रात के इस समय सक्रिय रहते हैं भूत-पिशाच, भूलकर भी ना निकलें घर से बाहर

रात के इस समय सक्रिय रहते हैं भूत-पिशाच, भूलकर भी ना निकलें घर से बाहर

Tanvi Sharma | Publish: Sep, 14 2018 12:30:50 PM (IST) धर्म कर्म

रात के इस समय सक्रिय रहते हैं भूत-पिशाच, भूलकर भी ना निकलें घर से बाहर

हिन्दू धर्म में पूर्णिमा, अमावस्या दोनों ऐसे दिन हैं जिनका मानव जीवन पर बहुत ही गहरा प्रभाव पड़ता है। हिंदू पंचाग के अनुसार हर महीने में 30 दिन होते हैं, उन 30 दिनों को चंद्रकला के आधार पर 15-15 दिन को 2 पक्षों में शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष में बांटा गया है। इन्हीं दोनों पक्षों में शुक्ल पक्ष के अंतिम दिन को पूर्णिमा कहा जाता है और कृष्ण पक्ष के अंतिम दिन को अमावस्या कहा जाता है। इन दोनों दिनों को लेकर ही लोगों में डर बना रहता है। पूर्णिमा को लेकर तो कुछ ज्यादा नहीं लेकिन अमावस्या को लेकर तो खासकर लोग भयभीत रहते हैं। सालभर में 12 पूर्णिमा और 12 अमावस्या होती हैं, जिनमें सबका अपना अलग ही महत्व होता है।

आपको बता दें की कृष्ण पक्ष की अमावस्या के समय दानव आत्माएं ज्यादा सक्रिय होती हैं। कहा जाता है की जब दानवी आत्माएं ज्यादा सक्रिय होती हैं, उस समय दानवी प्रवृति हर मनुष्य पर हावी रहती है। इसीलिए अमावस्या के दिन के कुछ घंटों और रात के कुछ घंटों में घर से बाहर निकलना अच्छा नहीं माना जाता। क्योंकि इस दिन भूत-प्रेत, पितृ, पिशाच, निशाचर जीव-जंतु और दैत्य ज्यादा सक्रिय रहते हैं। इसलिए हमेशा बड़े बुजूर्गों द्वारा भी इस दिन विशेष सावधानी रखने को कहा जाता है।

amavasya

आखिर अमावस्या के दिन ही क्यों सक्रिय रहती है प्रेत-आत्मा

ज्योतिष के अनुसार चंद्रमा मन के देवता कहलाते हैं और अमावस्या के दिन चंद्रमा दिखाई नहीं देता। ऐसे में चंद्रमा की रोशनी पृथ्वी पर नहीं पड़ती और चंद्रमा की अनुपस्थिति में रज-तम फैलाने वाली अनिष्ट शक्तियां (भूत, प्रेत, पिशाच ), और काला जादू में फंसे लोग और प्रमुख रूप से राजसिक और तामसिक लोग अधिक प्रभावित होते हैं। इस दोरान आत्महत्या अथवा भूतों द्वारा आवेशित होना आदि घटनाएं भी अधिक मात्रा में होती हैं। विशेषरूप से रात के समय क्योंकि अमावस्या की रात अनिष्ट शक्तियों के लिए मनुष्य को कष्ट पहुंचाने का स्वर्णिर्म अवसर होता है। जो लोग अति भावुक होते हैं, उन पर इस बात का सर्वाधिक प्रभाव पड़ता है।

अमावस्या माह में एक बार ही आती है। शास्त्रों में अमावस्या तिथि का स्वामी पितृदेव को माना जाता है। अमावस्या सूर्य और चन्द्र के मिलन का काल है। इस दिन दोनों ही एक ही राशि में रहते हैं। सोमवती अमावस्या, भौमवती अमावस्या, मौनी अमावस्या, शनि अमावस्या, हरियाली अमावस्या, दिवाली अमावस्या, सर्वपितृ अमावस्या आदि मुख्‍य अमावस्या होती है।

अमावस्या के दिन ना करें ये काम

1. अमावस्या पर किसी भी इंसान को श्मशान घाट या कब्रिस्तान में या उसके आस-पास नहीं घूमना चाहिए।
2. अमावस्या के दिन सुबह देर तक सोते ना रह जाएं. जल्दी उठे और पूजा-पाठ करें।
3. इस अमावस्या पर शराब और मांस इत्यादि से दूर रहें।

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