न अकाल, न बाढ़, ठीक ठाक रहेगा सब कुछ इस साल

सुनाने वालों के साथ सुनने वालों की पीढि़यां बदल गई। पर, आस्था और विश्वास आज भी इतना ही है

By: सुनील शर्मा

Published: 15 Jan 2017, 11:57 AM IST

दड़ा महोत्सव ने एक बार फिर आने वाले साल के मध्यम रहने के संकेत दिए हैं। दड़ा न अखनियां दरवाजे की सीमा लांघ पाया और नहीं दूनी दरवाजे को भेद पाया। हजारों खिलाडिय़ों की तीन घण्टे की कड़ी मशक्कत के बाद भी दड़ा बिना परिणाम दिए गोपाल चौक के इर्द-गिर्द ही लुढ़कता रहा।

मान्यता है कि दड़ा दूनी दरवाजे को पार कर जाए तो वर्ष समृद्धि लाने वाला होगा। यह अखनियां दरवाजा भेद जाए तो अकाल पड़ेगा। दड़ा किसी भी दरवाजे को नहीं भेद सकने के कारण अकाल न सुकाल अब रहेगा मध्यम साल के कयास लगाते रहे।

126 बरस की परम्परा
सुनाने वालों के साथ सुनने वालों की पीढि़यां बदल गई। पर, आस्था और विश्वास आज भी इतना ही है। गांव भूगड़ा में शनिवार को परम्पराओं के निर्वहन को हजारों की भीड़ उमड़ पड़ी। पंडित दक्षेश पंड्या ने धर्म-आध्यात्म की व्याख्या की। इसके बाद वर्ष भर में होने वाली आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक उठापठक के बारे में बात कही।

लाल वस्तुओं में तेजी
खाद्यान्न सामग्री में लाल वस्तुएं मसलन चना, गेहूं, ग्वार और प्याज के भाव बढ़ेंगे। लोहा भी महंगा होगा। खंड बरसात होगी।

आएंगे नए कानून
सरकार मकानों और जमीनों के लिए नए-नए कानून बना सकती है। आंधी-तूफान से किसानों में रोष बढ़ेगा।

युवा रहें सचेत

इस बरस युवाओं को सचेत रहने की जरूरत है। नशे से बचें और विवादों से दूर रहें। मन लगाकर कार्य करेंगे तो विकास होगा।
सुनील शर्मा
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned