रणथंभौर से गायब हुए बाघ का मूवमेंट होने की संभावना

Arjun Richhariya

Publish: Dec, 07 2017 02:20:29 (IST)

Dhar, Madhya Pradesh, India
रणथंभौर से गायब हुए बाघ का मूवमेंट होने की संभावना

रणथंभौर के अधिकरियों से हुई पुष्टि, झाबुआ जिले के पेटलावद में है वर्तमान में बाघ का मूवमेंट

धार. जिले के बदनावर तहसील के तिलगारा क्षेत्र में देखे गए बाघ के पगमार्क के आधार पर वन विभाग ने इसके नर बाघ होने की बात कही है। अभी यह कयास लगाए जा रहे हैं कि यह वन्य जीव किस जगह से मूव करता हुआ धार जिले से होता हुआ झाबुआ जिले के पेटलावद और इसके आसपास विचरण कर रहा है, लेकिन डीएफओ के अनुसार इसके रणथंभौर की टारगर रिजर्व रेंज से यहां पहुंचने की संभावना अधिक है। हालाकि इनका मूवमेंट देवास जिले व पीथमपुर के आसपास होने की बात अकसर सामने आई है। वहीं जब इस संबंध में पत्रिका ने सवाई माधोपुर स्थित रणथंभौर अभ्यारण्य के सूत्रों से चर्चा की तो उनके मुताबिक वहां पर बाघों की संख्या करीब ६५ है। इनमें से करीब ८ से अधिक विचरण करते हुए दूसरे स्थानों की ओर निकल गए हैं। इससे संभावना बनती है कि धार जिले में विचरण कर रहे वन्यजीव वहीं से आया हो। आधिकारिक रूप से अभी इसकी पुष्टि होना बाकी है, लेकिन वहां के वन्य जीव संरक्षण अधिकारी की माने तो यह जानवर वहां का हो सकता है।
चालाक किस्म का होता है बाघ : वन्य जीव विशेषज्ञों की माने तो बाघ चालाक किस्म के होते हैं। वे भीड़ भाड़ से बचने के लिए छिपते हुए चलते हैं। इसलिए वे नाइट विजन कैमरे की रेंज में भी नहीं आते हैं। धार जिले के तिलगारा में भी इसके नाइट विजन कैमरे में नहीं आने की वजह यही हो सकती है। पगमार्क ही पुष्टि कर रहे हैं कि यह नर बाघ है।
कैसे पहचान होती है नर व मादा की : वन विभाग के सूत्रों के अनुसार नर बाघ के पंजे मादा बाघ के पंजे के मुकाबले अधिक बड़े होते हैं। मादा बाघ के पंजे के निशान अपेक्षाकृत छोटे हैं। इनको धूल या रेत पर देखा जाए तो स्पष्ट अंतर नजर आता है, लेकिन नमी और गीली जमीन पर इनके पगमार्क की पहचान कर पाना उतनी आसान नहीं होता।
सेंचूरी से पलायन का यह हो सकता है कारण
वन विभाग के सूत्रों के अनुसार इस वन्य जीव को शोर-शराबा पसंद नहीं होता है। रणथंभौर सेंचूरी में इनको देखने के लिए देशी व विदेशी पर्यटकों की आमद बढऩे और वन क्षेत्र से हाईवे और रेलवे लाइन गुजरने की वजह से शोर अधिक होता है। इस वजह से कुछ बाघ वहां से दूसरी शांत जगहों की ओर पलायन कर जाते हैं। रणथंभौर से पलायन कर गए इन वन्यजीवों की सर्चिंग की जा रही है, लेकिन एकाध वन्य जीव के मिलने के अलावा विभाग को कोई सफलता हाथ नहीं आई है।
फुटेज में शिकार खाता दिखा बाघ
पेटलावद ञ्च पत्रिका. मालवांचल में भय का माहौल बनाने के बाद अब बाघ झाबुआ जिले के पेटलावद में पहुंचने की आशंका बताई जा रही है। बताया जा रहा है कि मंगलवार सुबह कसारबरड़ी गांव में उसने एक गाय का शिकार किया था। इसके बाद से प्रशासन अलर्ट हो गया। वन विभाग की सूचना पर जिला प्रशासन ने आसपास की ग्राम पंचायतों के निवासियों के सचेत रहने के संबंध में मुनादी भी करवाई। इससे पुष्टि हो गई है कि झाबुआ जिले की पेटलावद तहसील में टाइगर की आमद है।

अभी हमारे पास ऑफिसियली कोई सूचना नहीं आई है। अगर सूचना आती है तो यहां से टीम भेजी जाएगी। वैसे टाइगर यहां से निकलते रहते हैं। हो सकता है वहां पहुंच गया हो। उसके ट्रेपिंग के लिए कैमरे व अन्य उपकरण लगवाए जाएंगे। यह तभी संभव होगा जब हमें वहां से कोईसूचना मिले।
संजीव शर्मा, एसीएफ, रणथंभौर अभ्यारण्य, सवाई माधोपुर(राज.)

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