scriptIn the pitching of the pond, instead of black stone, put green stones | तालाब की पिचिंग में काले पत्थर की बजाय लगाए मुरम के हरे पत्थर | Patrika News

तालाब की पिचिंग में काले पत्थर की बजाय लगाए मुरम के हरे पत्थर

मनरेगा में धांधली :
- 42 लाख रुपए के तालाब में दो माह भी नहीं टिक रहा तालाब में पानी
- आरईएस धार द्वारा किया था निर्माण, आरटीआई कार्यकर्ता ने किया तालाब निर्माण में अनियमितता का खुलासा

धार

Published: June 27, 2022 07:39:14 pm

धार.
सरदारपुर विकासखंड के ग्राम सिंदुरिया में बारामासी वाला नाले पर तालाब का निर्माण किया गया। तालाब में पिचिंग निर्माण में अनियमितता की गई। काले ठोस पत्थरों की जगह मुरम के हरे पत्थर से तालाब की पिचिंग कर दी। इस कारण बारिश का पानी तालाब में नहीं रूक रहा है। बारिश खत्म होते ही तालाब भी सूख जाता है। पिचिंग में जो पत्थर लगाए गए थे, वह पानी के कारण गल गए। पिचिंग वाले हिस्से में मिट्टी साफ तौर पर देखी जा सकती है। इसके बाद भी तालाब का पूरा भुगतान कर दिया गया।
तालाब की पिचिंग में काले पत्थर की बजाय लगाए मुरम के हरे पत्थर
तालाब की पिचिंग में काले पत्थर की बजाय लगाए मुरम के हरे पत्थर
आरटीआई कार्यकर्ता सुनील सावंत ने सोमवार को पत्रकार वार्ता में यह जानकारी मीडिया को दी। सावंत ने बताया कि तालाब निर्माण में अनियमितता की गई। साथ ही शिकायत के बाद भी फर्जी भुगतान किया गया है। आरईएस धार के ईई संजय सोलंकी व एई अरविंद पाटीदार ने शिकायत के बाद भी वर्ष-२०२१ में बारामासी सिंदुरिया तालाब का १२ लाख रुपए का भुगतान कर दिया।
वर्ष-2020 में की थी शिकायत

आरटीआई कार्यकर्ता सावंत ने बताया कि वर्ष-२०१९-२० में तालाब निर्माण स्वीकृत कर काम किया गया था। इसकी लागत ४९.७४ लाख रुपए है। तालाब के निर्माण के बाद हरे पत्थर यानी कच्ची मुरम से पिचिंग कर दी गई। इस कारण तालाब में पानी ठहरने की बजाय दो माह में ही खाली हो जाता है। इतनी बड़ी रकम खर्च करने के बाद भी ग्रामीणों को इसका फायदा नहीं मिला। इसकी शिकायत वर्ष-२०२० में जिपं सीईओ संतोष वर्मा को की गई थी। इस पर सीईओ वर्मा ने भुगतान पर रोक लगाकर पिचिंग सुधारने के लिए कहा था।
सुधार की बजाय कर दिया भुगतान

इसके बाद अधिकारियों की मिलीभगत से मामले को दबा दिया गया। वर्ष-२०२१ में पिचिंग सुधारने के बजाय बकाया १२ लाख रुपए का भुगतान कर दिया गया। आरटीआई कार्यकर्ता सावंत ने बताया कि अधिकारियों की मिलीभगत के कारण तालाब का अधिकांश भुगतान हो चुका है। लेकिन सुधार नहीं हो पाया। अब ईई सोलंकी भुगतान नहीं होने की बात कहकर सुधार में देरी की बात कह रहे है। इधर इस संबंध में आरईएस ईई सोलंकी से चर्चा करना चाही, लेकिन लगातार संपर्क के बाद भी उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया।

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