मात्र डेढ़ किलोमीटर के मार्ग निर्माण से सेमल्दा जुड़ जाएगा सुंद्रेल से

पहले कच्चा रोड होने के चलते आने-जाने में आती थी दिक्कत
अन्य विकल्प के तौर पर पैदल चलना पड़ता है

धामनोद. प्रधानमंत्री ग्रामीण सडक़ योजना के तहत समूचे देश में सरकार ने सडक़ों का जाल बिछा दिया है। इसका निश्चित रूप से फायदा ग्रामीण लोगों को मिल भी रहा है। लेकिन बावजूद इसके आज भी देश के कई हिस्सों में सडक़ निर्माण न होने की वजह से कई गांव एक-दूसरे से कटे हुए हैं और इस तरह कटे हुए हैं कि आस-पास के गांव को एक दूसरे से संपर्क में आने के लिए सडक़ मार्ग से कई किलोमीटर की दूरी तय करना पड़ती है। कहने का मतलब मिनटों का काम घंटों में करना पड़ता है। प्रशासन को चाहिए कि ऐसे गांवों को चिन्हित कर प्राथमिकता के आधार पर वहां सडक़ निर्माण किया जाए ताकि लोगों की परेशानियां दूर हो सके।
धामनोद नगर के समीपस्थ ग्राम सेमल्दा से डोंगरगांव तक जाने के लिए मार्ग की स्थिति दयनीय है। यह मार्ग मात्र डेढ़ किलो मीटर का है । यदि इस मार्ग का निर्माण हो जाता है तो बाद में डोंगरगांव से सुंद्रेल जाने के लिए पक्की सडक़ बनी हुई है। जिससे सेमल्दा से सुंद्रेल की मार्ग की आवागमन की लिंक सीधी जुड़ जाएगी। ज्ञात हो कि उपरोक्त डेढ़ किलोमीटर का मार्ग कच्चा होने के कारण इस मार्ग पर किसी प्रकार के यातायात के साधन नहीं चलते है। यदि किसी बिना साधन वाले व्यक्ति को सुंदरेल से सेमल्दा आना जाना होता है तो वह पहले बस से 8 किलोमीटर धामनोद और यहीं से फिर वापस 6 किलोमीटर सेमल्दा जाना पड़ता है या फिर अन्य विकल्प के तौर पर पैदल चलना पड़ता है। मात्र डेढ़ किलोमीटर मार्ग के निर्माण हो जाने से दूरी तो कम होगी ही साथ-साथ आवागमन के लोक परिवहन वाहन भी चालू हो जाएंगे। अभी सिर्फ अपने निजी वाहन से आने जाने वाले लोग ही इस मार्ग से निकलते हैं।
जानलेवा और खतरनाक है मार्ग
यह डेढ़ किलोमीटर का का मार्ग बहुत ही खतरनाक मार्ग है। इस कच्चे मार्ग के पास में ही करीब पुरे मार्ग पर 15 से 20 फीट गहरे बड़े-बड़े गड्ढे हैं । मार्ग का निर्माण हो जाता है तो आवागमन के साधन तो बढ़ेंगे ही साथ साथ लोगों को अपने खेतों में जाने का रास्ता भी मिलेगा। ज्ञात हो कि यह क्षेत्र प्रमुख रुप से धरमपुरी तहसील की व्यवसाय कृषि स्थली भी है। इस क्षेत्र में सबसे ज्यादा प्याज सब्जियां बोई जाती है। जो धामनोद इंदौर के अलावा राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र अन्य प्रदेशों की मंडियों को भेजी जाती हैं। आवागमन के साधन यदि बढ़ते हैं तो निश्चित रुप से क्षेत्र के किसानों को बड़ा लाभ होगा। केंद्र सरकार की मंशा एवं नीति के अनुसार किसान हित सरकार की वरीयता सूची में है। ऐसे में यह मार्ग निर्माण अब अत्यावश्यक हो गया है।
बच्चे पढऩे जाते हैं पैदल
उपरोक्त मार्ग पर करीब डेढ़ से दो किलोमीटर दूर बच्चे प्रतिदिन पैदल पढऩे के लिए हायर सेकेंडरी स्कूल सेमल्दा जाते हैं। पढऩे वाले बालकों ने बताया कि मार्ग की स्थिति ठीक नहीं है। इसी कारण से पैदल जाना पड़ता है। बरसात में स्थिति और विकराल रुप ले लेती है। मार्ग में जबरदस्त कीचड़ और बड़े-बड़े गड्ढे हो जाते हैं। डेढ़ किलोमीटर के इस मार्ग का निर्माण यदि हो जाता है तो सुंद्रेल, झकरुड़, डोंगरगांव और सेमल्दा यह गांव आपस में जुड़ जाएंगे। जिसकी आपस मे दूरी भी मात्र चार किलोमीटर से अधिक नहीं है । इस डेड किलोमीटर के अधूरे मार्ग के निर्माण के कारण ही गांव आपस में जुड़ नहीं पा रहे हैं। जबकि बाद में 3 किलोमीटर सुंद्रेल से डोंगरगांव तक पक्की सडक़ बनी हुई है। नए जनप्रतिनिधियों ने इस कार्य को मूर्त रूप देने के लिए पहल करना चाहिए।
बताया जाता है कि सेमल्दा उन्नतशील कृषक गांव है यहां पर सर्वाधिक मात्रा में हरी सब्जियों की खेती की जाती है। प्याज की भी यहां पर बंपर पैदावार होती है। यह गांव सब्जियों के उत्पादन में अपना महत्वपूर्ण योगदान देता है तथा क्षेत्र में अग्रणी है। मात्र थोड़े से मार्ग से इस गांव की भी कायाकल्प हो सकती है क्योंकि जिन किसानों के खेत में इस मार्ग से गुजरना पड़ता हैं वहां वाहन आने जाने में परेशानी का सामना उठाना पड़ता है। जवाबदारों ने जल्द पहल कर इस मार्ग का निर्माण कर देना चाहिए ताकि किसानों को और अन्य रहवासियों को राहत मिले।

shyam awasthi Desk
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