डेढ़ महीना बाकी था तो घर वाले अपनी मर्जी से ले गए

डेढ़ महीना बाकी था तो घर वाले अपनी मर्जी से ले गए
डेढ़ महीना बाकी था तो घर वाले अपनी मर्जी से ले गए

atul porwal | Updated: 14 Sep 2019, 11:23:22 AM (IST) Dhar, Dhar, Madhya Pradesh, India

अगले ही दिन दर्द उठा तो वापस जिला अस्पताल लाने के दौरान रास्ते में ही हो गई डिलेवरी, बच्चे के मर जाने पर डॉक्टर पर निकाली भड़ास, पुलिस पहुंची अस्पताल

धार.
समय से पहले गर्भवती को दर्द उठा तो घर वाले उसे जिला अस्पताल ले आए। रात भर भर्ती रखने के बाद अगले दिन सुबह ठीक लगा तो परिजन गर्भवती को घर ले जाने की जिद करने लगे। डॉक्टर ने जांच पड़ताल के बाद कहा कि पूरे समय में भले ही डेढ़ महीना बचा, लेकिन बच्चे दानी का मुंह खुल जाने से उसे अस्पताल में भर्ती रखना होगा। घर वाले नहीं माने तो अस्पताल स्टाफ ने भर्ती कागज पर लिखवाकर छोड़ दिया, लेकिन अगले ही दिन शाम को फिर पेट में उर्उ उठने पर अस्पताल लाते वक्त ही रास्ते में डिलेवरी हो गई। बच्चा मर गया तो घर वालों ने जिला अस्पताल में हंगामा कर डाक्टर और स्टाफ नर्सों के साथ धक्का मुक्की कर दी। आखिर पुलिस के आने पर ही मामला सुलझ सका।
घटना गुरुवार रात करीब 9.30 बजे की है जब मंडलावदा गांव की गर्भवती मनीषा पति मनोज उम्र 26 वर्ष को दूसरी बार जिला अस्पताल लाया गया। अस्पताल पहुंचने से पहले ही मनीषा ने रास्ते में ही बच्चे को जन्म दे दिया था, लेकिन अस्पताल में डॉक्टरों ने बच्चे की जांच की तो उसे मृत घोषित कर दिया। इधर परिजन बच्चे को आईसीयू में भर्ती करने की बोल रहे थे, लेकिन मृत बच्चे को वहां रखना मुमकीन नहीं था। इस बात पर मामला बड़ा तो मनीषा के साथ आए घर वालों ने हंगामा कर स्टाफ के साथ गालीगलौज व धक्का मुक्की शुरू कर दी। खबर के बाद अस्पताल पहुंची पुलिस के बाद मामला सुलझ सका। हालांकि मनीषा के घर वाले पुलिस के सामने अस्पताल में ही आत्महत्या की बात कर रहे थे, जबकि स्टाफ का कहना था कि उन्होंने बदतमीजी की। इस मामले में गायनेकोलॉजिस्ट डॉ. नीरज बागडे ने कोतवाली थाने पर मनीषा के परिजन के खिलाफ अभद्र व्यवहार का आवेदन सौंपा।

चौथी डिलेवरी थी
अस्पताल से मिली जानकारी के अनुसार मनीषा की उम्र तो 26 वर्ष है, लेकिन यह उसकी चौथी डिलेवरी थी। इसके पहले की तीन डिलवेरी सामान्य थी, लेकिन इस बार पूरे समय से पहले ही बच्चे दानी का मुंह खुल जाने से जांच पड़ताल में ही पेचिदगी नजर आने लगी थी। डॉ. बागडे के अनुसार मनीषा के गर्भ को अभी 33वा सप्ताह चल रहा था, जबकि पूरा समय 40 वे सप्ताह में आता है। हालांकि बच्चा दानी का मुंह खुल जाने से परेशानी थी इसलिए वे उसे भर्ती रखना चाहते थे, लेकिन परिजन के आगे उनकी चली नहीं।

ये कहते हैं परिजन
इधर मनीषा के परिजन का कहना हे कि जिला अस्पताल में डॉक्टर और नर्स का व्यवहार ठीक नहीं था। मंगलवार रात को भर्ती करते वक्त भी उन्होंने ठीक व्यवहार नहीं किया, जबकि घर ले जाने की बात पर भी उन्होंने यह नहीं बताया कि परेशानी खड़ी हो जाएगी। केवल कागज पर लिखवाकर छोड़ दिया। गुरुवार शाम को जब वापस अस्पताल आए तब भी उन्होंने हमारी बात नहीं सुनी और बच्चा मर गया।

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