सरकारी अस्पताल में रसूख पर लगी रोक, आआईसीसीयू में अब केवल हृदय रोगियों के मिलेगी जगह, सिविल सर्जन ने जारी किए आदेश

वार्ड तो कार्डियक पेशेंट का, भर्ती हो जाते हैं दूसरे मरीज

By: atul porwal

Published: 01 Jul 2019, 12:35 PM IST

पत्रिका एक्सक्लूसिव
धार.
डॉक्टरों से पहचान या वीआई का रसूख अब आईसीसीयू(इंटेंसिव कार्डियक केयर यूनिट) वार्ड में नहीं चलेगा। अमूमन नि:शुल्क सरकारी ईलाज कराने के लिए जिला अस्पताल आने वाले मरीज इस वार्ड में भर्ती होने के लिए डॉक्टरों से पहचान और वीआईपी होने का फायदा उठाते हैं, जिससे कार्डियक मरीजों को परेशान होना पड़ता है। लेकिन शनिवार को सिविल सर्जन ने इस पर रोक लगा दी है। आईसीसीयू वार्ड में अब केवल कार्डियक(हृदय रोग) मरीज ही भर्ती हो सकेंगे या ऐसे मरीज, जिनकी बीमारी कार्डियक से रिलेटेड है।
आईसीसीयू वार्ड की क्षमता केवल 7 बेड की है, लेकिन यहां हृदय रोग से ग्रसित मरीजों के अलावा अन्य बीमारियों के मरीज भी भर्ती हो जाते हैं। इस कारण जगह नहीं होने का खामियाजा कार्डियक मरीजों को भुगतना पड़ता है। इस समस्या के निराकरण के लिए सिविल सर्जन डॉ. एमके बोरासी ने आदेश जारी किया है कि आईसीसीयू वार्ड में केवल कार्डियक मरीज ही भर्ती हो सकेंगे। अन्य मरीजों को दूसरे वार्डों में भर्ती किया जाएगा। हालांकि वर्तमान में यहां भर्ती सभी सातों मरीज हृदय रोगी हैं। हालांकि इनमें से एक मरीज डाइबिटिक है, लेकिन इस बामारी का ताल्लुक हृदय रोग से भी है, जिससे मरीज पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत होती है।

एसी और खास देखरेख के कारण होती है मर्जी
बता रहे हैं कि आम बीमारियों से ग्रसित मरीज आईसीसीयू वार्ड में इसलिए भर्ती होना चाहते हैं, क्योंकि यहां की साफ सफाई के अलावा मरीजों की विशेष देखरेख की जाती है। अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि कार्डियक पेशेंट की ज्यादा ध्यान रखना डॉक्टर का पहला कर्तव्य होता है। ऐसे मरीज काफी गंभीर होते हैं।

जो लिख देते हैं आईसीसीयू वे ही देखने नहीं आते
कई मर्तबा डॉक्टर मरीजों को आईसीसीयू वार्ड में भर्ती के लिए लिख देते हैं, लेकिन इसके बाद वे उस मरीज को देखने तक नहीं आते हैं। अस्पताल से मिली जानकारी के अनुसार कई मर्तबा हड्डी रोग, गर्भवती, प्रसूता या अन्य दूसरी बामारी से ग्रसित मरीजों को आईसीसीयू वार्ड में भर्ती कर दिया जाता है, जिन्हें देखना उन डॉक्टरों की जिम्मेदारी है, लेकिन उनके नहीं आने से वार्ड के प्रभारी डॉक्टर पर लोड बढ़ जाता है।

जिला अस्पताल में नहीं है आईसीयू वार्ड
कार्डियक पेशेंट के लिए बने आईसीसीयू वार्ड के अलावा इंसेंटिव केयर यूनिट(आईसीयू) वार्ड भी होना चाहिए, जहां अन्य बीमारियों से ग्रसित गंभीर मरिजों को रखा जा सके। लेकिन धार जिला अस्पताल में आईसीयू वार्ड नहीं है, जिससे अन्य बीमारियों के मरीज भी आईसीसीयू वार्ड में भर्ती होने के लिए अपने पद या डॉक्टरों की पहचान का फायदा उठाते हैं।

कार्डियक मरीजों के लिए जरूरी है
आईसीसीयू वार्ड कार्डियक मरीजों के लिए है। वैसे भी इसकी क्षमता कम है, जिससे अन्य बीमारी के मरिजों के कारण कार्डियक ममरिजों को जगह नहीं मिल पाती है। इसलिए यह आदेश जारी किया है कि इस वार्ड में केवल कार्डियक या इससे संबंधित गंभीर मरिजों को ही भर्ती किया जाए।
-डॉ. एमके बोरासी, सिविल सर्जन

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