आदिवासी क्षेत्र से मुक्त की जाए धार तहसील, ताकि औद्योगिक विकास में आए गति

आदिवासी क्षेत्र से मुक्त की जाए धार तहसील, ताकि औद्योगिक विकास में आए गति

Amit S. Mandloi | Publish: Sep, 17 2018 12:20:39 AM (IST) | Updated: Sep, 17 2018 12:20:40 AM (IST) Dhar, Madhya Pradesh, India

पीथमपुर की हर कंपनी का जिला मुख्यालय पर कार्यालय हो,

दुग्ध उत्पादक भी आएं समर्थन मूल्य दायरे में

 

 

 

धार. धार तहसील को आदिवासी मुक्त किया जाए, जिससे जमीनों के हस्तांतरण के साथ इन पर औद्योगिक संबंधी विकास हो सके। यह बात पत्रिका की पहल पर धार विधानसभा के चेंजमेकर्स ने प्रबुद्ध लोगों के साथ बैठक में उभरकर आई। जनता का एजेंडा तय करने के लिए करीब एक घंटे चली बैठक में एक दर्जन से अधिक बुद्धिजीवी शामिल हुए। धार जिला मुख्यालय होने के नाते इसके विकास में आदिवासी कानून का अड़ंगा। बैठक में शामिल दुग्ध उत्पादकों ने अपने शोषण की बात करते हुए उनके व्यवसाय को भी समर्थन मूल्य के दायरे में लाने की बात रखी। विकास की बात चली तो पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र में स्थापित कर कंपनी का कार्यालय जिला मुख्यालय पर खोले जाने की मांग भी सामने आई। इससे स्थानीय रोजगार के साथ कंपनी की प्रोफाइल के बारे में जानकारी आसानी से हासिल की जा सके। रेल नहीं होने से भी क्षेत्र का विकास अटका पड़ा, जिसके लिए जनप्रतिनिधियों में इच्छा शक्ति की कमी नजर आ रही है।
ये भी रहे मुद्दे
उद्योगों के लिए पर्याप्त पानी का इंतजाम हो, जिसके लिए नर्मदा, माही से यहां तक पानी पहुंचे।
राष्ट्र भक्ति की भावना पैदा करने के लिए लचीले संविधान के बजाय ठोस कानून की जरूरत।
सुरक्षा के साधनों का विस्तार।
मजदूरी में मानवाधिकारों का हनन, जिन्हें शोषण से बचाने के प्रयास।
खेल के क्षेत्र में संसाधनों के साथ खेल मैदानों का विकास।
आदिवासी जिले में पुरातात्विक धरोहरों के संरक्षण पर ठोस कार्य नहीं हो रहे। ऐतिहासिक इमारतों व स्मारकों के संरक्षण की जरूरत।
बागेड़ी व सादी नदी के जीर्णोद्धार से कई गांव की पेयजल समस्या दूर हो सकती है।
10 साल में 50 किलोमीटर रेल!
फरवरी 2008 में इंदौर-दाहोद रेल की घोषणा हुई, लेकिन 10 साल में 205 किमी की इस परियोजना में अब तक महज 50 किमी ही काम हो सका। दरअसल जनप्रतिनिधियों की इच्छा शक्ति की कमी के कारण ये हालात बन रहे हैं। हर राजनीतिक दल रेल के मुद्दे को बनाए रखना चाहता है, जिससे उनकी राजनीति जिंदा रह सके।-पवन जैन गंगवाल, रेल लाओ समिति, चेंज मेकर

इसलिए अटका विकास
धार आदिवासी जिला है, लेकिन जिस तरह बदनावर तहसील आदिवासी मुक्त है, धार भी होना चाहिए। धार तहसील भी सामान्य घोषित हो जाए तो विकास में तेजी आएगी। जमीन का हस्तांतरण नहीं होने से उद्योग हो या डेवलपमेंट सब कुछ अटका पड़ा है। राकेश राजपुरोहित, समाजसेवीहर क्षेत्र में पिछड़े
कुछ वर्षों में आदिवासी जिले से जिस तरह की प्रतिभाएं उभरी हैं, क्षेत्र में मेडिकल, इंजीनियरिंग कॉलेज की खासी जरूरत महसूस होने लगी है। विकास के लिए पीथमपुर में स्थापित सभी कंपनियों के कार्यालय जिला मुख्यालय पर होने चाहिए। वीरेंद्र जैन, अध्यक्ष दिगंबर जैन समाज
हो रहा शोषण
हमसे सस्ते दाम पर दूध खरीदने वाली कंपनियां केवल हमारा शोषण कर रही हैं। पहले दूध का दाम 6.6 रु, प्रति फैट दिया जा रहा था उसे अब 4.8 रुपए कर दिया। सरकार को चाहिए कि दुग्ध व्यवसाय को भी समर्थन मूल्य के दायरे में लाए, जिससे हमारा शोषण ना हो। -लक्ष्मणसिंह राजपूत, दुग्ध उत्पादक

ये भी हुए शामिल
कैलाशचंद्र शर्मा, पूर्व सरपंच, तिरला
शमशेरसिंह यादव, खेल प्रशिक्षक
राधेश्याम सेन, जिला अध्यक्ष सेन समाज
देवराम जोशी, होटल व्यवसायी
तरूण परमार, युवा
आशीष यादव, सामाजिक कार्यकर्ता
मौसम जैन, व्यवसायी
हुकम कासलीवाल, सामाजिक कार्यकर्ता
बंशीलाल अग्रवाल, व्यवसायी
प्रतीक मेघनानी, कारोबारी।

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