सब्जियों की लागत भी नहीं निकाल पा रहे किसान

पत्ता गोभी पशुओं को खिलाने पर विवश, किसान हुए नाराज

By: amit mandloi

Published: 18 Dec 2018, 12:40 AM IST


धामनोद. इन दिनों शहर की थोक व फुटकर सब्जी दुकानों में मटर, टमाटर, नए आलू की आवक अच्छी है किंतु भाव औंधे मुंह गिर गए है। सात दिन पहले लोग सब्जियों के दाम सुनकर दंग रह जाते थे। ठंड अच्छी पडऩे का असर सब्जी की उपज पर भी पड़ा है। इसके चलते थोक और फुटकर बाजार में फूल गोभी और पत्ता गोभी का उठाव बिल्कुल कम हो गया है। किसानों का कहना है कि बाजार के यही हालात रहे तो उपज का लागत मूल्य भी नहीं मिलेगा।
दरअसल एक सप्ताह पहले सब्जी बाजार में मटर 40 रुपए, नया आलू 20 रुपए और टमाटर 20 से 25 रुपए प्रति किलो बिक रहा था। सोमवार को बाजार में मटर के भाव 15 रुपए, नया आलू 8 रुपए और टमाटर के भाव भी कम रहे। वहीं प्याज 3 रुपए किलो बिकने लगा। बाजार में सब्जी की अच्छी आवक होने और खपत सामान्य रहने से बिचौलिए भी माल स्टाक करने से परहेज कर रहे हैं। कमीशन एजेंट धर्मेंद्र कुशवाह, शीतल पाटीदार ने बताया इस बार आवक अच्छी होने से रेट पिछले वर्षों जैसे नहीं रहे। थोक कारोबार में मुनाफा कम रह गया है।
मंडी में छोड़ गए पत्ता गोभी : सोमवार को मंडी में पत्ता गोभी एक बोरा 50 रुपए में बिका जिसकी एक रुपए प्रति नग की भी कीमत किसान वसूल नहीं कर पाए कई किसान तो मंडी में ही पत्ता गोभी को छोड़ कर चले गए। कुछ किसानों ने बताया कि 50 रुपए प्रति बोरी का तो सिर्फ भाड़ा ही लग गया।
किसानों की हालत जस की तस है लागत भी नहीं निकल पा रही।
सुधार हो मिलना चाहिए प्रोत्साहन राशि
किसानों ने बताया कि जिस तरह अन्य उपज के भाव कम होने पर सरकार भावंतर आदि के माध्यम से किसानों को मुआवजा देती है। उसी तरह जो किसान फसल सिर्फ सब्जी की उगाते हैं उन्हें भी क्षतिपूर्ति राशि के रूप में प्रति बीघा मदद दी जाना चाहिए। इससे कम भाव मिलने पर कम से कम वह लागत वसूल पाए। किसानों ने बताया कि हमेशा किसानों का शोषण होता रहा है। किसानों को अब नई सरकार से बेहद उम्मीदें हैं। कहीं ना कहीं सब्जी उगाने वाले किसानों का भी के भी हित के बारे में नई सरकार सोचेगी इसी तरह पत्ता गोभी की तरह टमाटर के भाव भी बेहद कम है जिम में भी किसान लागत तक को वसूल नहीं कर पा रहे हैं।
इधर किसान पत्ता गोभी की लागत भी नहीं निकाल पा रहे है
आढ़तिया एवं किसान सुरेश सियाणा ने बताया कि इस वर्ष खुद के खेत में 8 बीघा में पत्ता गोभी की फसल लगाई थी, जिसकी लागत ही करीब तीन लाख से अधिक लग गई लेकिन एक लाख रुपए भी वसूल नहीं हो पाए भाव के अभाव में पत्ता गोभी को पशुओं को खिलाना पड़ रहा है।

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