संक्रमण से बचाने वाली पीपीई किट बनी आफत, लगातार इस्तेमाल से हो रही घबराहट

किट पहनने के बाद पानी भी नहीं पी सकते इसलिए हो रहे डिहाईड्रेशन का शिकार
- बचाव के तरीकों पर ध्यान देने की जरूरत - ईएमटी ऑफिसर की मौत की जांच करेगी कमेटी - स्क्रीनिंग के दौरान घबराहट और चक्कर आने पर बेहोश हुए चिकित्सक

By: Amit S mandloi

Published: 10 May 2020, 10:12 AM IST

धार.
कोरोना वायरस संक्रमण के कारण जहां जिलेभर में डॉक्टर, पैरामेडिकल स्टॉफ और मैदानी कर्मचारी संक्रमण से लोगों को बचाने के लिए डटे हुए है। उन्हें अब इस गर्मी के कारण संक्रमण से खुद को सुरक्षित रखने वाले संसाधन से भी दो-चार होना पड़ रहा है। पर्सनल प्रोटेक्शन इक्वीपमेंट यानी पीपीई किट पहनकर लगातार कई घंटों काम करने से डिहाईड्रेशन की शिकायत हो रही है। किट पहनने के बाद डॉक्टर और स्टॉफ पानी तक नहीं पी सकते है। बगैर पानी के काम करने से दिक्कत हो रही है।
धार जिले का आधा हिस्सा निमाड़ में लगता है। इस कारण कुक्षी के आसपास के इलाकों में गर्मी अधिक रहती है। शुक्रवार को जब बाग से 108-एम्बुलेंस लेकर निकले कबरसिंह चौहान(29) भी डेहरी से जब मरीज को लेने पहुंचे तो पहले खुद की सुरक्षा के लिए पीपीई किट पहनी। इसके बाद मरीज को एम्बुलेंस में लेकर साथी वाहन चालक के साथ धार के लिए रवाना हो गए।

केशवी घाट में नहीं पिया पानी

एम्बुलेंस में ईएमटी ऑफिसर कबरसिंह के साथ वाहन चालक रोहित हम्मड़ भी था। रोहित और कबरसिंह तीन साल से साथ में काम कर रहे है। रोहित ने बताया कि कबरसिंह जैसा ईएमटी ऑफिसर पूरे जिले में नहीं है। ड्यूटी के प्रति हमेशा तत्पर रहते थे। कितना भी गुस्सा हो लेकिन कभी किसी को जाहिर नहीं करते। कबर सिंह और रोहित शुक्रवार को डेहरी से एक संदिग्ध मरीज को लेकर निकले थे। निकलने से पहले दोनों ने किट पहनी। करीब 30 किमी एम्बुलेंस चलाने के बाद केशवी घाट में एक हैंडपंप पर रोहित ने गाड़ी रोकी। रोहित ने बताया कि यहां पर मैंने पानी की बोतल भरी। हैंडपंप कबरसिंह ने ही चलाया। मैंने उन्हें कहा भी कि पानी पी लीजिए, पर कबरसिंह ने सिर्फ इतना पूछा कि धार कब तक पहुंच जाएंगे। इस पर रोहित ने कहा कि एक घंटे में धार पहुंच जाएंगे। इसके दोनों रवाना हो गए।

दस किमी आगे गए और होने लगी उल्टियां

रोहित ने बताया कि हैंडपंप से पानी भरकर करीब10 किमी आगे गए ही थे कि कबरसिंह को घबराहट होने लगी। हाथ-पैर धुजने लगे। सीट से फिसल रहे थे। बॉडी पर कंट्रोल नहीं था। गाड़ी रोकी और पूछा लेकिन कोई जवाब नहीं दिया। कुछ ही देर में कबरसिंह ने दो-तीन उल्टियां की। इसके बाद बेहोश हो गए। उनकी हालात गंभीर देखकर सीधे धार जिला अस्पताल पहुंचा। यहां हम चार लोगों ने पकडक़र बोतल चढ़ाई। इसके बाद इंदौर रेफर कर दिया। इंदौर के बांबे हॉस्पिटल में कबर सिंह चौहान ने शनिवार को इलाज के दौरान दम तोड़ दिया।

नीट की तैयारी कर रहा था कबर

कबरसिंह के भतीजे महेश ने बताया कि कबरसिंह नीट की तैयारी कर रहे थे। भोपाल में कोचिंग के जरीए पढ़ाई करते थे। पहले कुछ बनना चाहते थे, इसलिए उन्होंने अभी तक शादी नहीं की थी। दो भाई मुकेश और प्रेमसिंह में सबसे छोटे कबर थे। उनके जाने से पूरा परिवार गमगीन है। गांव में शनिवार को कबरसिंह का अंतिम संस्कार किया गया।

स्क्रीनिंग करते-करते बेहोश हुए डॉक्टर

इसी तरह का मामला शनिवार को भी देखने को मिला। कलेक्ट्रेट में रतलाम से धार लौटे मजदूरों की स्क्रीनिंग के लिए रैपिड रिस्पांस टीम पहुंची थी। टीम में शामिल चिकित्सक डॉ. संदीप चौधरी पीपीई किट पहनकर लोगों की स्क्रीनिंग कर रहे थे। तभी घटबराहट और चक्कर की शिकायत करते हुए बेहोश हो गए। साथियों और मौके पर मौजूद पत्रिका के फोटो जर्नलिस्ट संदीप सोनगरा ने डॉ. चौधरी को संभाला। डॉ. चौधरी को पेड़ के नीचे लेटाकर एक कार सवार से पानी मांगा और डॉ. चौधरी को दिया। कुछ देर आराम करने के बाद डॉ. चौधरी नार्मल हुए। उन्होंने बताया कि सुबह से किट पहनी हुई है। इस कारण पानी नहीं पी पाया था। जिससे घबराहट और चक्कर आ रहे थे। अब ठीक लग रहा है।

एम्बुलेंस और टीम के वाहनों में रखवाएंगे पानी

इसके बाद जिला महामारी नियंत्रण अधिकारी डॉ. संजय भंडारी ने कहा कि सभी वाहनों में पानी की व्यवस्था करवाई जाएगी। सभी को पानी की कैन रखने के लिए कहा जा रहा है। ग्लूकोज का भी इस्तेमाल करें, ताकि डिहाईड्रेशन से बचा जा सके। किट पहनना भी जरूरी है इसलिए बचाव के तरीकों का ध्यान रखना होगा।

- कबरसिंह की मौत की जांच के लिए कमेटी बनाई गई है। बांबे हॉस्पिटल से भी रिपोर्ट मांगी है। किट पहने हुए थे, आशंका है डिहाईड्रेशन हो सकता है। सैंपलिंग भी करवाई है। परिवार को सहायता के लिए प्रस्ताव शासन को भेजा है।
डॉ. आरसी पनिका, सीएमएचओ, धार

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