विधायक ने सीएमओ को दिए रैन बसेरा का कायाकल्प करने के निर्देश

नगर अध्यक्ष तो नहीं कर पाए, क्या विधायक की पहल सार्थक रहेगी

धामनोद. नगर के बाहरी छोर पर बने रेन बसेरा (विक्रम भवन) की स्थिति जर्जर अवस्था में है देखरेख के अभाव में रैन बसेरा नाम मात्र का ही रह गया। पूर्व में समाचार प्रकाशित करने के बाद भी नगर परिषद अध्यक्ष दिनेश शर्मा एवं सीएमओ बलराम भूरे द्वारा इसकी कायाकल्प के लिए कोई प्रयास नहीं किए गए। अब आगंतुकों के रुकने के लिए उचित व्यवस्था हो इसके लिए विधायक पाचीलाल मेड़ा सामने आए हैं। उन्होंने रेन बसेरा की जगह का अवलोकन भी सोमवार सुबह किया। सीएमओ बलराम भूरे को रेन बसेरा के कायाकल्प करने के लिए निर्देश दिए हैं। 2 वर्ष के अधिक के कार्यकाल होने के बाद भी नगर परिषद अध्यक्ष दिनेश शर्मा के द्वारा रेन बसेरा के लिए कोई पहल नहीं की गई। 7 जनवरी -05 में तत्कालीन नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री जयंत मलैया, तत्कालीन प्रभारी मंत्री विजय शाह, तत्कालीन सांसद छतरसिंह दरबार एवं तत्कालीन विधायक जगदीश मुवेल के आतिथ्य में लोकार्पण हुए इस रेन बसेरा की हालत अब खराब है। रैन बसेरा के आसपास गंदगी ही गंदगी पड़ी है। वहां रात गुजारने की बात तो बहुत दूर दस मिनट के लिए भी कोई खड़ा नहीं रह पाता है। रात में आसपास के लोग रेन बसेरा के बाहर शराब पीते हैं। ना तो वहां पर कोई चौकीदार है ना ही किसी प्रकार की सुविधा रेन बसेरा के अंदर टॉयलेट शौचालय बाथरूम आदि जर्जर अवस्था में पहुंच चुके हैं। यहां तक की वहां पर खिड़कियां तक नहीं है। बिजली प्रकाश की व्यवस्था के लिए लगाई गई लाइन भी अज्ञात लोगों ने उखाड़ कर फेंक दी है। बसेरा के बाहर लगाए गए पौधे सूख चुके हैं। अंदर ग्राउंड में पूरे दिन पशु मंडराते रहते हैं। आस-पास के लोग रेन बसेरा का उपयोग पशु चारा चारागाह के रूप में कर रहे हैं। जवाबदार इस विषय में चुप है ना वहां पर किसी प्रकार की सफाई की जाती है ना ही किसी प्रकार से कोई व्यवस्था है। अब यह आगंतुक भवन उपेक्षा का शिकार है। जवाबदारों की अनदेखी के कारण शासकीय भवन का दुरुपयोग हो रहा है।
नगर में एक भी आरामगाह नहीं
उपरोक्त रेन बसेरा के अलावा नगर में एक भी विश्राम गृह नहीं है। एक विश्रामगृह सिर्फ मंडी प्रांगण में स्थित है, लेकिन वह मंडी के अधीनस्थ है। कई बार बाहर के आगंतुक कावड़ यात्री एवं परिक्रमा वासी यात्रा करने के दौरान सुविधाओं के अभाव में रात होने पर नगर में रात नहीं गुजार सकते हैं, जबकि रेन बसेरा के आसपास पर्याप्त मात्रा में शासकीय भूमि भी है। जहां पर यदि परिषद चाहे तो इस रेन बसेरे की कायाकल्प कर पुराने पोस्टमार्टम भवन के आसपास पड़ी खाली जमीन को गार्डन का रूप देकर आम लोगों के सेर के लिए एक सुव्यवस्थित जगह का निर्माण कर सकती है। यदि इस रेन बसेरे की कायाकल्प हो जाती है तो लोगों को एक हद तक लाभ मिलेगा।

shyam awasthi Desk
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