ज्‍योतिष के अनुसार सुहागरात पर दूध के गिलास का क्या है मतलब

ज्‍योतिष के अनुसार सुहागरात पर दूध के गिलास का क्या है मतलब

Pawan Tiwari | Publish: May, 14 2019 05:33:13 PM (IST) धर्म कर्म

ज्‍योतिष के अनुसार सुहागरात पर दूध के गिलास का क्या है मतलब

हमारे शास्त्र में बताया गया है कि शादी दो आत्माओं का मिलन होता है। यह जीवन की एक बड़ी शुभ घटना मानी जाती है। शादी की पहली रात को सुहागरात कहते हैं। जिसमें पति और पत्नी दोनों एक हो जाते हैं। इस रात को यादगार बनाने के लिए पति-पत्नी के कमरे को हर तरह से सजाया जाता है ताकि वो पल पूरी जिंदगी उन्हें याद रहे। कहा जाता है कि उस रात दुल्हन दूल्हे को दूध और केसर से भरा गिलास देती है।


शादी की पहली रात यानि सुहागरात में अधिकतर शादी-शुदा जोड़ों को केसर और बादाम से मिला दूध पीने को दिया जाता है। ऐसे में आप सोच रहे होंगे कि ये तो सदियों से परंपरा चली आ रही है, इसमें नई बात क्या है। उसी का आज तक पालन किया जा रहा है लकिन ऐसा नहीं है। आज हम आपको बताएंगे इसके पिछे का धार्मिक महत्व। आखिर क्यों सुहागरात को दूल्हा और दुल्हन को केसर और बादाम से मिला दूध पीने को दिया जाता है। आइये जानते हैं...


हमारे ज्योतिष शास्त्र में दूध को शुक्र और चंद्रमा ग्रह का प्रतीक माना जाता है। माना जाता है कि दुल्हन का दूध के गिलास को ले जाने का प्रभाव इन दोनों ग्रहों पर पड़ता है। माना जाता है कि शुक्र और चंद्रमा वैवाहिक जीवन को बनाते हैं। दरअसल, शुक्र ग्रह पुरुषों में शुक्राणु और कामेच्छा का प्रतीक माना गया है, जबकि चंद्रमा मन का प्रतीक। ज्योतीष के अनुसार, दोनों ग्रहों में संतुलन स्थापित करने के लिए दूध रस्म का निर्माण किया गया है। यही कारण है कि सुहागरात को दुल्हन दुल्हे के लिए दूध से भरा गिलास कमरे में लेकर जाती है।

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