मध्यप्रदेश सिंह का नाम सुनते ही ठहाके लगाकर हंसते हैं लोग, तीन महीने के बेटे का रखा भोपाल सिंह

 

नाम को साबित करने के लिए कई बार दिखाने पड़ते हैं पेपर

धार/ 1 नवंबर 2019 को अपना मध्यप्रदेश 64 साल का हो जाएगा। अपने स्थापना काल के 64 वर्षों में मध्यप्रदेश ने कई उतार-चढ़ाव देखें हैं। लेकिन हम आपको मध्यप्रदेश के एक ऐसे शख्स के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनका नाम ही मध्यप्रदेश सिंह अम्लावर है। कई बार तो इनके साथ ऐसा होता था कि नाम सुन लोग ठहाके लगाने लगते थे। समझ बैठते थे कि यह मजे ले रहा है। कई बार तो अपने नाम को सही साबित करने के लिए इन्हें अपने डॉक्यूमेंट्स दिखाने पड़े।

सुनकर तो किसी को यकीन नहीं होता है कि क्या किसी व्यक्ति का नाम इस प्रकार से हो सकता है। मगर यह सौ आने सच है, इनका नाम मध्यप्रदेश सिंह अम्लावर ही हैं। और तो और अब इन्होंने तीन महीने पहले हुए अपने बेटे का नाम भी मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल के नाम पर रख दिया है। यानी बेटे का नाम अब भोपाल सिंह अम्लावर है। मध्यप्रदेश सिंह को अपने नाम की वजह से कई बार मुश्किलों का सामना भी करना पड़ा लेकिन उन्हें खुशी है कि उनका नाम प्रदेश के नाम पर है।


कौन हैं मध्यप्रदेश सिंह
मध्यप्रदेश सिंह धार जिले के मनावर तहसील स्थित भमोरी गांव के रहने वाले हैं। 34 साल के मध्यप्रदेश सिंह झाबुआ पीजी कॉलेज में गेस्ट फैक्लटी हैं और भूगोल पढ़ाते हैं। नौ भाई-बहनों में मध्यप्रदेश सिंह सबसे छोटे हैं। इनके पिता मदन अम्लावर की चाहत थी कि वह अपने छोटे बेटे का नाम कुछ अलग रखें। तभी मदन अम्लावर के सबसे बड़े बेटे राधु सिंह अम्लावर ने उन्हें मध्यप्रदेश नाम सुझाया। क्योंकि उन्हें स्कूल में शिक्षक ने पढ़ाया था कि हम मध्यप्रदेश में रहते हैं। पिता ने भी इस नाम पर सहमति दे दी और मध्यप्रदेश सिंह का नाम मध्यप्रदेश रख दिया गया।

होती है खुशी
अब मध्यप्रदेश की पहचान उनके काम से ज्यादा नाम से ही है। हालंकि इन्हें कई बार इस नाम की वजह से मुश्किलों का सामना भी करना पड़ा तब आधार कार्ड को दिखाकर मुक्ति पाई। लेकिन अब उन्हें अपने नाम पर गर्व है, क्योंकि इसने उन्हें अलग पहचान दिला दी। धार के इलाके में मध्यप्रदेश की सिंह एक अलग पहचान है। झाबुआ के अलावा श्योपुर में भी मध्यप्रदेश सिंह गेस्ट फैक्लटी रह चुके हैं।


बेटे का नाम भोपाल सिंह
मध्यप्रदेश की सिंह की पत्नी किरण बताती हैं कि हम दोनों पहले एक ही कॉलेज में पढ़ते थे। इनका नाम सुन लोगों को अटपटा लगता था। जब मैं इनसे मिली तो मुझे भी बहुत खुशी हुई। शादी के दौरान भी हमारे घर लोग इनका नाम सुन अचंभित थे। तीन माह पूर्व हुए बेटे का हमलोगों ने भोपाल सिंह नाम रखा है। किरण ने कहा कि हमें बहुत खुशी है कि मेरे पति का नाम मध्यप्रदेश सिंह है। इनसे नाम की वजह से ही बड़े-बड़े लोग मिलने आते हैं।

पढ़ाई में नहीं लगता था मन
मध्यप्रदेश सिंह को शुरुआत में पढ़ाई में मन नहीं लगता था। उसी का नतीजा रहा कि उन्हें दसवीं में महज 42.8 प्रतिशत नंबर ही हासिल हुए। लेकिन बाद में पढ़ाई के प्रति रुचि बढ़ने लगी और ग्रेजुएशन में 64.33 फीसदी मार्क्स आए। उन्होंने एमफील भी किया जिसमें 79.5 फीसदी अंक प्राप्त हुए। उसके बाद इन्होंने स्टेट सेट परीक्षा भी पास कर ली। लेकिन कॉलेज में उनके छात्र आज भी मध्यप्रदेश सिंह से पूछते हैं कि आपने ये नाम क्यों रखा।

Muneshwar Kumar
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