दुर्दशा पर आंसू बहा रहा 80 लाख का हॉल

Arjun Richhariya

Publish: Feb, 15 2018 05:59:58 PM (IST)

Dhar, Madhya Pradesh, India
दुर्दशा पर आंसू बहा रहा 80 लाख का हॉल

यही से प्रशिक्षण प्राप्त कर निकले है अंतर्राष्ट्रीय स्तर के खिलाडी

धार. बैडमिंटन में अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाडिय़ों को गढऩे वाले धार शहर में एक अदद बैडमिंटन हॉल नहीं है, जो हॉल बनाया गया है, वहां उच्च स्तरीय सुविधाओं का टोटा है। यहां 80 लाख रुपए की सांसद निधि से निर्मित हॉल अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रहा है। यहां पर व्याप्त अव्यवस्थाओं से खिलाड़ी और कोच को परेशान है। बैडमिंटन कोर्ट में लाइट, पानी के अलावा सफाई का अभाव है। इसके चलते यहां दिक्कतें आती हैं। इस बैडमिंटन हॉल का निर्माण सन् 2001 में किया गया था। खेल एवं युवक कल्याण विभाग की ओर से बनवाए गए इस हॉल की अव्यवस्थाओं को दूर करने के लिए अब कोई ध्यान नहीं दे रहा है। इससे खिलाडिय़ों और कोच में नाराजगी है। गौरतलब है कि यहां पर पानी की टंकी कई सालों से टूटी हुई है। इसके चलते बाथरूम में पानी नहीं आता है। इसके चलते बदबू से वातावरण दूषित हो रहा है।
यहां से ये खिलाड़ी निकले
अन्य व्यवस्थाओं में भारतीय खेल प्राधिकरण, विशेष खेल प्रक्षेत्र, स्व. कुशाभाऊ ठाकरे में सांई द्वारा इंडोर हॉल सहित बैडमिंटन कोर्ट की व्यवस्था भी धार को प्राप्त है। वहीं इस हॉल से अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर के बैडमिंटन खिलाड़ी निकल रहे है। इस हॉल से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निमिष गोयल, अभिमन्यु सिंह, सौरभ, समीर वर्मा, प्रत्युल जोशी, आदित्य जोशी और राष्ट्रीय स्तर पर कुणाल मकवाना, विवेक यादव, प्रतीकसिंह, शुभम प्रजापत, अमन राठौर, यश रायकवार, अमन रायकवार, तृप्ति शर्मा, नेहा मकवाना, रश्मि खेड़ेकर, वंशिका अग्रवाल, सुमहिया यादव खिलाड़ी यहीं से प्रशिक्षण लेकर निकले है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर के कोर्ट तो मिले, पर सुविधाएं नहीं मिली : पूर्व कलेक्टर जयश्री कियावत और वर्तमान कलेक्टर श्रीमन शुक्ला ने अंतरराष्ट्रीय स्तर के बैडमिंटन कोर्ट दिए हैं, जो खिलाडिय़ों के लिए एक सौगात है। लेकिन यहां बहुत अव्यवस्थाएं हैं। गंदे बाथरूम, ट्यूबलाइट्स और साफ-सफाई का अभाव है। हाल में जिन कार्यों की आवश्यकता नहीं थी, वहां पर अवैध रूप से बैडमिंटन संस्थान ने फर्श की जगह ब्लॉक टाइल्स लगा दी, लेकिन बैडमिंटन कोर्ट में कई आवश्यकता है।यहां शेष भाग में मैट लगाने से लेकर पीने के पानी के बंदोबस्त आदि करना जरूरी है। कोच शमशेरसिंह यादव ने बताया कि यहां पर पूर्व में रही पूर्व कलेक्टर जयश्री कियावत ने एक्वागार्ड प्रदान किया था, वह भी यहां से नदारद है। मैट गायब हो गई। हॉल में लगे 24 में से 16 हैलोजन भी नहीं हैं। यहां की एल्यूमिनियम सीढ़ी कई संस्थाएं तीन-चार महीने के लिए ले जाती है और इसका किराया भी नहीं देती है। सीढ़ी भी क्षतिग्रस्त कर दी है।

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