कहीं पानी की व्यवस्था दुरुस्त नहीं तो कहीं धूप से परेशानी

उपार्जन केंद्रों पर अव्यवस्थाओं पर ध्यान नहीं, आने वाले दिनों में बढ़ सकती है परेशानी

By: amit mandloi

Published: 29 Mar 2019, 12:00 AM IST

धार/अनारद. कृषि उपज मंडी सहित अन्य उपार्जन केंद्रों पर समर्थन मूल्य पर उपज खरीदी शुरू हो चुकी हैं। धार मंडी को छोडक़र शेष उपार्जन केंद्र सूने पड़े हैं। प्रशासन ने किसानों की सुविधा के लिए हर उपार्जन केंद्र पर पानी, छांव और सुलभ सुविधा का इंतजाम करने के आदेश दिए थे, लेकिन अधिकांश सेंटरों पर आधे अधूरे इंतजाम किसानों के लिए परेशानी खड़ी कर सकते हैं। फिलहाल उपार्जन केंद्रों पर किसानों की भीड़ नहीं है, जिससे अव्यवस्थाओं पर अधिकारियों का ध्यान नहीं जा रहा है, लेकिन गुरुवार को आमखेड़ा उपार्जन केंद्र पर आई कुछ किसानों की भीड़ छांव तलाशने में नाकाम रही। हालांकि यहां छांव के लिए टेंट तो लगाए, लेकिन बहुत छोटा टेंट होने के कारण किसान वेयर हाउस के आटलों पर समय गुजारते रहे। पानी के लिए भी किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
मंडी में भीड़, सूने पड़े उपार्जन केंद्र : सरकारी खरीदी के लिए जिलेभर में 83 सेंटर सथापित किए गए, लेकिन अधिकांश उपार्जन केंद्र तीसरे दिन भी खाली दिखाई दिए। हालांकि मंडी में भारी भीड़ उमड़ रही है। पंजीकृत किसानों का कहना है कि मंडी में अच्छे दाम मिलने के बाद भी बोनस तो मिलेगा ही। सरकारी खरीदी के लिए गेहूं का दाम 1840 रुपए प्रति क्विंटल है, जबकि 160 रु. प्रति क्विंटल बोनस दिया जाएगा। धार मंडी में बुधवार तक गेहूं का मॉडल भाव 1875 रु.प्रति क्विंटल रहा, जबकि इसके बाद पंजीकृत किसानों को 160 रु प्रति क्विंटल बोनस भी मिलेगा।
ये है अब तक की स्थिति
सहायक आपूर्ति अधिकारी आनंद गोले के अनुसार गुरुवार तक 1166 किसानों से 7517 क्विंटल खरीदी की जा चुकी थी। जिलेभर से उपार्जन के लिए 31310 किसानों का पंजीयन हुआ, लेकिन भोपाल से जारी हो रहे मैसेज गुरुवार तक केवल 1772 किसानों को ही हो पाए। गोले के अनुसार भोपाल से हो रही इस प्रक्रिया के बारे में उन्हें जानकारी नहीं, लेकिन एक-दो दिन में हर उपार्जन केंद्र पर किसानों की संख्या में मोटा इजाफा होगा।
खाली पानी पीने से शरीर शांत नहीं होता। हम कितने किलोमीटर दूर से यहां गेहूं तुलवाने आए है और कितना इंतजार करना पड़ रहा है। टेंट पर्याप्त नहीं होने से छांव के लिए वेयर हाउस के ओटलों पर बैठना पड़ रहा है।
धनसिंह पिता शंकर सिंह, किसान, कलमखेड़ी
गिनती के किसानों होने के बाद भी तुलाई की गति नहीं होने से अपने नंबर के लिए घ्ंाटों इंतजार करना पड़ रहा है। इससे अच्छा तो मंडी चले जाते तो ज्यादा फायदा होता। यहां तो दाम फिक्स है, लेकिन हमारा गेहूं तो अच्छा है, जिसका मंडी में भाव भी अच्छा मिलता।
नरेंद्र पिता चंदनसिंह निकम, किसान, कलमखेड़ी

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