अगर चाहते हैं इस ग्रह की कृपा तो, कर्क राशि के जातक पहने यह रत्न

Shyam Kishor

Publish: Jul, 13 2018 05:23:29 PM (IST)

धर्म कर्म
अगर चाहते हैं इस ग्रह की कृपा तो, कर्क राशि के जातक पहने यह रत्न

कर्क राशि के जातक पहने यह रत्न

ज्योतिष शास्त्र में हिन्दू धर्म को मानने वालों के भूत-भविष्य की गणना में करने में बड़ा महत्व है, कहा जाता हैं कि ज्योतिष शास्त्र में जातक की सभी पीडाओं का हल बताया जाता है, ज्योतिष शास्त्र के अनुसार व्यक्ति को मिलने वाली सभी परेशानियों का संबंध नव ग्रहों से माना जाता हैं, और इन ग्रहों के रत्नों को धारण करने से मनुष्य के शारीरिक सौंदर्य को बढ़ाने के साथ-साथ अलग-अलग समस्याओं के निवारण में सहायक होते हैं । रत्न माणिक्य, मोती, हीरा, पन्ना और नीलम ये सभी महारत्न कहे जाते है । इन्हीं रत्नों में से एक है मोती रत्न जिसे धारण करने से अनेक लाभ जातक को होते हैं ।

 

मोती रत्न


मोती, समुद्र में सीपियों द्वारा बनाया जाने वाला अद्भुत रत्न है जो बड़ी ही दुर्लभता से मिलता है, बनावट से शुद्ध मोती बिल्कुल गोल व रंग में दूध के समान सफ़ेद होता है । मोती रत्न का स्वामी ग्रह चंद्रमा है एवं कर्क राशी के जातकों के लिए यह सबसे ज्यादा लाभकारी माना जाता है । कुंडली में चन्द्र ग्रह से सम्बंधित सभी दोषों में मोती को धारण करना लाभप्रद होता है, चंद्रमा का प्रभाव एक जातक के मस्तिष्क पर सबसे अधिक होता है इसलिए मन को शांत व शीतल बनाये रखने के लिए मोती धारण करना चाहिए ।

 

मोती धारण करने के लाभ


ज्योतिष के अनुसार किसी जातक की कुंडली में चंद्रमा की स्थिति व उसके प्रभाव के अनुसार मोती के अलग-अलग लाभ मिलते है इसलिए जब कभी भी आप मोती को धारण करने का मन बनाये तो किसी जानकार से सलाह अवश्य ले । मन व शरीर को शांत व शीतल बनाएं रखने के लिए मोती रत्न को धारण करना चाहिए । नेत्र रोग, गर्भाशय रोग व ह्रदय रोग में मोती धारण करने से लाभ मिलता है । अगर किसी जातक की कुंडली में चन्द्र ग्रह के साथ राहु और केतु के योग बना हो तो मोती रत्न धारण करने से राहू और केतु के बुरे प्रभाव कम होने लगता हैं ।

 

मोती रत्न को धारण करने की विधि


मोती रत्न को शुक्ल पक्ष के किसी भी सोमवार के दिन चांदी की अँगूठी में बनाकर सीधे हाथ की सबसे छोटी ऊंगली में पहनना चाहिए, इसे धारण करने से पूर्व दूध-दही-शहद-घी-तुलसी पत्ते आदि से पंचामृत स्नान कराने के बाद गंगाजल साफ कर दूप-दीप व कुमकुम से पूजन कर इस मंत्र को 108 बार जपने के बाद ही धारण करें ।


मंत्र


ॐ चं चन्द्राय नमः ।


किसी भी रत्न का सकारात्मक प्रभाव तभी तक रहता है जब तक कि उसकी शुद्धता बनी रहती है ।

Moti Ratna
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