ऐसी है आजादी के 70 साल बाद की तस्वीर, एक तालाब से जानवर और इंसान पी रहे पानी

ऐसी है आजादी के 70 साल बाद की तस्वीर, एक तालाब से जानवर और इंसान पी रहे पानी
Dhar

Amit Mandloi | Publish: Jun, 16 2017 11:19:00 PM (IST) Dhar

पशुओं के साथ तलाई में पानी पी रहे गांव वाले, जवाबदारों का कहीं, कोई पता नहीं, बिजली-सड़क तक नहीं मिली आजादी के बाद से

धारफाटा। आज के युग में यदि कोई आपको कहे कि बिना बिजली बिना पानी के रहना है तो आप और हमारे लिए यह नामुमकिन होगा, परंतु धारफाटे के समीप धरमपुरी तहसील एंव मांडू की तल विंध्याचल की पहाडिय़ों में बसा एक गांव पूरी तरह से उपेक्षा का शिकार है। पत्रिका द्वारा जब वहां पड़ताल की गई तो बड़ा ही उपेक्षा ग्रस्त मामला सामने आया। ग्राम कछुवानिया के ही अंतर्गत आने वाला बयडीपुरा में करीब 50 घरों की आदिवासी बाहुल्य बस्ती है। यहां के रहने वाले लोग आज भी बिना बिजली, पानी, सड़क के जीवन बिता रहे हैं। बड़ी पुरा की आबादी करीब 500 लोगों की है धार फाटा से करीब 8 किलोमीटर दूर बसे इस गांव में किसी भी प्रकार की मूलभूत सुविधाएं नहीं है। गांव में पानी के लिए कोई साधन नहीं है। गर्मी में महिलाओं को पानी लेने के लिए 1 किमी दूर कुएं पर जाना पड़ता है। गांव में पानी की सुविधा के नाम पर सिर्फ एक हैंडपंप है वह भी दम तोड़ चुका है। स्कूल पढऩे वाले बच्चों को मजबूरी में तलाई में जहां पर पशु पानी पीते हैं वहां का पानी पीना पड़ रहा है ।
राशन लेने जाना पड़ता है 9 किलोमीटर

राशन लेने के लिए 9 किमी दूर पैदल जाना पड़ता है। जवाबदारों ने इस गांव की शासन की योजनाओं को इस कदर बिखेर रखा है कि गांव के लोगों को राशन लेने के लिए 9 किमी दूर कुसमला जाना पड़ता है,जबकि नियम अनुसार राशन की दुकान गांव में ही होना चाहिए। महिलाओं को इतनी दूर पैदल राशन लेने जाने में पूरा दिन लग जाता है इस प्रकार की अव्यवस्थाओ की सुध लेने के लिए अभी तक कोई भी अधिकारी सामने तक नहीं आया है।
सड़क का नामोनिशान नहीं

गांव के ही रहने वाले महिला जमुना बाई पति नर सिंह बुंदेला ने बताया कि आजादी के बाद से ही आज तक गांव में सड़क तो क्या कच्ची रोड भी नहीं बनी। उबड़ खाबड़ रास्ते पर हमें यहां से आठ किमी दूर पैदल जाना पड़ता है। आवागमन का कोई साधन नही है। यहां तक कि गांव में जब भी कोई शादी होती है या बरात आती है तो दूल्हे को भी गांव में एक किमी तक पैदल आना पड़ता है। गर्भवती महिला को रोड तक ले जाने में बड़ी परेशानी का सामना उठाना पड़ता है। जो बच्चे गांव से पढ़ाई करने के लिए समीप ग्राम गावडपुरा में माध्यमिक विद्यालय में जाते हैं तो बरसात में बीच में कुंडिया नदी का पानी आ जाने के कारण महीनों तक स्कूल नहीं जा पाते है
स्कूल भी उपेक्षा का शिकार

गांव में सिर्फ प्राथमिक विद्यालय ही है वह भी पूरी तरह से उपेक्षा का शिकार है। प्राथमिक विद्यालय में दो अध्यापक पढ़ाने के लिए आते हैं एवं आंगनवाड़ी में एक महिला कार्यकर्ता आती है। दोनों कभी भी शासन के नियमों का पालन नहीं करते। शुक्रवार के दिन भी 12 बजे तक स्कूल के बाहर बच्चे बैठे रहे, लेकिन अध्यापकों का कहीं कोई पता नहीं था। जबकि नियम अनुसार सुबह 10.30 बजे स्कूल शुरु हो जाना चाहिए। परेशान बच्चे अपनी कॉपी किताब हाथ में लिए तपती धूप में बैठे रहे। गांव के लोगों ने कहा कि शिकायत करते हैं परंतु कोई सुनवाई नहीं होती अध्यापक अपनी मनमर्जी चलाते हैं।
सालों से अंधेरे में रह रहे

गांव में कई सालों से बिजली तक नहीं है। शासन के जवाब दारों ने बिजली के पोल तो गाड़ दिए लेकिन किसी को कनेक्शन तक नहीं दिया। गांव के भीमा पिता रेवला ने बताया कि उसके घर में आज तक बिजली नहीं आ पाई है जब भी कोई कार्यक्रम होता है तो गांव वाले 1 किमी दूर तक तार खींच कर ले जाते हैं । उसके बाद में उन्हें एक बत्ती कनेक्शन की बिजली मिल पाती है । आज के युग में इस प्रकार अंधेरे में रहना बड़ा मुश्किल है। बच्चे रात में चिमनी में पढ़ाई करते हैं परंतु जवाबदार यहां पर कभी देखने तक नहीं आते हैं
शासन की किसी योजना का लाभ नहीं

गांव की रहने वाली अंगूर बाई पुंजा एवं तारा बाई गज्जू ने बताया कि आज तक शासन की किसी भी योजना का लाभ गांव वालों को नहीं मिल पाया है। जब उनसे कुटीर योजना क्या होती है यह पूछा गया तो वे नहीं बता पाई। उन्हें आज तक इसकी जानकारी तक नहीं मिल पाई है। उपरोक्त गांव पूरी तरह से शासन की योजनाओं के आभाव में उपेक्षा का शिकार है। जवाब दारों का कोई पता तक नहीं है। यहां तक कि जनप्रतिनिधि भी सिर्फ चुनाव के समय गांव में आते हैं उसके बाद में कोई यहां दोबारा झांकने तक नहीं आते हैं।

MP/CG लाइव टीवी

खबरें और लेख पढ़ने का आपका अनुभव बेहतर हो और आप तक आपकी पसंद का कंटेंट पहुंचे , यह सुनिश्चित करने के लिए हम अपनी वेबसाइट में कूकीज (Cookies) का इस्तेमाल करते हैं। हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति (Privacy Policy ) और कूकीज नीति (Cookies Policy ) से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned