कारोबार पर पड़ रहा असर, बाजार की ग्राहकी भी प्रभावित

कारोबार : आंकड़ा सिमटकर लगभग डेढ़ से 2 करोड़ रुपए पर आ टिका

By: रमेश वैद्य

Published: 07 Jun 2018, 01:20 AM IST

धार. ‘न खरीदेंगे न बेचेंगे’ के आह्वान पर 1 जून से शुरू हुआ किसान आंदोलन कृषि उपज मंडी पर गहरा असर छोड़ गया। आंदोलन के पांच दिन बाद भी मंडी इसके प्रभाव से उबर नहीं पा रही है, हालांकि धीरे-धीरे मंडी में आवक बढ़ रही है, लेकिन किसान आंदोलन के दौरान मंडी की आवक कम होने से मंडी कारोबार के साथ बाजार की ग्राहकी भी प्रभावित दिखाई दे रही है। एक अनुमान के मुताबिक प्रतिदिन धार शहर में मंडी सहित बाजार का लगभग 6 करोड़ रुपए का टर्नओवर है, लेकिन किसान आंदोलन के दौरान यह आंकड़ा सिमटकर लगभग डेढ़ से 2 करोड़ रुपए पर आ टिका है।
धार अनाज तिलहन संघ के अध्यक्ष राजू मोदी के अनुसार मंडी में सीजन के समय लगभग ४ करोड़ रुपए प्रतिदिन का कारोबार होता है, जबकि ऑफ सीजन में 3 करोड़ रुपए। इन दिनों मंडी में आवक कम होने से कारोबार पूरी तरह प्रभावित है। बता दें कि किसान आंदोलन के पहले दिन 1 जून को मंडी प्रशासन ने केवल एक बोरी की नीलामी करवाकर किसानों को यह मैसेज देने का प्रयास किया कि मंडी चालू है, लेकिन इसके बावजूद 5 जून तक मंडी की आवक रूटीन में नहीं आ पाई। मंडी में माल बेचकर मिली रकम से किसान बाजार से खरीदी करता है, लेकिन किसान आंदोलन के कारण न तो मंडी बहार पर है और ना ही बाजार में रौनक। बता रहे हैं कि इस सीजन में मंडी की एवरेज आवक 6 हजार बोरी रहती है, जबकि 5 जून को महज 678 बोरी आवक की हुई।
यूं समझें आंदोलन का प्रभाव

मंडी में आवक

1 जून- 1 बोरी
2 जून- 34 बोरी
3 जून- अवकाश
4 जून- 500 बोरी
5 जून- 678 बोरी

किराना बाजार(थोक एवं खेरची)
- प्रतिदिन लगभग 50 लाख रुपए का कारोबार।
- किसान आंदोलन के कारण लगभग २० लाख रुपए पर सिमटा।
सराफा बाजार
ऑफ सीजन में प्रतिदिन लगभग २० लाख रुपए का कारोबार।
किसान आंदोलन के कारण ५ लाख रुपए का व्यापार भी नहीं हो रहा।

कपड़ा बाजार (रेडीमेड समेत)
- प्रतिदिन लगभग 7 लाख रुपए का कारोबार।
- किसान आंदोलन के कारण लगभग १ लाख रुपए पर सिमटा।
इसके अलावा सभी बाजार की लगभग यही हालत है। जो प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से किसान आंदोलन के कारण प्रभावित हैं।

मंदीवाड़ा है
भले ही शादी ब्याह का सीजन नहीं है, लेकिन रेडीमेड का व्यापारी पूरे साल भर चलता है। इन दिनों बाजार की हालत ठीक नहीं है।
-राजीव बाफना, रेडीमेड व्यापारी

फुरसत में बैठे हैं
क्या बताएं दुकान खोलने के बाद एक मिनट की फुरसत नहीं मिलती है, लेकिन पिछले एक सप्ताह से बिलकुल फुरसत में बैठे हैं। किसान मंडी नहीं आएगा तो खरीदेगा कैसे।
-मुकेश पांडे, जनरल स्टोर व्यापारी

ठंडा है व्यापार
गर्मी की छुट्टियों के बाद स्कूल खुलने वाले हैं। पहले जिन बच्चों ने स्टेशनरी नहीं खरीदी या जिन्होंने आधी अधूरी किताबें खरीदी वे इस समय खरीदी करने आते हैं, लेकिन पूरे बाजार में सन्नाटा है।
-विशाल संघवी, स्टेशनरी व्यापारी

आवक तो कम है
इन दिनों मंडी में आवक तो कम है, लेकिन मंडी बंद नहीं है। किसान क्यों नहीं आ रहे मैं कैसे बता सकता हूं। -वीरेंदकुमार आर्य, मंडी सचिव

 

रमेश वैद्य Desk
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