रमण फैलने का डर बना रहता है।
नहीं बना रैन बसेरा
लगभग ढाई साल पहले अस्पताल भवन के पास रेन बसेरा बनाने की तैयारी शुरू की थी। इसके चलते बीच में आने वाली बिजली डीपी को ताबड़तोड़ हटाया भी गया था। रेन बसेरा बन जाने से मरीजों के परिजन को काफी राहत मिल सकती है। लेकिन अज्ञात कारणों से रेन बसेरा निर्माण को लेकर फाइल ठंडेबस्ते में चली गई।
बैग के अभाव में ब्लड ट्रांसमिशन नहीं
सरकारी अस्पताल में रक्त संग्रहण सेंटर है। पूर्व में अनेक बार मरीजों को रक्त भी देने की सुविधा यहां लोगों को मिल रही थी, लेकिन लंबे समय से रक्त एकत्रित करने की थैलियां नहीं होने से लोगों को परेशान होना पड़ रहा है। रक्त के क्रास मैचिंग की भी सुविधा नहीं होने से निजी सेंटरों पर लोगों को जाना पड़ रहा है।
एंटीरैबिज भी नहीं
सरकारी अस्पताल में काफी समय से एंटी रेबिज इंजेक्शन नहीं है। आवारा कुत्तों एवं जंगली जानवरों द्वारा लोगों को काट लेने पर इंजेक्शन बाहर से खरीदना पड़ रहा है। लोगों का कहना है कि भीषण गर्मी के चलते स्वान एवं बंदर आदि जानवर चिड़चिड़े हो जाते हैं। ऐसे में पास से गुजर रहे लोगों को काट लेने की शिकायतें रहती है।

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