सोयाबीन की फसल से है ज्वेलरी बाजार को उम्मीद (देखे वीडियो)

- एक से बढ़कर एक डिजाईन में मिल रहा

By: Amit S mandloi

Published: 17 Oct 2020, 07:22 PM IST

धार.
पिछले कई महीनों से लाकडाउन में दुकानें बंद करके बैठे व्यापारियों के लिए नवरात्रि राहत लेकर आई है। सराफा बाजार में फिर से रौनक लौटने पर व्यापारियों के चेहरों पर खुशी नजर आई है। व्यापारियों का कहना है उनका अधिकांश व्यापार किसानों पर निर्भर है। सोयीबीन की कटाई के बाद बाजार में बूम आ रहा है।

शहर में 50 से अधिक दुकानें है। वहीं कई बड़े शोरूम भी है। जहां पर नवरात्रि के पहले दिन ग्राहक पहुंचे। ग्राहक नई-नई वैरायटी की ज्वेलरी की मांग कर रहे है। ज्वेलर्स भी ग्राहकों के लिए मनपसंद डिजाईन भी तैयार करवा रहे है।

वीजी ज्वेलर्स
हाथों हाथ कर देते है सोने की टेस्टिंग

नगर के जवाहर मार्ग पर वीजी ज्वेलर्स की दुकान है। ये वर्षों पुरानी दुकान है। संचालक श्यामलाल गुप्ता ने बताया कि दुकान में सोना टेस्टिंग की मशीन है। ग्राहकों की डिमांड पर कैरेट हाथों-हाथ चैक कर दिया जाता है। गुप्ता के मुताबिक नवरात्रि तक लाईट वेट जैसे अंगूठी, कान की बाली की डिमांड रहती है। इसके बाद हेवी वजन की ज्वेलरी बिकना शुरू हो जाती है। गुप्ता का कहना है कि अधिकांश ग्राहकी ग्रामीण क्षेत्रों की है। सोयाबीन कटाई के बाद बाजार में बुूम है।

अणु श्री ज्वेलर्स
जेवर पर बीमा दे रहे है फ्री

बनियावाडी स्थित अणुश्री ज्वेलर्स के संचालक विनीत जैन ने बताया कि हम ज्वेलरी खरीदने पर उसका बीमा नि:शुल्क करके दे रहे है। उन्होंने बताया कि रानी हार, फैंसी चैनों की डिमांड ज्यादा है। इसके अलावा पर्व को देखते हुए ग्राहक चांदी के भगवान की डिमांड भी ज्यादा कर रहे है। जैन ने बताया कि लाकडाउन की भरपाई की उम्मीद की जा रही है।

पारस ज्वेलर्स
शुद्धता के कारण है भरोसा

शनिगली स्थित पारस ज्वेलर्स के संचालक मनीष जायसवाल का कहना है कि वे शुद्धता की गारंटी देते है। जिसके कारण ग्राहकों का भरोसा उनकी दुकान पर बना हुआ है। उनका कहना है कि अब बाजार की रौनक बढ़ृने से व्यापारी खुश है। उन्होंने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों से चांदी तो शहरी क्षेत्र से सोने के ज्वेलरी की डिमांड ज्यादा मिल रही है।

संगम ज्वेलर्स
11 किश्त ग्राहक तो 12वीं किश्त व्यापारी मिला रहे
जवाहर मार्ग स्थित संगम दुकान पर ग्राहकों को सुविधा दी जा रही है। संचालक मनीष गुप्ता ने बताया कि दुकान पर ज्वेलरी बनाने की सुविधा किश्तों में दी जा रही है। 11 महीने से एक निश्चित राशि ग्राहक जमा कराता है तो 12वीं किश्त व्यापारी खुद मिलाकर मनचाही ज्वेलरी उन्हें दे रहे है। गुप्ता ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्र से चांदी के आंवले (पैर में पहनने का आभूषण) तो शहर से अंगूठी, हार की मांग बढ़ी है।

Amit S mandloi
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned